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World Happiness Report 2026: सोशल मीडिया से घट रही युवाओं में खुशी, ट्रेंड को रोकने की दी गई चेतावनी

World Happiness Report के मुताबिक सोशल मीडिया का बढ़ता इस्तेमाल खासकर युवाओं की जिंदगी में नकारात्मक असर डाल रहा है. यह साफ चेतावनी देती है कि अगर इस ट्रेंड को नहीं रोका गया, तो आने वाले समय में पूरी एक पीढ़ी की मानसिक सेहत पर गहरा असर पड़ सकता है.

World  Happiness Report 2026: सोशल मीडिया से घट रही युवाओं में खुशी, ट्रेंड को रोकने की दी गई चेतावनी
AFP
  • World Happiness Report 2026 में सोशल मीडिया को युवाओं की गिरती खुशी का बड़ा कारण बताया गया.
  • फिनलैंड लगातार 9वीं बार सबसे खुशहाल देश बना, अफगानिस्तान सबसे नीचे.
  • विकसित देशों में भी युवाओं की खुशी में गिरावट, सोशल मीडिया और अकेलेपन को वजह बताया गया.

दुनिया इस वक्त एक अजीब मोड़ पर खड़ी है. एक तरफ युद्ध, तनाव और जियो-पॉलिटिकल टकराव बढ़ रहे हैं, दूसरी तरफ लोगों की निजी जिंदगी में अकेलापन और मानसिक दबाव बढ़ता जा रहा है. इसी बीच World Happiness Report 2026 ने एक ऐसा आईना दिखाया है जो सिर्फ देशों की रैंकिंग नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की बदलती मानसिक स्थिति को उजागर करता है. खासकर युवाओं की खुशहाली तेजी से गिर रही है और इसका सबसे बड़ा कारण बनकर उभरा है सोशल मीडिया का बढ़ता इस्तेमाल. इसमें 25 साल से कम उम्र के युवाओं में लाइफ सैटिस्फैक्शन को लेकर लगातार गिरावट दर्ज की गई है, जो पहले विकसित देशों में ज्यादा दिखाई देती थी, लेकिन अब यह ट्रेंड धीरे धीरे पूरी दुनिया में फैल रहा है.

दुनिया की खुशहाली पर हर साल नजर रखने वाली World Happiness Report 2026 की रिपोर्ट ने इस बार एक बड़ा और चिंताजनक संकेत दिया है. रिपोर्ट बताती है कि लगातार 9वीं बार फिनलैंड दुनिया का सबसे खुशहाल देश बना हुआ है, जबकि अफगानिस्तान एक बार फिर सबसे नीचे है. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वेलबीइंग रिसर्च सेंटर द्वारा जारी इस रिपोर्ट में 140 से ज्यादा देशों के करीब 1 लाख लोगों के डेटा का विश्लेषण किया गया है. इसमें लोगों से उनकी जिंदगी को 0 से 10 के पैमाने पर रेट करने को कहा गया.

सोशल मीडिया बना सबसे बड़ा खतरा

रिपोर्ट का सबसे बड़ा खुलासा यह है कि सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग युवाओं की खुशी को तेजी से कम कर रहा है. विशेष रूप से किशोर लड़कियों पर इसका असर ज्यादा देखा गया है. रिपोर्ट के अनुसार जो 15 साल की लड़कियां दिन में 5 घंटे या उससे ज्यादा सोशल मीडिया इस्तेमाल करती हैं, उनकी लाइफ सैटिस्फैक्शन काफी कम पाई गई. वहीं जो एक घंटे से कम समय बिताती हैं, उनमें खुशी का स्तर सबसे ज्यादा देखा गया. जानकारों का कहना है कि एल्गोरिदम आधारित प्लेटफॉर्म, इन्फ्लुएंसर कल्चर और लगातार तुलना की मानसिकता युवाओं को मानसिक दबाव में डाल रही है.

दुनिया के सबसे दुखी देश

रिपोर्ट के अनुसार सबसे खुशहाल देशों की रैंकिंग में अफगानिस्तान सबसे नीचे है. उससे ठीक पहले सिएरा लियोन और मलावी जैसे अफ्रीकी देश हैं. इन देशों में गरीबी, संघर्ष, राजनीतिक अस्थिरता और कमजोर संस्थाएं लोगों की खुशहाली को प्रभावित कर रही हैं.

भारत के लिए क्या संकेत?

हालांकि इस रिपोर्ट में भारत का जिक्र सीमित है, लेकिन यह ट्रेंड भारत के लिए भी चेतावनी है. भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में से एक है और यहां सोशल मीडिया का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है. अगर यही ट्रेंड जारी रहा, तो आने वाले समय में युवाओं की मानसिक सेहत और सामाजिक संरचना पर गहरा असर पड़ सकता है. World Happiness Report 2026 के मुताबिक सोशल मीडिया युवाओं की खुशी छीन रहा है. फिनलैंड फिर बना सबसे खुशहाल देश तो अफगानिस्तान सबसे दुखी. क्या भारत भी उसी रास्ते पर है, यह सोचने का वक्त आ गया है. 

अमीर देश भी नहीं बच पाए

रिपोर्ट का एक और बड़ा पहलू यह है कि अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे विकसित देशों में भी युवाओं की खुशहाली में गिरावट आई है. पिछले एक दशक में इन देशों में 25 साल से कम उम्र के लोगों की खुशी में तेज गिरावट दर्ज की गई है. इसके पीछे मुख्य कारण बताया गया है- सोशल मीडिया पर अधिक समय बिताना, वास्तविक जीवन में लोगों से जुड़ाव कम होना, अकेलापन और मानसिक तनाव.

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क्यों नंबर 1 बना हुआ है फिनलैंड?

World  Happiness Report में फिनलैंड पिछले एक दशक से भी अधिक समय से लगातार शीर्ष तीन देशों में कायम है. यह लगातार 9वें साल पहले पायदान पर बना हुआ है. इसके पीछे कई वजहें बताई गई हैं.  सफलता के पीछे कई मजबूत कारण बताए गए हैं. यह वेलफेयर सिस्टम, सामाजिक समानता, लंबा और स्वस्थ्य जीवन, लोगों के बीच भरोसा और सामाजिक जुड़ाव जैसे कई पैमाने पर सभी देशों से आगे है. 

फिनलैंड के राष्ट्रपति एलेक्जेंडर स्टब ने कहा कि यह कोई जादू नहीं बल्कि समाज में बराबरी, न्याय और भरोसे का परिणाम है.

जानकार कहते हैं कि खुशहाली मापने को इमोशनल स्टडी समझ कर भ्रमित नहीं होना चाहिए. बल्कि इस रिपोर्ट के जरिए रहन-सहन के स्तर को मापा जाता है और फिनलैंड इसमें सबसे अव्वल रहता आया है. आमजनों के जीवन स्तर को बेहतर करने, जीडीपी और प्रति व्यक्ति आय, सेहत, लंबी उम्र, ये सभी अहम होते हैं. इसके अलावा लोगों को एक दूसरे से जुड़ाव, एक दूसरे की मदद करना, उनका सहारा बनना, अपने फैसले खुद करने की आजादी जैसे भी अहम कारक होते है.

लेखक के बारे में
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अभिजीत श्रीवास्तव
Assistant Editor, Digital Content
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