नई दिल्ली:
लोकपाल विधेयक पर सरकार और विपक्ष के बीच चल रही रस्साकशी के बीच भाजपा के एक सांसद ने एक ऐसा रहस्योद्घाटन किया जो सरकार के लिए चिंता की बात है। राज्यसभा के सांसद एसएस अहलुवालिया के मुताबिक एक विचित्र संयोग है कि संसद में जब जब लोकपाल विधेयक चर्चा के लिए आया तब तब लोकसभा भंग हो गई। उन्होंने कहा कि ऐसा 1968 से हो रहा है। उस वर्ष नौ मई को लोकपाल और लोकायुक्त विधेयक पेश किया गया था। इसे संसद की चयन समिति के पास भेजा गया था। लोकसभा में यह लोकपाल एवं लोकायुक्त विधेयक, 1969 के रूप में 20 अगस्त 1969 को पारित हुआ। बहरहाल इस विधेयक के राज्यसभा में पारित होने से पहले चौथी लोकसभा भंग हो गई और विधेयक भी निरस्त हो गया। इसके बाद 11 अगस्त 1971 को दूसरा लोकपाल एवं लोकायुक्त विधेयक पेश किया गया। इसे न तो किसी समिति को भेजा गया और न ही यह सदन में पारित हुआ। पांचवीं लोकसभा के भंग होने के साथ ही यह विधेयक भी खत्म हो गया। इसके बाद 28 जुलाई 1977 को इस आशय का विधेयक लाया गया। इसे संसद के दोनों सदनों की संयुक्त प्रवर समिति को भेजा गया। संयुक्त प्रवर समिति की अनुशंसाओं से पहले ही छठी लोकसभा भंग हो गई और साथ ही विधेयक भी खत्म हो गया।
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