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एल्गोरिदम ने बच्चों को बनाया 'बीमार', कोर्ट में झुकीं ये दिग्गज कंपनियां; स्कूल ने की थी हर्जाने की मांग

कैलिफोर्निया के ओकलैंड फेडरल कोर्ट में शुक्रवार को दाखिल किए गए अदलाती दस्तावेजों में इस समझौते की पुष्टि की गई है. यह पूरा मामला केंटकी के एक ग्रामीण स्कूल डिस्ट्रिक्ट 'ब्रेथिट काउंटी स्कूल डिस्ट्रिक्ट' (Breathitt County School District) की ओर से दायर किया गया था.

एल्गोरिदम ने बच्चों को बनाया 'बीमार', कोर्ट में झुकीं ये दिग्गज कंपनियां; स्कूल ने की थी हर्जाने की मांग

बच्चों में रील्स और सोशल मीडिया की लत को लेकर दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों को आखिरकार घुटने टेकने पड़े हैं. गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट के यूट्यूब और स्नैपचैट ने अमेरिकी कोर्ट में ट्रायल शुरू होने से ठीक पहले एक स्कूल डिस्ट्रिक्ट के साथ समझौता कर लिया है. इतिहास में यह पहली बार है जब सोशल मीडिया कंपनियों ने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य संकट से जुड़े किसी कानूनी मामले में इस तरह का कदम उठाया है.

कैलिफोर्निया के ओकलैंड फेडरल कोर्ट में शुक्रवार को दाखिल किए गए अदलाती दस्तावेजों में इस समझौते की पुष्टि की गई है. यह पूरा मामला केंटकी के एक ग्रामीण स्कूल डिस्ट्रिक्ट 'ब्रेथिट काउंटी स्कूल डिस्ट्रिक्ट' (Breathitt County School District) की ओर से दायर किया गया था. इस स्कूल डिस्ट्रिक्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों को बीमार बनाने का आरोप लगाते हुए भारी हर्जाने की मांग की थी. हालांकि, कंपनियों के साथ हुए इस समझौते की वित्तीय शर्तों और गुप्त समझौतों का खुलासा अभी नहीं किया गया है.

एल्गोरिदम ने बच्चों को बनाया 'बीमार'

केंटकी के इस स्कूल डिस्ट्रिक्ट ने अपनी याचिका में टेक कंपनियों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए थे. स्कूल का कहना था कि इन कंपनियों के एल्गोरिदम और फीचर्स जानबूझकर ऐसे तैयार किए गए हैं ताकि बच्चों को इसकी लत लग जाए. इस एडिक्शन के कारण छात्रों में डिप्रेशन, मानसिक तनाव और व्यवहार संबंधी गंभीर दिक्कतें आ रही हैं.

सबसे बड़ी बात यह है कि सोशल मीडिया की वजह से पैदा हुए इस मेंटल हेल्थ संकट का पूरा बोझ स्कूलों पर आ गिरा है. स्कूलों को बच्चों की काउंसलिंग करने, अतिरिक्त स्टाफ रखने और मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम चलाने के लिए अपने बजट से भारी खर्च करना पड़ रहा है. ब्रेथिट काउंटी स्कूल डिस्ट्रिक्ट ने इस समस्या से निपटने और अगले 15 वर्षों के लिए एक विशेष मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम चलाने के लिए 60 मिलियन डॉलर (करीब 500 करोड़ रुपये) से अधिक के फंड की मांग की थी.

मेटा और टिकटॉक की जिद बरकरार

यूट्यूब और स्नैपचैट ने तो कोर्ट की ट्रायल और बदनामी से बचने के लिए आउट-ऑफ-कोर्ट सेटलमेंट का रास्ता चुन लिया, लेकिन फेसबुक-इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी मेटा (Meta Platforms) और टिकटॉक (TikTok) अभी भी अपनी जिद पर अड़े हुए हैं. इन दोनों कंपनियों ने स्कूल के साथ कोई समझौता नहीं किया है. अब इन दोनों टेक दिग्गजों के खिलाफ आगामी 15 जून से अदालती ट्रायल शुरू होने जा रहा है, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं.

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