कॉर्पोरेट दुनिया में वर्क फ्रॉम होम अब आम बात बन चुकी है, लेकिन क्या एक दिन के लिए घर से काम करने की मांग किसी की नौकरी छीन सकती है? गुरुग्राम के एक स्टार्टअप में ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां एक कर्मचारी को सिर्फ WFH मांगने के दो मिनट के अंदर नौकरी से निकाल दिया गया. इस घटना ने सोशल मीडिया पर तीखी बहस छेड़ दी है.
क्या है पूरा मामला?
गुरुग्राम के एक स्टार्टअप फाउंडर निखिल राणा, जो ‘The 15' नाम के नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म से जुड़े हैं, उन्होंने खुद इस घटना को सोशल मीडिया पर शेयर किया. उन्होंने LinkedIn पर एक WhatsApp चैट का स्क्रीनशॉट पोस्ट किया, जिसमें एक कर्मचारी ने मैसेज करके कहा कि वह उस दिन ऑफिस नहीं आ पाएगा और वर्क फ्रॉम होम करना चाहता है. इस पर फाउंडर ने महज दो मिनट के अंदर जवाब देते हुए उसे नौकरी से निकाल दिया और बताया कि उसी दिन उसका आखिरी दिन होगा.
फाउंडर ने क्या दी सफाई?
निखिल राणा ने अपने पोस्ट में इस फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि वह नो नोटिस पीरियड पॉलिसी में विश्वास रखते हैं. उन्होंने नोटिस पीरियड को सिर्फ दिखावा और समय की बर्बादी बताया. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि वह अपने कर्मचारियों में किन गुणों को महत्व देते हैं, जैसे- जिम्मेदारी लेने की क्षमता, भरोसेमंद होना, बिना बहाने काम पूरा करना, सही समय का इंतजार न करना. उन्होंने यह भी कहा कि आज के समय में स्किल्स की वैल्यू कम हो गई है क्योंकि वे आसानी से उपलब्ध हो गई हैं.
सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया
इस पोस्ट के सामने आते ही इंटरनेट पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं. कई लोगों ने फाउंडर की आलोचना करते हुए कहा कि यह फैसला संवेदनहीन बताया है और एक दिन के WFH को इतना बड़ा मुद्दा बनाना गलत है. कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि एक बार की स्थिति को देखकर कर्मचारी को जज करना सही नहीं है. वहीं, कुछ लोग फाउंडर के समर्थन में भी आए. उनका कहना है कि स्टार्टअप कल्चर में ज्यादा कमिटमेंट और जिम्मेदारी की जरूरत होती है. एक यूजर ने लिखा कि अकाउंटेबिलिटी सिर्फ कर्मचारियों के लिए ही क्यों? फाउंडर्स पर भी सवाल उठने चाहिए. दूसरे यूजर ने कहा कि पूरी कहानी जाने बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं है.
स्टार्टअप कल्चर बनाम वर्क-लाइफ बैलेंस
यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि क्या स्टार्टअप्स में काम करने के नियम अलग होते हैं? जहां एक तरफ स्टार्टअप्स में तेजी और कमिटमेंट की मांग होती है, वहीं दूसरी तरफ कर्मचारियों के लिए वर्क-लाइफ बैलेंस और सहानुभूति भी उतनी ही जरूरी है.
(Disclaimer: यह खबर सोशल मीडिया पर यूजर द्वारा की गई पोस्ट से तैयार की गई है. एनडीटीवी इस कंटेंट की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता.)
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