- जेलेंस्की के समर्थकों की संख्या युद्ध के कारण लगातार कम हो रही है और अमेरिका भी उनका साथ छोड़ रहा है
- रूस ने कीव को दो महीने के युद्धविराम का हकदार नहीं माना और एनर्जी ठिकानों पर हमले जारी रखे हैं
- जेलेंस्की के संभावित विकल्पों में ज़ालुज़नी, बुदानोव, और मिखाइलो फेडोरोव प्रमुख रूप से हैं
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की बड़ी मुश्किल में हैं. रूस से युद्ध लड़ते-लड़ते अब वो उस मुकाम पर पहुंच गए हैं, जहां उनके समर्थकों की संख्या लगातार कम होती जा रही है. हाल में ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इतना तक कह दिया कि यूक्रेन के लोगों को अपना नया राष्ट्रपति चुन लेना चाहिए. ये बयान रूस से डीजल समझौता करने के बाद ट्रंप ने दिया था. मतलब साफ है कि अब अमेरिका को यूक्रेन युद्ध में पैसा लगाना फायदेमंद नहीं दिख रहा. डीजल समझौता कर अमेरिका ने रूस से एक बार फिर अपने संबंधों को औपचारिक रूप देना शुरू कर दिया है.
रूस ने कर दी और सख्ती
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने सोमवार को कहा कि राष्ट्रपति चुनाव कराने के लिए कीव दो महीने के युद्धविराम का "हकदार" नहीं है. लावरोव ने कहा, "मुझे नहीं लगता कि वह किसी राहत का हकदार है." यह बयान तब आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से चुनाव कराने की नई अपील के जवाब में कीव ने लड़ाई को 60 दिनों के लिए रोकने की मांग की. इस बीच आज ही जेलेंस्की ने कहा कि रूस ने यूक्रेन के एनर्जी ठिकानों पर हमले जारी रखे हैं, जबकि एक दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि युद्धरत देश एनर्जी सीजफायर (ऊर्जा आपूर्ति रोकने पर सहमति) के लिए सहमत हो गए हैं. मतलब साफ है कि यूक्रेन को रूस किसी भी तरह का मौका देने के मूड में नहीं है.
अमेरिका पूरी तरह हाथ छुड़ा रहा
मगर, इससे भी बड़ी बात है कि अमेरिका भी अब यूक्रेन का साथ छोड़ता दिख रहा है. दो यूरोपीय अधिकारियों ने CNN को बताया कि ट्रंप प्रशासन ने यूक्रेन और यूरोप में अपने सहयोगियों को चेतावनी दी है कि अगर कीव रूस की एनर्जी सुविधाओं पर गहरे हमले नहीं रोकता है, तो अमेरिका इंटेलिजेंस शेयरिंग और यूक्रेन के लिए अमेरिकी हथियारों की यूरोपीय खरीद को रोक सकता है. स्टेट डिपार्टमेंट और पेंटागन की ओर से ये चेतावनियां वीकेंड पर यूक्रेन और यूरोप के अधिकारियों को भेजी गई थीं, जिनमें अमेरिकी सेना की ओर से सीधे यूक्रेनी कमांडरों को भेजे गए संदेश भी शामिल थे. साफ है कि अमेरिका अब रूस से रिश्ते खराब नहीं करना चाहता और ना ही यूक्रेन को मदद जारी रखना चाहता है.
यूरोप ही बस अब साथ
अब जेलेंस्की के समर्थन में सिर्फ यूरोप ही दिख रहा है. यूरोपीय यूनियन ने आज ही रूस के हथियार उद्योग से जुड़े लगभग 1,600 रूसी लोगों और कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए हैं. जेलेंस्की ने इसकी तारीफ की है. वहीं नाटो के एक कमांडर ने आज बयान दिया है कि रूस की किसी भी हरकत का नाटो मजबूती से जवाब देगा. हालांकि, ये कहना मुश्किल है कि अमेरिका के बगैर नाटो के पास कितनी ताकत है.
मगर सवाल उठता है कि अगर जेलेंस्की नहीं तो कौन होगा यूक्रेन का राष्ट्रपति? क्या ट्रंप अपनी पसंद का राष्ट्रपति चाहते हैं या फिर रूस की पसंद का नया राष्ट्रपति बनेगा? कौन हो सकते हैं जेलेंस्की के विकल्प?
- वालेरी ज़ालुज़नी: यूक्रेन के पूर्व शीर्ष जनरल और यूनाइटेड किंगडम में मौजूदा राजदूत, जेलेंस्की के प्रतिद्वंद्वियों की सूची में सबसे आगे हैं. कम से कम 2023 से, और खासकर 2024 में अपने इस्तीफे के बाद से, ज़ेलेंस्की का सबसे संभावित विकल्प बन रहे हैं. कीव की पोलिंग एजेंसी 'रेटिंग ग्रुप' के 8 अक्टूबर के सर्वे के मुताबिक, लगभग दो-तिहाई यूक्रेनी – यानी 64 प्रतिशत उन पर भरोसा करते हैं, और सिर्फ़ 25 प्रतिशत लोग ही उन पर भरोसा नहीं करते.
- यह भरोसा 2022 में उनकी सैन्य जीतों पर टिका है. 2022 में रूस के बड़े पैमाने पर हमले के शुरुआती हफ्तों में कीव की रक्षा करने के बाद, ज़ालुज़नी ने जवाबी हमले किए, जिनसे रूस के कब्जे वाले 40 प्रतिशत इलाके यूक्रेन को वापस मिल गए. गर्मियों में लंबे समय से अपेक्षित जवाबी हमले से कोई नतीजा न निकलने के बाद 2023 में उन्हें हटा दिया गया. युद्ध के बाद के सबसे अहम मामलों की बात करें तो ज़ालुज़नी अब भी एक रहस्यमयी व्यक्ति बने हुए हैं.
- किरिलो बुदानोव: आधे से ज्यादा यूक्रेनी उन पर भरोसा करते हैं. लेफ्टिनेंट जनरल किरिलो बुदानोव दूसरे सबसे लोकप्रिय और प्रभावशाली मिलिट्री लीडर हैं, जिनके यूक्रेन का राष्ट्रपति बनने की संभावना है. 40 साल के इस पूर्व टॉप मिलिट्री इंटेलिजेंस अफसर को जनवरी में ज़ेलेंस्की के प्रशासन का प्रमुख नियुक्त किया गया था.
- बुदानोव ने रूस के खिलाफ कई साहसी ऑपरेशन किए, जिनमें 2016 में रूस के कब्जे वाले क्रीमिया में एक मिलिट्री एयरफ़ील्ड पर विस्फोटक लगाने के लिए किया गया रेड भी शामिल है. 2020 में, ज़ेलेंस्की ने उन्हें रक्षा मंत्रालय के इंटेलिजेंस डायरेक्टरेट (GUR) का प्रमुख नियुक्त किया, जो बाद में एक आक्रामक और टेक्नोलॉजी पर आधारित स्पेशल फ़ोर्स सर्विस बन गई.
- मिखाइलो फेडोरोव: 35 साल की उम्र में, फेडोरोव संभावित राष्ट्रपतियों की सूची में सबसे कम उम्र के व्यक्ति हैं. 2019 में ज़ेलेंस्की द्वारा डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन मंत्री नियुक्त किए जाने के बाद वे चर्चा में आए और भ्रष्टाचार से जूझ रहे देश में नौकरशाही प्रक्रियाओं को काफी सरल बनाने में सफल रहे. उनके मंत्रालय ने 'Diia' नाम का एक स्मार्टफोन ऐप लॉन्च किया, जो यूज़र्स को 100 से ज़्यादा सरकारी सेवाओं का ऑनलाइन लाभ उठाने की सुविधा देता है.
- जनवरी में, ज़ेलेंस्की ने फेडोरोव को - जिनका कोई सैन्य बैकग्राउंड नहीं था - रक्षा मंत्री नियुक्त किया. उन्हें लॉजिस्टिक्स, बजट, सुधार, भ्रष्टाचार-रोधी उपायों और अरबों डॉलर की पश्चिमी सहायता या लोन हासिल करने से जुड़े समझौतों की ज़िम्मेदारी सौंपी गई. फेडोरोव ने नए हथियारों, भोजन और चिकित्सा आपूर्ति की खरीद प्रक्रिया को ज़्यादा पारदर्शी बनाकर भ्रष्टाचार के मामलों पर लगाम लगाई.
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