- अमेरिका और इजरायल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई समेत कई वरिष्ठ मंत्री और सैन्य अधिकारी मारे गए.
- इस हमले के दौरान खामेनेई वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे थे, उनका कैंपस पूरी तरह तबाह हो गया.
- ईरान को शब्बत के दिन हमले की उम्मीद नहीं थी, इस विश्वास ने सुरक्षा में बड़ी चूक को जन्म दिया.
Attack on Iran: अमेरिका-इजरायल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई. सु्प्रीम लीडर खामेनेई के साथ-साथ ईरान के कई वरिष्ठ मंत्री, सैन्य अधिकारी भी इस हमले में मारे गए. राजधानी तेहरान में हुए हमले में खामेनेई का कैंपस नेस्तानाबूद हो गया. जिस समय खामेनेई के कैंपस पर बमबारी की गई उस समय सुप्रीम लीडर वहीं वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे थे. खामेनेई का मारा गया ईरान से एक युग की समाप्ति है. ईरान पर हुए हमले के बाद मिडिल ईस्ट में जंग जैसे हालात है. खामेनेई की मौत की खबर सामने आने के बाद कई देशों में विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गया है.
ईरान पर शनिवार को हुए इस हमले के संकेत कई दिनों से मिल रहे थे. ईरान को भी इस हमले का अंदेशा था, ईरान ने इस तरह के हमले से बचने की तैयारी भी की थी. लेकिन फिर भी ईरान की सुरक्षा व्यवस्था में ऐसी चूक कैसे हो गई कि सुप्रीम लीडर खामेनेई तक की मौत हो गई. जानकार ईरान की ओर से हुई तीन अहम चूक के बारे में बता रहे हैं.

ईरान की वो गलतियां, जिससे हमले में हुए बुरे हालात
1. शब्बत के दिन हमला नहीं होगा
ईरान को यह भरोसा था कि शब्बत के दिन हमला नहीं होगा. एक अधिकारी ने फॉक्स न्यूज को बताया कि "रमजान के दौरान शनिवार की सुबह और शब्बत के दिन" हुए इस हमले से सरकार पूरी तरह से अचंभित रह गई." ईरान को इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि हमले के लिए शब्बत के दिन चुना जाएगा. यह एक बड़ी गलती साबित हुई.
मालूम हो कि शब्बत यहूदियों का विश्राम दिवस होता है. हर हफ्ते शुक्रवार सूर्यास्त से शुरू होकर शनिवार की शाम तक (लगभग 25 घंटे का समय) शब्बत का दिन कहलाता है. यह यहूदी धर्म में पवित्र और ईश्वर की आराधना का दिन होता है. इसमें काम-काज, यात्रा. बिजली उपकरणों के इस्तेमाल की परंपरा है. लोग शब्बत के दिन परिवार के साथ समय बिताते है. ईरान को यह गलतफहमी रही कि शब्बत के दिन हमला नहीं होगा.
2. ईरान ने कुछ स्थानों पर ही केंद्रित किया ध्यान
ईरान को हमले का अंदेशा था, सरकार ने इससे बचाव की तैयारी भी की थी. लेकिन ईरान सरकार के शीर्ष नेताओं ने केवल कुछ ही स्थानों पर ध्यान केंद्रित रखा. जानकार इसे बेहद भोलापन मानते है. खासकर तब जब अमेरिका ने इराक युद्ध के बाद से मध्य पूर्व में सबसे बड़ी सैन्य शक्ति जुटा रखी है. मालूम हो कि ईरान पर शनिवार को हुआ हमला इतना खतरनाक था कि इसमें ईरान से 31 में से 24 राज्य प्रभावित हुए.
3. दिनदहाड़े हमले की उम्मीद नहीं थी
ईरान के अधिकारियों को दिनदहाड़े इस तरह के हमले की उम्मीद नहीं थी. शनिवार को ईरान में सामान्य दिन की तरह जीवन की शुरुआत हुई. स्थानीय समयानुसार सुबह लगभग 8:10 बजे (ब्रिटेन के समय सुबह 4:40 बजे) होने वाले हमले की उम्मीद नहीं थी. एक वरिष्ठ रक्षा अधिकारी ने इसे "एक बड़ा, बेहद दुस्साहसी दिनदहाड़े हमला" बताया, जिसने "वरिष्ठ नेताओं को शुरुआत में ही चौंका दिया".

इसके अलावा ईरान की ओर से और भी कई गलतियां हुई. ईरान का एयर डिफेंस बेहद कमजोर निकला. ईरान सरकार में इजरायल और अमेरिका के जासूस बड़े भीतर तक थे. जिसने खामेनेई के सटीक ठिकाने की जानकारी मिली. मोसाद तक में जासूसों के शामिल होने की बात सामने आई है.
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