Taylor Glacier mystery: अंटार्कटिका की बर्फीली और सुनसान वादियों में एक ऐसी जगह है, जिसे देखकर किसी की भी रूह कांप जाए. यहां एक झरना है जिससे पानी नहीं, बल्कि मानो खून बह रहा हो. इसे दुनिया ब्लड फॉल्स के नाम से जानती है. जब पहली बार इसे देखा गया था, तो लोगों को लगा शायद ये कोई कुदरत का करिश्मा या कोई डरावना राज है. मगर सच जानकर आप हैरान रह जाएंगे. यह झरना खून से नहीं, बल्कि आयरन यानी लोहे से भरपूर पानी से बना है.
Nature is awesome.
— Fascinating History (@Fascinate_Hist) December 22, 2025
"Blood Falls" in Antarctica. pic.twitter.com/Us9BXO4jBY
सदियों पुरानी पहेली का सच (bleeding glacier)
अंटार्कटिका में इस झरने को लेकर 1911 में सबसे पहले ग्रिफिथ टेलर ने बताया था, तब उन्होंने सोचा कि शायद ये लाल रंग किसी खास तरह की काई या एल्गी की वजह से है, लेकिन वक्त के साथ टेक्नोलॉजी बदली और सच सामने आया. असल में, ग्लेशियर के करीब 400 मीटर नीचे एक प्राचीन झील दबी हुई है. हजारों सालों से यह पानी वहां कैद है. इसमें नमक की मात्रा बहुत ज्यादा है, इसीलिए ये इतने कम तापमान में भी नहीं जमता.
A glacier in Antarctica bleeds red water and it's 100% real pic.twitter.com/OskyZrh9IF
— TaraBull (@TaraBull) August 31, 2025
लोहे और हवा का खूनी मेल (The Chemical Reaction Behind the Red Color)
जब यह नमक और लोहे से भरा पानी ग्लेशियर की दरारों से बाहर निकलकर हवा के संपर्क में आता है, तो एक कमाल की केमिस्ट्री होती है. हवा में मौजूद ऑक्सीजन जैसे ही लोहे के संपर्क में आती है, उसमें जंग लग जाता है. बिल्कुल वैसे ही जैसे लोहे की किसी पुरानी चीज में जंग लगने से लाल रंग निकलता है. यही वजह है कि यह पानी देखते ही देखते लाल खून जैसा दिखने लगता है.
Antarctica's Blood Falls looks like a bleeding glacier, but it's really science at work.
— John Luke (@yesknow) August 31, 2025
Iron-rich, salty water seeps out of the Taylor Glacier, turning red when it hits oxygen. pic.twitter.com/u0uRFvwHwt
बर्फ के नीचे छिपी है नई दुनिया (Antarcticas Blood Falls)
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि उस जमी हुई बर्फ के नीचे लाखों सालों से सूक्ष्म जीव, यानी माइक्रोब्स फल-फूल रहे हैं. इन जीवों को न तो धूप मिलती है और न ही ऑक्सीजन. ये जीव सल्फेट और लोहे की मदद से अपनी ऊर्जा बनाते हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि ब्लड फॉल्स हमें यह समझने में मदद करेगा कि अगर दूसरे ग्रहों पर बहुत कम ऑक्सीजन हो, तो वहां भी जीवन कैसे पनप सकता है. अंटार्कटिका का यह ब्लड फॉल्स सिर्फ एक डरावनी दिखने वाली जगह नहीं, बल्कि साइंस के लिए किसी खजाने से कम नहीं है.
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