विज्ञापन

IIT-NIT के छात्रों को मिलने वाले एक करोड़ के सैलरी पैकेज में इन हैंड सैलरी कितनी होती है?

आईआईटी और एनआईटी के छात्रों को मिलने वाले 1 करोड़ के पैकेज में इन-हैंड सैलरी कितनी होती है. जानिए बेस सैलरी, बोनस, स्टॉक ऑप्शंस और टेक-होम सैलरी का पूरा कैलकुलेशन.

IIT-NIT के छात्रों को मिलने वाले एक करोड़ के सैलरी पैकेज में इन हैंड सैलरी कितनी होती है?
एक करोड़ के पैकेज में इनहैंड सैलरी कितनी हो सकती है

1 Crore Salary Package Breakdown: IIT-NIT से पढ़ने वाले छात्रों का पैकेज बेहद शानदार होता है. कई बार तो कुछ छात्रों को कैंपस प्लेसमेंट में 1 करोड़ या उससे भी ज्यादा का सालाना पैकेज मिलता है. इस खबर के आते ही छात्र के परिवार में जश्न मननने लगता है और हर तरफ इसकी चर्चा होने लगती है. लेकिन क्या सचमुच छात्र को हर साल पूरे 1 करोड़ रुपए मिलते हैं, क्या हर महीने उसके बैंक अकाउंट में 8-9 लाख रुपए आते हैं या कुछ कम-ज्यादा करके मिलते हैं. आइए जानते हैं एक करोड़ के सैलरी पैकेज में इन हैंड सैलरी कितनी होती है, इस पैकेज का पूरा गणित और ऑफर लेटर साइन करने से पहले किन बातों पर ध्यान देना जरूरी है.

क्या 1 करोड़ के पैकेज में पूरा पैसा मिलता है?

1 करोड़ का पैकेज सुनने में जितना बड़ा लगता है, उतना पैसा हर साल बैंक अकाउंट में नहीं आता है. कंपनियां जिस CTC (Cost to Company) को पैकेज बताती हैं, उसमें कई तरह के पेमेंट्स और बेनिफिट्स शामिल हो सकते हैं. इसमें बेस सैलरी, बोनस, ज्वॉइनिंग बोनस, स्टॉक ऑप्शंस ESOPs या RSUs हो सकते हैं. यही कारण है कि 1 करोड़ के CTC और इन हैंड सैलरी में काफी बड़ा अंतर हो सकता है.

CTC और इन-हैंड सैलरी में अंतर 

मान लीजिए किसी IIT या NIT के छात्र को कंपनी ने 1 करोड़ का सालाना CTC ऑफर दिया है. इसका मतलब यह नहीं है कि हर महीने उसके बैंक अकाउंट में 8-9 लाख ही आएंगे. 1 करोड़ को 12 महीने से बांटने पर करीब 8.33 लाख रुपए महीना जरूर बनता है, लेकिन यह सिर्फ CTC का गणित है. असली सैलरी स्लिप इससे काफी अलग हो सकती है. CTC में वह रकम भी शामिल हो सकती है, जो हर महीने नहीं मिलती है.

1 करोड़ के पैकेज में इन-हैंड सैलरी कितनी हो सकती है

आमतौर पर 1 करोड़ के CTC वाले ऑफर में बेस सैलरी कुल पैकेज का करीब 35-40% हो सकती है. इसके बाद टैक्स और दूसरी कटौतियां होती हैं. अनुमान के हिसाब से ऐसे पैकेज में इन-हैंड सैलरी करीब 35-45 लाख सालाना के आसपास हो सकती है. यानी महीने के हिसाब से देखें तो ये करीब 3-3.75 लाख के आसपास बैठ सकती है. लेकिन इसे कोई फिक्स आंकड़ा नहीं मानना चाहिए. किसी कंपनी में इससे कम इन-हैंड हो सकती है, तो किसी दूसरी कंपनी में ज्यादा भी हो सकती है. इसका पूरा हिसाब ऑफर लेटर में दिए गए सैलरी स्ट्रक्चर (Salary Structure) पर डिपेंड करता है.

1 करोड़ का पैकेज आखिर जाता कहां है

1. बेस सैलरी (Base Salary)

अब इसे एक आसान एग्जाम्प से समझते हैं. मान लीजिए किसी छात्र का CTC एक करोड़ है. कंपनी इस रकम को कई हिस्सों में बांट सकती है. बेस सैलरी (Base Salary), जो रेगुलर सैलरी का सबसे जरूर पार्ट होता है. इसी बेस सैलरी पर PF, टैक्स जैसी कटौतियां लागू हो सकती हैं. कटौती के बाद जो रकम आपके बैंक खाते में आती है, वही टेक-होम यानी इन-हैंड सैलरी होती है. 1 करोड़ के पैकेज में बेस सैलरी कई मामलों में कुल CTC का करीब 35-40% हो सकती है.

