- अयातुल्ला अलीरेजा अराफी को ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के बाद अंतरिम सुप्रीम लीडर बनाया गया है.
- अराफी 67 वर्ष के हैं और लंबे समय से ईरान की धार्मिक-राजनीतिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं.
- वे असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के उपाध्यक्ष और गार्जियन काउंसिल के सदस्य भी रह चुके हैं.
Ayatollah Alireza Arafi Profile: अमेरिका-इजरायल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद अयातुल्ला अलीरेजा अराफी (Ayatollah Alireza Arafi) को अंतरिम सुप्रीम लीडर बनाया गया है. 67 साल के अराफी खामेनेई के करीबी रहे हैं. वो लंबे समय से ईरान की धार्मिक-राजनीतिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं. अराफी असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के उपाध्यक्ष भी हैं, जो सुप्रीम लीडर को नियुक्ति करती है. अराफी का जन्म 1959 में यज़्द प्रांत के मेयबोद में हुआ था. वह एक मौलवी परिवार से ताल्लुक रखते हैं. उनके पिता अयातुल्लाह मोहम्मद इब्राहिम अराफी एक ईरान के इस्लामी गणराज्य के संस्थापक अयातुल्लाह रुहोल्लाह खुमैनी के करीबी सहयोगी थे.
नए सुप्रीम लीडर का चुनाव होने तक परिषद संभालेगी की ईरान की कमान
ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी ISNA के अनुसार अयातुल्लाह अलीरेजा अराफी अंतरिम नेतृत्व परिषद में विधि विशेषज्ञ सदस्य के रूप में काम करेंगे. ईरानी संविधान के अनुसार राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, मुख्य न्यायाधीश घोलाम-होसैन मोहसिनी-एजेई और गार्जियन काउंसिल के एक धर्मगुरु के साथ यह परिषद मिलकर देश की तब तक कमान संभालेगी, जब तक नए सुप्रीम लीडर का चुनाव नहीं हो जाता.

अयातुल्ला अलीरेजा अराफी की प्रमुख भूमिकाएंः
ईरान के मदरसों के प्रमुख: 2016 से अलीरेजा अराफी ईरान के शिया मदरसों के प्रमुख के रूप में देखरेख कर रहे हैं.
अल-मुस्तफा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष: यह गैर-ईरानी शिया मौलवियों को प्रशिक्षित करने और विश्व स्तर पर ईरानी इस्लामी विचारधारा को बढ़ावा देने वाला एक प्रमुख संस्थान है. (यह उनकी पूर्व भूमिका है, लेकिन वे अभी भी प्रभावशाली हैं).
- अभिभावक परिषद (Guardian Council) के सदस्य: 2019 से वे सर्वोच्च नेता द्वारा नियुक्त छह न्यायविद सदस्यों में से एक हैं, जो इस्लामी कानून और संविधान के साथ कानून और उम्मीदवारों की अनुकूलता की जांच के लिए जिम्मेदार हैं.
- विशेषज्ञों की सभा (Assembly of Experts) के उपाध्यक्ष: यह वह निकाय है जो सर्वोच्च नेता का चयन और उनकी निगरानी करता है.
- कोम के जुमे की नमाज के इमाम: 2013 के आसपास से वे कोम के 'इमाम जुमा' हैं (इससे पहले वे मेयबोद में थे).
- सांस्कृतिक क्रांति की सर्वोच्च परिषद और कोम के मदरसा शिक्षकों के समाज जैसे अन्य निकायों के सदस्य.
यह भी पढ़ें - शब्बत के दिन हमला नहीं होगा, खामेनेई की हत्या क्या ईरान की इन 3 गलतियों के कारण हुई?
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं