- युद्ध क्षेत्र में मिसाइल, ड्रोन या बम के धमाके से बड़े गड्ढे और व्यापक भौतिक विनाश के निशान बनते हैं.
- ईरान ने मिसाइल हमलों के जरिए इजरायल और अन्य महाशक्तियों के खिलाफ अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन किया है.
- मिसाइल हमलों के बाद राहत कार्यों के लिए प्रशिक्षित रेस्क्यू टीमें और स्निफर डॉग्स तुरंत मौके पर पहुंचते हैं.
किसी युद्ध मे जब कोई मिसाइल, बम, ड्रोन अपने टारगेट को हिट करता है तो बारूद की चमक और धमाके की आवाज के अलावा ब्लास्ट साइट में क्या क्या होता है? ये बहुत कम लोग जानते हैं? 1 मिसाइल,1 ड्रोन, 1 बम आखिर कितनी तबाही मचा सकता है? ये कितनी तबाही मचाएंगे ये कैसे तय होता है? ये कौन तय करता है? जब एक मिसाइल कहीं फटती है तो मौके पर सबसे पहले कौन पहुंचता है? क्या प्रोटोकॉल है? मिसाइल हमले की लोकेशन पर क्या क्या होता है? युद्ध एक त्रासदी है लेकिन इसका भी अपना एक सिस्टम है. इसके भी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर हैं. मिसाइल ड्रोन और बम बनाने में पूरी दुनिया कैसे एक दूसरे से जुड़ी हुई है आइये समझते हैं.
ईरान युद्ध में अगर सबसे ज्यादा किसी एक चीज का इस्तेमाल हुआ है तो वो है मिसाइल. युद्ध के एक्सपर्ट कहते हैं कि ईरान ने मिसाइलों के दम पर सुपरपॉवर की मनमानी पर लगाम लगायी है. बार बार दावा होता है कि ईरान का काम तमाम. फिर एक मिसाइल गरजती है और ईरान की चुनौती ताल ठोकने लगती है.
जहां मिसाइल, स्मार्ट बम, ड्रोन, रॉकेट गिरते हैं वहां जांच जरूर होती है
28 मार्च को ईरान की मिसाइल गिरी, वहां एक एक बड़ा गड्ढा हो गया. ये करीब छह फीट गहरा और 25 से 30 फीट चौड़ा हो सकता है. इस गड्ढे की जांच पड़ताल बहुत गंभीरता से हो रही है. भूकंप आने पर जो तस्वीरें दिखती हैं उसमें विनाश तो इससे भीषण होता है. लेकिन वहां पर मिलिट्री एक्सपर्ट नहीं होते हैं. लेकिन जहां मिसाइल, स्मार्ट बम, ड्रोन, रॉकेट गिरते हैं वहां पर ऐसी जांच जरूर होती है. भले ही माहौल युद्ध का क्यों न हो. मार्च 2026 को इजरायल के बेत शेमेष पर ईरान ने मिसाइलों से हमला किया. यहां हमले का असर ये हुआ कि कॉक्रीट की इमारतों की शक्ल ऐसी है जैसे किसी ने ग्राइंडर में डाल कर पीस दिया हो. गौर करने वाली बात है कि जहां भी विनाश हुआ है.
धमाका इतना बड़ा था कि पेड़ सिर के बल उलट गया
ईरान ने मिसाइल से इजरायल पर हमला किया. ये हमला अन्य हमलों से अलग है. यहां पर रात के वक्त हमला किया गया. विनाश का विस्तार बताता है कि यहां पर ईरान ने अपनी कई मुंह वाली मिसाइल के साथ ज्यादा विस्फोटक वाली मिसाइल का इस्तेमाल किया है, क्योंकि पूरा इलाका नष्ट हुआ है. जमीन पर बड़े और गहरे गड्ढे बने हैं. गड्ढे के बगल में पेड़ की जड़े दिख रही हैं. मतलब धमाका इतना बड़ा था कि पेड़ सिर के बल उलट गया है.
बीम और पिलर भी सही सलामत... लेकिन दीवारें गायब
धमाके की जगह इमारत खड़ी है और बीम और पिलर भी सही सलामत हैं. लेकिन दीवारें गायब हैं. इमारत में जलने के निशान नहीं है. इमारतें मिसाइल से बने क्रेटर के करीब है. मतलब बहुत ज्यादा विस्फोटक के प्रहार से भारी धमाका हुआ है. जमीन और हवा में भूंकप जैसी तरंगे बनी होंगी. जिसकी वजह से दीवारें पर्दों की तरह कांप कर टूट गयी हैं. घर के भीतर रखी चीजें उछल कर बाहर निकल आयी हैं. और ये पैटर्न इस रेजिडेंशियल एरिया में बहुत दूर तक दिखता है.
