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'इसे इंसान ने नहीं, AI ने लिखा है...' कहानी ने जीता बड़ा अवॉर्ड, अब साहित्य जगत में मचा हंगामा

यूके की मशहूर साहित्य ग्रांटा मैगजीन (Granta Magazine) में छपी 'The Serpent in the Grove' नाम की शॉर्ट स्टोरी को प्रतिष्ठित कॉमनवेल्थ प्राइज से सम्मानित किया गया है. हालांकि, अब लोगों का कहना है कि इस कहानी को AI की मदद से लिखा गया है.

'इसे इंसान ने नहीं, AI ने लिखा है...' कहानी ने जीता बड़ा अवॉर्ड, अब साहित्य जगत में मचा हंगामा
AI की लिखी कहानी ने जीता सम्मान या फिर हो रही है गलतफहमी? दुनिया भर में छिड़ी बहस (प्रतीकात्मक तस्वीर)

क्या कोई मशीन ऐसी कहानी लिख सकती है, जो लोगों को भावुक कर दे, उनके दिल तक पहुंच जाए और बड़े साहित्य पुरस्कार भी जीत ले? इस तरह के सवाल इन दिनों दुनिया भर में चर्चा का विषय बने हुए हैं. वजह है एक ऐसी कहानी, जिसने बड़ा साहित्य सम्मान तो अपने नाम कर लिया, लेकिन अब उसी पर AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लिखे जाने के आरोप लग रहे हैं. इस पूरे विवाद ने लेखन और साहित्य की दुनिया में नई चिंता खड़ी कर दी है.

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, यूके की मशहूर साहित्य ग्रांटा मैगजीन (Granta Magazine) में छपी 'The Serpent in the Grove' नाम की शॉर्ट स्टोरी को प्रतिष्ठित कॉमनवेल्थ प्राइज (Commonwealth Prize) से सम्मानित किया गया था. यह कहानी 61 वर्षीय लेखक जमीर नजीर ने लिखी है. लेकिन कहानी को पुरस्कार मिलने के बाद अब इसे लेकर सोशल मीडिया पर अचानक सवाल उठने लगे हैं. साहित्य विशेषज्ञों, प्रोफेसरों और कई सोशल मीडिया यूजर्स ने दावा किया कि कहानी की भाषा और उसका लिखने का तरीका AI टूल्स जैसा लग रहा है.

लोगों को क्यों हुआ AI का शक?

लोगों का कहना है कि कहानी में कई वाक्य और लिखने का तरीका उन पैटर्न जैसा है, जो अक्सर AI चैटबॉट्स में देखने को मिलता है. कुछ लोगों ने कहानी के शब्दों के इस्तेमाल, तुलना करने के तरीके और भाषा की बनावट को एकदम AI जैसा बताया. इसी के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई.

इन बातों का सच जानने के लिए कुछ लोगों ने AI पहचानने वाले टूल का इस्तेमाल भी किया. इससे जुड़े कई स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर शेयर किए गए हैं और इन सभी स्क्रीनशॉट्स में कहानी को 100% AI-जनरेटेड बताया गया है. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि अभी AI पहचानने वाले टूल पूरी तरह भरोसेमंद नहीं हैं. फिलहाल दुनिया में ऐसा कोई पक्का तरीका नहीं है, जो सौ प्रतिशत यकीन के साथ बता सके कि कोई लेख इंसान ने लिखा है या AI ने.

क्या बोलीं पुरस्कार देने वाली संस्थाएं?

Granta Magazine ने इन आरोपों को स्वीकार किया है, लेकिन अभी तक कोई अंतिम नतीजा सामने नहीं आया है. वहीं, Commonwealth Foundation का कहना है कि पुरस्कार देने से पहले AI जांच नहीं की गई थी. संस्था के मुताबिक, अभी AI पहचानने के भरोसेमंद साधन मौजूद नहीं हैं. ऐसे में साहित्य की दुनिया को अभी 'भरोसे' और 'ईमानदारी' के आधार पर ही आगे बढ़ रही है. 

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

बता दें कि यह पहला ऐसा मामला नहीं है. पिछले कुछ महीनों में कई किताबों, लेखों और पत्रकारों पर AI इस्तेमाल करने के आरोप लग चुके हैं. इससे लेखन की दुनिया में नई बहस शुरू हो गई है.

अब सवाल सिर्फ एक कहानी का नहीं है. बड़ा सवाल यह है कि अगर AI इंसानों जैसी भावनाएं, कहानियां और विचार लिखने लगे, तो आने वाले समय में असली लेखक और मशीन के बीच फर्क कैसे होगा? यही सवाल अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है.

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(Disclaimer: यह खबर सोशल मीडिया पर यूजर द्वारा की गई पोस्ट से तैयार की गई है. एनडीटीवी इस कंटेंट की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता.)

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