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This Article is From Jul 02, 2017

एक ऐसा पिता जो हर रोज बेटी के साथ कब्र में सोता है...

झांग लीयोंग ने अपनी बेटी मन से डर निकालने के लिए एक अनोखा तरीका निकाला है। उन्होंने अपने घर की आंगन में एक कब्र खोदी है. वह रोज इसी कब्र में बेटी के साथ सोते हैं. दिन में भी समय मिलने पर यहीं खेलते हैं.

एक ऐसा पिता जो हर रोज बेटी के साथ कब्र में सोता है...
चीन के बाप-बेटी की यह जोड़ी हर रोज कब्र में सोते हैं.
  • चीन के एक पिता-पुत्री की बेहद मार्मिक कहानी
  • दो साल की बेटी को है गंभीर बीमारी
  • बेटी के मन से मौत का डर निकालने के लिए पिता ने ढूंढी तरकीब
नई दिल्ली: एक पिता हर रोज अपनी बेटी के साथ कब्र में सोता है. यह बात आपको अटपटी लग सकती है, लेकिन इसके पीछे की सच्चाई जानकर आप कहेंगे भला इस पिता को अपनी बेटी से किस हद तक प्यार है. झांग लीयोंग और उनकी पत्‍नी डेंग की एक बेटी है, जिसकी उम्र महज दो साल है. दो साल की मासूम झांग जिनली गंभीर बीमारी से ग्रसित है. यह बात मां-पिता को अंदर ही अंदर खा जा रही है. झांग लीयोंग को डर है कि बड़ी होकर उनकी बेटी को जब इस गंभीर बीमारी के बारे में पता चलेगा तो शायद उसके मन में मौत का डर सताने लगेगा. वह अपनी बेटी को मौत से डरते हुए नहीं देखना चाहते हैं. उनका मानना है कि आप जिससे सबसे ज्यादा प्यार करते हैं उसे दुख और डर में नहीं देख सकते. खासकर किसी बाप के लिए यह सबसे बुरा वक्त होता है.

इंडिपेंडेंट की खबर के मुताबिक झांग लीयोंग ने अपनी बेटी मन से डर निकालने के लिए एक अनोखा तरीका निकाला है। उन्होंने अपने घर की आंगन में एक कब्र खोदी है. वह रोज इसी कब्र में बेटी के साथ सोते हैं. दिन में भी समय मिलने पर यहीं खेलते हैं. साथ ही वे झांग को अभी से समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि ऐसा भी हो सकता है कि कभी उसे अकेले यहीं रहना पड़े. ऐसे में वह घबराए नहीं.

डॉक्टरों की सलाह पर झांग लीयोंग और उनकी पत्नी डेंग ने एक और बेटी को जन्म देने की तैयारी में हैं. बताया जा रहा है कि आने वाले बच्चे के कोर्ड ब्‍लड से जिनली का इलाज किया जाएगा. कोर्ड ब्‍लड को अभी तक बेकार कहकर फेंक दिया जाता था। जबकि शोध में पता चला है कि इससे गंभीर बीमारियों का ईलाज किया जा सकता है. 

मालूम हो कि बच्‍चे के गर्भनाल से निकलने वाले ब्लड को कोर्ड ब्‍लड कहते हैं. इसमें मौजूद स्‍टेम सेल का उपयोग गंभीर रोगों का ईलाज हो सकता है। झांग दंपत्ति का कहना है कि वह अपनी बेटी को बचाने के लिए कहीं भी जाने को तैयार हैं. वह किसी भी डॉक्टर तक पहुंचने की कोशिश करेंगे. हालांकि इस परिवार की आर्थिक स्थित बेहद खराब है और वह बड़े शहर में बेटी का इलाज कराने में सक्षम नहीं हैं.
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अभिषेक कुमार
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