वाशिंगटन:
व्हाइट हाउस ने उस पेटिशन पर दस्तखत लेना बंद कर दिया है, जिसमें पाकिस्तान को 'आतंकवाद का प्रायोजक' घोषित करने की मांग की गई थी. व्हाइट हाउस ने कहा है कि इस पेटिशन को आर्काइव कर दिया गया है, क्योंकि यह 'दस्तखतों की ज़रूरत' को पूरा नहीं कर पाई.
गौरतलब है कि व्हाइट हाउस की इस घोषणा से कुछ ही दिन पहले इस पेटिशन ने रिकॉर्ड पांच लाख दस्तखत हासिल कर लिए थे, जो व्हाइट हाउस से जवाब पाने के लिए ज़रूरी दस्तखतों की संख्या से पांच गुना ज़्यादा थे.
पेटिशन के पेज पर अब लिखा है - 'पेटिशन बंद'
व्हाइट हाउस ने घोषणा में लिखा, "इस पेटिशन को आर्काइव कर दिया गया है, क्योंकि यह दस्तखतों की ज़रूरत को पूरा नहीं कर पाई... अब इस पर दस्तखत नहीं किए जा सकते..." व्हाइट हाउस द्वारा इसे दस्तखतों के लिए बंद किए जाने की कोई और वजह नहीं दी गई है.
आमतौर पर किसी भी पेटिशन को दस्तखत करने के लिए एक महीने तक चालू रखा जाता है. बहरहाल, ऐसा लगता है कि इस पेटिशन पर किए गए कुछ दस्तखत पेटिशनों पर राय जताने के लिए तय की गई शर्तों पर खरे नहीं उतरे होंगे. सो, परिणामस्वरूप ऐसा भी मुमकिन है कि अगर फ्रॉड का सबूत मिल जाता है, तो कुछ दस्तखतों को हटाया जा सकता है. वैसे, ओबामा प्रशासन अब भी 60 दिन में याचिका पर जवाब दे सकता है.
यह याचिका आर.जी. नामक शख्स ने 21 सितंबर को शुरू की थी, और व्हाइट हाउस से इस पर आधिकारिक जवाब हासिल करने के लिए 30 दिन में एक लाख दस्तखत पाना ज़रूरी था. एक लाख दस्तखत इस पेटिशन पर एक सप्ताह में ही आ गए थे, और फिर दो हफ्ते से भी कम वक्त में दस्तखतों की संख्या पांच लाख पार कर गई.
इस पेटिशन से पहले, आतंकवाद पर कांग्रेस की उपसमिति के अध्यक्ष टेड पो ने भी कांग्रेस के एक और साथी सदस्य डाना रोहराबेकर के साथ मिलकर याचिका एचआर 6069 (पाकिस्तान स्टेट स्पॉन्सर ऑफ टेररिज़्म डेज़िगनेशन एक्ट) पेश की थी.
गौरतलब है कि व्हाइट हाउस की इस घोषणा से कुछ ही दिन पहले इस पेटिशन ने रिकॉर्ड पांच लाख दस्तखत हासिल कर लिए थे, जो व्हाइट हाउस से जवाब पाने के लिए ज़रूरी दस्तखतों की संख्या से पांच गुना ज़्यादा थे.
पेटिशन के पेज पर अब लिखा है - 'पेटिशन बंद'
व्हाइट हाउस ने घोषणा में लिखा, "इस पेटिशन को आर्काइव कर दिया गया है, क्योंकि यह दस्तखतों की ज़रूरत को पूरा नहीं कर पाई... अब इस पर दस्तखत नहीं किए जा सकते..." व्हाइट हाउस द्वारा इसे दस्तखतों के लिए बंद किए जाने की कोई और वजह नहीं दी गई है.
आमतौर पर किसी भी पेटिशन को दस्तखत करने के लिए एक महीने तक चालू रखा जाता है. बहरहाल, ऐसा लगता है कि इस पेटिशन पर किए गए कुछ दस्तखत पेटिशनों पर राय जताने के लिए तय की गई शर्तों पर खरे नहीं उतरे होंगे. सो, परिणामस्वरूप ऐसा भी मुमकिन है कि अगर फ्रॉड का सबूत मिल जाता है, तो कुछ दस्तखतों को हटाया जा सकता है. वैसे, ओबामा प्रशासन अब भी 60 दिन में याचिका पर जवाब दे सकता है.
यह याचिका आर.जी. नामक शख्स ने 21 सितंबर को शुरू की थी, और व्हाइट हाउस से इस पर आधिकारिक जवाब हासिल करने के लिए 30 दिन में एक लाख दस्तखत पाना ज़रूरी था. एक लाख दस्तखत इस पेटिशन पर एक सप्ताह में ही आ गए थे, और फिर दो हफ्ते से भी कम वक्त में दस्तखतों की संख्या पांच लाख पार कर गई.
इस पेटिशन से पहले, आतंकवाद पर कांग्रेस की उपसमिति के अध्यक्ष टेड पो ने भी कांग्रेस के एक और साथी सदस्य डाना रोहराबेकर के साथ मिलकर याचिका एचआर 6069 (पाकिस्तान स्टेट स्पॉन्सर ऑफ टेररिज़्म डेज़िगनेशन एक्ट) पेश की थी.
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