2. ज्वॉइनिंग बोनस (Joining Bonus)

कई बड़ी कंपनियां नए एम्पलॉई को कंपनी ज्वॉइन करने पर ज्वॉइनिंग बोनस देती हैं. मान लीजिए ऑफर में 10 लाख रुपए का ज्वॉइनिंग बोनस लिखा है. इसका मतलब यह नहीं है कि हर महीने आपकी सैलरी में 10 लाख रुपए जुड़ेंगे. ये रकम आमतौर पर एकमुश्त या कंपनी की तय शर्तों के मुताबिक दी जाती है. कई बार इस पर टैक्स भी लागू होता है. इसलिए ऑफर लेटर में यह जरूर देखें कि ज्वॉइनिंग बोनस कब मिलेगा और क्या इसके साथ कोई लॉक-इन या रिपेमेंट कंडीशन है.

3. परफॉर्मेंस बोनस (Performance Bonus)

1 करोड़ के पैकेज में एक हिस्सा परफॉर्मेंस बोनस का भी हो सकता है. ये पैसा कंपनी और कर्मचारी के परफॉर्मेंस से जुड़ा हो सकता है. जैसे अगर CTC में 15 लाख रुपए का वैरिएबल पे दिख रहा है तो जरूरी नहीं कि पूरे 15 लाख रुपए मिल ही जाएं. कंपनी की पॉलिसी और एम्प्लॉई के परफॉर्मेंस के आधार पर मिलने वाली रकम कम या ज्यादा हो सकती है. इसलिए फिक्स्ड सैलरी और वैरिएबल सैलरी को अलग-अलग देखना बहुत जरूरी है.

4. ESOPs और RSUs

कई टेक कंपनियां अपने कर्मचारियों को ESOPs या RSUs देती हैं. कागज पर इन शेयरों की वैल्यू लाखों या करोड़ों रुपए हो सकती है, लेकिन ये पूरी रकम आपको पहले साल ही कैश के रूप में नहीं मिल जाती है. अक्सर स्टॉक कंपनशेसन (Stock Compensation) कई साल में धीरे-धीरे मिलता है. इसे वेस्टिंग (Vesting) कहा जाता है. मान लीजिए किसी को 40 लाख रुपए के RSUs दिए गए हैं और उनका वेस्टिंग पीरियड (Vesting Period) 4 साल है. तो यह जरूरी नहीं कि पहले साल ही कर्मचारी के बैंक अकाउंट में 40 लाख रुपए आ जाएं. असल में शेयर एक तय शेड्यूल के हिसाब से वेस्ट (Vest) हो सकते हैं. इसके अलावा शेयर की मार्केट वैल्यू भी ऊपर-नीचे होती रहती है.

ऑफर लेटर में इन चीजों को जरूर चेक करें

1. सबसे पहले देखें कि आपकी गारंटीड एनुअल सैलरी कितनी है. यही वह हिस्सा है जिस पर आपकी रेगुलर इनकम सबसे ज्यादा निर्भर करेगी.

2. अगर CTC में बोनस या वैरिएबल-पे बड़ा है, तो ये देखें कि वो गारंटीड है या परफॉर्मेंस पर निर्भर करता है.

3. ESOP और RSU की Value कैसे तय हुई है, इसे भी ऑफर लेटर में जरूर चेक करें. ये देखें कि कितने शेयर या यूनिट्स मिल रहे हैं और उनका वेस्टिंग पीरियड कितना है और श्तें क्या हैं.

4. कई कंपनियों में ज्वॉइनिंग बोनस के साथ कुछ शर्तें हो सकती हैं. इसलिए अगर कर्मचारी एक तय समय से पहले कंपनी छोड़ता है, तो बोनस का कुछ हिस्सा वापस करना पड़ सकता है. इसलिए ऑफर लेटर और टर्म्स जरूर पढ़ें.

5. एम्प्लॉयर पीएफ और दूसरे बेनिफिट्स कितने हैं.

ये भी पढ़ें - AI वाली नौकरियां भी नहीं हैं सेफ, रिपोर्ट ने बताया कैसे टेक इंडस्ट्री में बज रही खतरे की घंटी

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
IIT, Salary Package, In Hand Salary, CTC Salary Vs In-hand Amount
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com