- ईरान ने हमले के बाद से होर्मुज स्ट्रेट को ठप कर रखा है, वहीं अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी कर रखी है
- एक्सपर्ट्स ने 2 संभावित रास्ते बताएं हैं. एक रास्ता पाकिस्तान होकर, दूसरा चाबहार से दक्षिण की तरफ निकलता है
- LNG से भरा एक टैंकर भारत के पास पहुंच गया है. युद्ध छिड़ने के बाद होर्मुज पार करने वाला ये पहला LNG टैंकर है
अमेरिका और ईरान टस से मस होने को तैयार नहीं हैं. इसका खामियाजा दुनिया भुगत रही है. ईरान ने तेल-गैस के प्रमुख रास्ते होर्मुज स्ट्रेट को ठप कर रखा है. वहीं अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी कर रखी है. हालांकि इस नाकाबंदी को चकमा देकर कुछ जहाज बाहर निकलने में सफल हो रहे हैं. कई जहाज भारत भी पहुंचे हैं. अब नेचुरल गैस (LNG) से भरे यूएई के ADNOC के एक टैंकर के भारत के पास पहुंचने की खबर है. ईरान युद्ध छिड़ने के बाद ये पहला एलएनजी टैंकर है, जिसने होर्मुज पार किया है.सवाल ये है कि जब अमेरिका-ईरान ने समुद्री रास्ते बंद कर रखे हैं, तब वो कौन से खुफिया रास्ते हैं जिनसे होकर जहाज भारत आ सकते हैं, आइए बताते हैं.
होर्मुज- दुनिया का तेल गलियारा
पहले होर्मुज स्ट्रेट की अहमियत समझ लीजिए. दुनिया में तेल और गैस की 20 फीसदी से ज्यादा सप्लाई इसी संकरे समुद्री रास्ते से होती रही है. 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमले से पहले यहां से रोजाना करीब 135 जहाज गुजरते थे. इन जहाजों और टैंकरों से 20 से 21 मिलियन बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद की सप्लाई होती थी. इसमें से 80 फीसदी से अधिक एशियाई देशों में जाता था. अकेले भारत ही 1.6 से 2.1 मिलियन बैरल तेल रोजाना लेता था.
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ईरान-अमेरिका की नाकाबंदी
ईरान और ओमान के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का सबसे संकरा रास्ता करीब 33 किलोमीटर चौड़ा है. 28 फरवरी के हमले के बाद से ईरान ने होर्मुज को बंद कर रखा है. इसकी वजह से दुनिया में तेल और गैस की भारी किल्लत पैदा हो गई है. बीच में दो बार उसने कुछ घंटे के लिए होर्मुज खोला भी था, लेकिन अमेरिका और इजरायल का सख्त रवैया देखकर फिर से बंद कर दिया. ईरान पर दबाव बनाने के इरादे से अमेरिका ने होर्मुज के रास्ते ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों की अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में नाकाबंदी कर दी है.
देखें- OPEC से बाहर हुआ UAE, क्या खुल गया भारत में सस्ते तेल का रास्ता?
1. पाकिस्तान वाला रूट
ईरान की अधिकतर सप्लाई खार्ग द्वीप से होती है. उसका 90 फीसदी से अधिक कारोबार यहीं से चलता है. अगर कोई टैंकर खार्ग द्वीप पर लोड होता है तो उसे फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी होकर जाना होता है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिकी नाकाबंदी से बचने के लिए ये जहाज ईरान के जलक्षेत्र के बिल्कुल करीब होकर जा सकते हैं और बिना अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में प्रवेश किए पाकिस्तान के मकरान तट के करीब से होते हुए मुंबई पहुंच सकते हैं.
क्या ये इतना आसान है?
दरअसल, संयुक्त राष्ट्र के समुद्री नियमों (UNCLOS) के मुताबिक, समुद्र से सटे हर देश का लगभग 22 किलोमीटर समुद्री इलाके पर अधिकार होता है. कोई दूसरा देश इसमें दखल नहीं दे सकता. अगर कोई सामान्य व्यापारिक जहाज इस इलाके से गुजरता है तो संबंधित देश आमतौर पर रुकावट पैदा नहीं करता. लेकिन भारत और पाकिस्तान के संबंध अलग हैं. पिछले साल पहलगाम अटैक और ऑपरेशन सिंदूर के बाद से दोनों देशों के बीच व्यापार ठप है. ऐसे में कोई व्यापारिक जहाज पाकिस्तान होकर आने का खतरा क्यों मोल लेगा?

2. चाबहार से वाया ओमान
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ईरान से भारत आने वाले जहाजों का दूसरा वैकल्पिक रास्ता ईरानी चाबहार बंदरगाह से होकर बन सकता है. जहाज ईरानी जलक्षेत्र में चलते हुए पहले उसके चाबहार पोर्ट पहुंचें, फिर वहां से दक्षिण की तरफ मुड़कर अंतरराष्ट्रीय सीमा में आएं. चूंकि अमेरिकी नेवी का नाकाबंदी मुख्य रूप से होर्मुज के रास्ते ईरान से आने-जाने वाले जहाजों पर है. ऐसे में चाबहार से ओमान की खाड़ी होकर जहाजों के खुले समु्द्र में पहुंचने की संभावना बन सकती है. अगर वहां पहुंच गए तो भारत के पश्चिमी तटों तक आ सकते हैं. भारतीय नौसेना भी उन्हें एस्कॉर्ट कर सकती है.
भारत के कितने जहाज होर्मुज में फंसे?
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी नाकाबंदी शुरू होने के बावजूद करीब 34 से ज्यादा जहाज चकमा देकर होर्मुज को पार कर चुके हैं. कई जहाजों पर हमले भी हुए हैं. कई जहाजों पर अमेरिका और ईरान ने कब्जा भी कर लिया है. लगभग 2 हजार व्यापारिक जहाज अब भी होर्मुज में फंसे हुए हैं, जिन पर 20 हजार से ज्यादा नाविक सवार हैं. पिछले कुछ हफ्तों में 10 जहाज भारत आ चुके हैं, लेकिन 14 जहाज अब भी अटके हुए हैं. सरकार कोशिश में है कि किसी तरह इन जहाजों को होर्मुज से निकालने का रास्ता मिल जाए.
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