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इजरायल का एयर डिफेंस सिस्टम फेल!
इसका एक मतलब ये भी है कि इजरायल का एयर डिफेंस सिस्टम यहां पर कामयाब नहीं हुआ. एक साथ कई ईरानी मिसाइल बिना रुके शहरों में घुस गयी. इस तरह की तबाही के लिए ऐसी मिसाइलें जिम्मेदार हो सकती हैं, जिन्हें आप रात के अंधेरे आसमान में ऐसे देखते हैं. जिसमें एक साथ कई जलते हुए बिन्दू तेजी से धरती की ओर भागते नजर आते हैं.
इजरायल की राजधानी तेल अवीव के नॉर्थ का इलाका से एक वीडियो सामने आया है. इसमें कॉलोनी है और सड़क खाली हैं. गाड़ियां सड़क के किनारे खड़ी हैं. तभी एक गाड़ी के बगल से एक महिला और एक पुरूष निकल कर तेजी से बि्डिंग की ओर बढ़ते हैं, वो जैसे ही बिल्डिंग के भीतर पहुंचते हैं और एक मिसाइल आती है और कार में घुस जाती हैं. कार खिलौने की तरह उछल कर जमीन पर गिरती है. लेकिन इसके बाद क्या होता है.
मिसाइल अपने हमले की जानकारी खुद भी देती है. हमले से कुछ सेकेंड पहले मिसाइल के आने की आवाज पहुंच जाती है. अमेरिकी सैनिक अड्डे का एक वीडियो इसकी गवाही देता है. सैनिक बेसमेंट में छिपे हैं. उन्हें मिसाइल के गिरने का इंतजार है. जैसे ही मिसाइल गिर कर फटती है. चारो ओर से आवाजे आती हैं.
ईरान की तरफ से दुश्मनो पर मिसाइल और ड्रोन दागे जा रहे हैं. इजरायल और अमेरिका ईरान पर बम और ड्रोन से हमला कर रहे हैं. आंकड़े चौकाने वाले हैं. गिनते हर घंटे हर मिनट बढ़ रही है.
मिसाइल कैसे काम करता है और इसमें क्या-क्या होता है?
मिसाइल का बाहरी हिस्सा हाईस्ट्रेंथ स्टील एल्युमिनियन एलॉय कॉर्बन,फाइबर और केवलर के कंपोजिट मैटेरियल से बना होता है. सबसे ऊपरी हिस्से को नोज कहते हैं. इसमें वॉरहेड होता है. इसकी नजर लक्ष्य पर होती है. वॉरहेड तीन तरह के होते हैं. कन्वेंशनल, फ्रगमेंटेशन, पेनीट्रेटर. तीनों की मारक क्षमता अलग होती है. जैसा की नाम से ही स्पष्ट है. फिर गाइडेंस सेक्शन होता है जिसमें कंप्यूटर सेंसर और जीपीएस होते हैं जो दिशा और मार्ग तय करने में मदद करता है. सॉलिड या लिक्विड फ्यूल वाला प्रोपल्शन सेगमेंट होता है. ये उड़ान और थ्रस्ट के लिए जिम्मेदार होता है. नीचे के हिस्से में इलेक्ट्रॉनिक्स होते हैं- बैट्री और सर्किट वगैरा. फिन्स जो कि दिशा बदलने में मदद करते हैं. मिसाइल गति और मारक दूरी के आधार पर कई तरह की होती हैं. शार्ट, मीडियम, इंटरमीडिएट और इंटरकॉन्टीनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल. बैलिस्टिक मिसाइल अंतरिक्ष में जाती है और फिर लौट कर धरती पर हमला करती है. क्रूज मिसाइल सामान्य तौर पर जल, जमीन और आकाश के बीच में ही ट्रैवल करती है.
ब्लास्ट के तुरंत बाद क्या-क्या होता है?
