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'अपनी इन-हैंड सैलरी देखकर गिल्ट हो रहा है', नई नौकरी के पहले ही दिन ऐसा क्या हुआ कि परेशान हो गया फ्रेशर?

पहली नौकरी में मिली 43 हजार सैलरी, लेकिन सीनियर और ऑफिस बॉय की पगार सुनते ही उड़ गए फ्रेशर कर्मचारी के होश. जानिए सोशल मीडिया पर क्यों वायरल हो रहा है यह अजीबोगरीब वाकया.

'अपनी इन-हैंड सैलरी देखकर गिल्ट हो रहा है', नई नौकरी के पहले ही दिन ऐसा क्या हुआ कि परेशान हो गया फ्रेशर?
12 साल का एक्सपीरियंस और सैलरी 31 हजार, फ्रेशर को मिल रहे 43 हजार; स्टार्टअप के इस किस्से पर छिड़ी बहस (सांकेतिक तस्वीर)
Unsplash

Viral Stories: सोशल मीडिया पर आम तौर पर लोग कम सैलरी का रोना रोते हैं, लेकिन रेडिट (Reddit) पर एक मामला बिल्कुल उल्टा है. 'r/IndianWorkplace' फोरम पर एक शख्स ने अपनी अजीब सी परेशानी शेयर करते हुए लिखा है- 'मुझे अपनी इन-हैंड सैलरी देखकर गिल्ट हो रहा है'. आखिर अपनी ही अच्छी-खासी कमाई से किसी को अपराधबोध क्यों हो सकता है? आइए जानते हैं स्टार्टअप के इस वायरल किस्से की पूरी कहानी.

क्या है गिल्ट की असली वजह?

इस शख्स को हाल ही में एक स्टार्टअप में मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव की नौकरी मिली है. 2 साल की इंटर्नशिप के बाद यह उसकी पहली फुल-टाइम जॉब है. इस नौकरी में उसे हर महीने 43,000 रुपये इन-हैंड सैलरी मिल रही है. लेकिन उसका यह 'गिल्ट' तब शुरू हुआ, जब उसे उसी दिन जॉइन करने वाले एक दूसरे कर्मचारी का सच पता चला.

उसके साथ जिस सेल्स कर्मचारी ने जॉइन किया है, उसके पास रिलायंस, विजय सेल्स और क्रोमा जैसी कंपनियों में काम करने का 12 साल का लंबा अनुभव है. उसने हाल ही में अपनी इंडस्ट्री बदली है. हैरानी की बात यह है कि 12 साल काम करने के बावजूद उसे बिना किसी इंसेंटिव के सिर्फ 31,000 रुपये ही मिल रहे हैं. वहीं, बातों ही बातों में पता चला कि ऑफिस बॉय की सैलरी 15,000 रुपये है. अपने अनुभवी साथी से ज्यादा सैलरी पाकर यह नया कर्मचारी परेशान है. उसे लग रहा है कि कंपनी अनुभवी लोगों का फायदा उठा रही है, लेकिन नया होने की वजह से वह इस इंडस्ट्री के पेंच नहीं समझ पा रहा.

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यूजर्स ने बताई कॉरपोरेट की सच्चाई

इस पोस्ट पर लोगों ने उसे गिल्ट से बाहर निकलने की सलाह दी है. यूजर्स ने समझाया कि हर किसी का रोल अलग है. हो सकता है नए कर्मचारी से कंपनी की उम्मीदें ज्यादा हों. इसके अलावा, छोटी फर्म में मार्केटिंग के रोल में बिना किसी फिक्स टाइमिंग के काम करने के लिए भी तैयार रहना पड़ता है.

एक दूसरे यूजर ने लिखा, 'सैलरी सिर्फ काम के सालों पर नहीं, बल्कि आपकी स्किल्स, मार्केट डिमांड और रिस्क लेने की क्षमता पर निर्भर करती है. उसने अपना ही उदाहरण देते हुए बताया कि वो खुद 22-23 लाख का पैकेज ले रहे हैं, जबकि उनके बराबर अनुभव वाले दूसरे लोग 14-15 लाख पर ही हैं. यानी लगातार नई स्किल्स सीखना जरूरी है, सिर्फ लंबा अनुभव ज्यादा सैलरी की गारंटी नहीं है.'

तीसरे यूजर से एक सीधी सलाह यह भी मिली कि कर्मचारी को सिर्फ इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि वह कंपनी को बदले में क्या और कितना आउटपुट दे सकता है.

(अस्वीकरण: यह कहानी रेडिट पर वायरल हुई एक पोस्ट और उसके बाद मिली सार्वजनिक प्रतिक्रियाओं पर आधारित है. एनडीटीवी ने पोस्ट में उल्लिखित व्यक्तियों द्वारा किए गए दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है.)

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