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बंदर‍िया के कहने पर बेबी बंदर ने लौटाया फोन, उत्तराखंड पुलिस ने सोशल मीडिया पर शेयर क‍िया यह प्‍यारा वीड‍ियो

बच्चों को अच्छे संस्कार सिखाने का सबसे असरदार तरीका उन्हें बार-बार समझाना नहीं. बल्कि खुद उदाहरण पेश करना है. उत्तराखंड पुलिस के एक दिलचस्प वीडियो ने भी यही मैसेज दिया है कि बच्चे वही सीखते हैं, जो वे रोज अपने घर और आसपास लोगों को करते हुए देखते हैं.

बंदर‍िया के कहने पर बेबी बंदर ने लौटाया फोन, उत्तराखंड पुलिस ने सोशल मीडिया पर शेयर क‍िया यह प्‍यारा वीड‍ियो
उत्तराखंड पुलिस ने सोशल मीडिया हैंडल पर शेयर क‍िया यह वीडियो.
सोशल मीड‍िया

बच्चे क्या सीखते हैं, ये सिर्फ इस बात पर निर्भर नहीं करता कि उन्हें क्या बताया जा रहा है. असल फर्क इस बात से पड़ता है कि वो अपने आसपास क्या देख रहे हैं. कहा भी जाता है कि बच्चों के लिए माता-पिता सबसे बड़े रोल मॉडल होते हैं. दिलचस्प बात ये है कि नेचर में भी कई जानवर अपने बच्चों को देखकर सीखने का मौका देते हैं. वो लंबे भाषण नहीं देते, बल्कि अपने बर्ताव के जरिए जरूरी बातें सिखाते हैं. इंसानों के लिए भी यही तरीका सबसे इफेक्टिव माना जाता है. अगर आप चाहते हैं कि आपके बच्चे अच्छे संस्कार, डिसिप्लीन और जिम्मेदारी सीखें. तो कुछ आसान आदतों को अपनी रोज की लाइफ स्टाइल का हिस्सा बना सकते हैं.

बच्चे सुनने से ज्यादा देखकर सीखते हैं

उत्तराखंड पुलिस ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक वीडियो शेयर किया है. जिसमें एक बंदर और उसका बच्चा दिखाई दे रहा है. इस पोस्ट के साथ उत्तराखंड पुलिस ने कैप्शन दिया है कि बच्चे हमारी बातों से नहीं, हमारे व्यवहार से सीखते हैं. यही मैसेज इस पूरे वीडियो में भी दिखाया गया है. वीडियो में बड़ा बंदर दिखाई देता है. वो छोटे बंदर को फोन पकड़ना और इस्तेमाल करना सिखाता है. वीडियो में जिस तरह ये चीज दिखाई गई है. उसे उत्तारखंड पुलिस ने बड़ों की सीख की तरह पेश किया है. जिसका मैसेज ये भी माना जा सकता कि एक्शन स्पीक्स लाउडर देन वर्ड्स.  

है.

रोजमर्रा की छोटी बातें बनाती हैं बड़ा फर्क

विशेषज्ञ भी मानते हैं किअच्छे संस्कार सिखाने के लिए बड़े-बड़े नियम बनाने की जरूरत नहीं होती. घर की छोटी-छोटी आदतें ही बच्चों की पर्सनेलिटी को आकार देती हैं. जैसे खाने के बाद अपनी प्लेट सही जगह रखना, घर के कामों में सहयोग करना, बुजुर्गों का सम्मान करना और गलती होने पर माफी मांगना. विशेषज्ञ मानते हैं कि बच्चों को जिम्मेदारी सिखाने का सबसे अच्छा तरीका उन्हें छोटे-छोटे काम सौंपना है. इससे उनमें कॉन्फिडेंस भी बढ़ता है और जिम्मेदारी का एहसास भी होता है.

(Disclaimer: यह खबर सोशल मीडिया पर यूजर द्वारा की गई पोस्ट से तैयार की गई है. एनडीटीवी इस कंटेंट की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता.)

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