ब्लास्ट के तुरंत बाद राहत के लिए कई तरह की टीम पहुंचती हैं. रेस्क्यू के लिए आने वाले डॉग स्कॉव्यॉड के साथ आते हैं, वो मौके पर पहुंचते ही अपने स्निफर डॉग्स की चेन खोल देते हैं. कुत्ते फौरन मौत के तांडव में जिंदगी की खोज शुरू कर देते है. इस दौरान जिंदा लोग भी मिल जाते हैं. लेकिन हर कोई किस्मत वाला नहीं होता. अक्सर लोगों के शव निकालने पड़ते हैं, उसमें इतनी मशक्कत होती है कि दुख और बड़ा हो जाता है. सड़क की सफाई वाले दल पहुंचते हैं. डॉक्टर पहुंचते हैं. फायर फाइटर्स पहुंचते हैं. धूल दबाने के लिए पानी का छिड़काव करने वाले पहुंचते हैं. जहां बिल्डिंग बड़ी होती है वहां मलबा हटाने के लिए बड़े बड़े बुल्डोजर का इस्तेमाल किया जाता है. ये दृश्य इतने खौफनाक होते हैं कि दिल दहल जाता है.
ईरान में कैसे होता है रेस्क्यू?
ईरान में पोस्ट अटैक रेस्क्यू में हर जगह लाल और सफेद कपड़ों में एक खास दल दिखाई देता है. इसका नाम है रेड क्रिसेंट. ये जिंदगी बचाते हैं. दुख में डूबे लोगों के कंधे पर हाथ रखते हैं. मुश्किल से मुश्किल हालात में फौरन जिंदगी बचाने के काम में लग जाते हैं. ये पूरी तरह से ट्रेंड लोगों होते हैं. इनके पास रेस्क्यू के लिए डॉग वगैरा सब होते हैं. स्थिति और जरूरत के मुताबिक इनकी क्षमताएं होती हैं और ये उसका इस्तेमाल करते हैं. ईरान में कहीं भी मदद की जरूरत होती है तो ये लोग फौरन पहुंचते हैं.
महाशक्तियों के दांत खट्टे कर रहा ईरान?
युद्ध के बीच में ईरान की मिसाइल और ड्रोन की बहुत चर्चा है. चर्चा केवल इसलिए नहीं है कि वो महाशक्तियों के दांत खट्टे कर रहा है. चर्चा इसलिए है कि इतने कड़े प्रतिबंध हैं. इतने सालों से प्रतिबंध हैं. फिर भी ईरान का मिसाइल कार्यक्रम कैसे चल रहा है. ईरान युद्ध के बीच में भी मिसाइल कैसे बना रहा है. ड्रोन कैसे बना रहा है.
मिसाइलों के भीतर चीन और रूस का बारूद
दावा किया जाता है कि ईरान की मिसाइलों के भीतर चीन और रूस का बारूद है और इसे भरने का काम करता है नॉर्थ कोरिया. दावा किया जाता है कि चीन ने पेट्रोलियम के बदले चीन को वो तकनीकी दी है जो दुनिया में अच्छे अच्छे देशों के पास नहीं है. रूस ने अमेरिका से दुश्मनी के खिलाफ ईरान को मोहरा बनाया है. चूंकि दोनो सामने नहीं आना चाहते हैं, इसलिए मिसाइल की तकनीकी और विज्ञान नॉर्थकोरिया के साइटिंस्ट की मदद से ईरान पहुंचाया जाता है. ईरान में चीन रूस और नॉर्थ कोरिया मिलकर ईरान की मिसाइल बना रहे हैं.
सवाल उठता है कि पैसा कहां से आता है. इस पर दावा है कि ईरान पेट्रोलियम का अवैध कारोबार करता है. इसकी कमाई चीन और नॉर्थकोरिया को दी जाती है. ये बात अमेरिका जानता है. इसलिए जैसे ही अमेरिका को बात हाथ से निकलती दिखी वो बम लेकर ईरान के घर में घुस गया. इससे पहले ग्रीनलैंड, वेनेजुएला में भी यही हुआ. चीन रूस की नजदीकी बढ़ते ही अमेरिका ने उन्हें घेर लिया. इसका मतलब ये है कि हर उस जगह युद्ध होगा, जहां चीन और रूस अमेरिका या उसके डॉलर को कमजोर करने की कोशिश करेंगे.
अमेरिका की रणनीति में एक बात बहुत पुरानी है. सरकार किसी की रहे वो नीति नहीं बदलती है. अमेरिका मानता है कि अगर एशिया को नियंत्रण में रखना है तो होर्मूज का रिमोट अपने हाथ में रखना होगा, क्योंकि एशिया की एनर्जी जरूरतों का बड़ा हिस्सा होर्मूज से आता है. चीन की पेट्रोलियम जरूरत का अस्सी फीसदी होर्मूज से आता है. इसीलिए चीन चाहता है कि वहां का कंट्रोल उसके पास रहे, जबकि अमेरिका ऐसा नहीं चाहता. नतीजा युद्ध.
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