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This Article is From Apr 06, 2026

मिसाइल, ड्रोन या बम हमले के बाद ब्लास्ट की साइट पर क्या-क्या होता है? इनसाइड स्टोरी

धमाके के फौरन बाद राहत और बचाव का एक निर्धारित प्रोटोकॉल शुरू होता है. सबसे पहले रेस्क्यू टीम और डॉग स्क्वाड मौके पर पहुंचते हैं. स्निफर डॉग्स मलबे के ढेर में मौत के तांडव के बीच जिंदगी की तलाश शुरू करते हैं. इसके बाद सड़क सफाई दल, डॉक्टर, फायर फाइटर्स और धूल दबाने के लिए पानी के टैंकर पहुंचते हैं.

AI की तस्वीर
  • युद्ध क्षेत्र में मिसाइल, ड्रोन या बम के धमाके से बड़े गड्ढे और व्यापक भौतिक विनाश के निशान बनते हैं.
  • ईरान ने मिसाइल हमलों के जरिए इजरायल और अन्य महाशक्तियों के खिलाफ अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन किया है.
  • मिसाइल हमलों के बाद राहत कार्यों के लिए प्रशिक्षित रेस्क्यू टीमें और स्निफर डॉग्स तुरंत मौके पर पहुंचते हैं.

युद्ध में जब कोई मिसाइल, बम या ड्रोन अपने लक्ष्य से टकराता है, तो दुनिया केवल बारूद की चमक और धमाके की गूंज देख पाती है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि उस 'ब्लास्ट साइट' पर वास्तव में क्या बीतती है. एक मिसाइल या स्मार्ट बम कितनी तबाही मचाएगा, यह उसकी बनावट और मारक क्षमता पर निर्भर करता है. युद्ध एक त्रासदी जरूर है, लेकिन इसका भी अपना एक जटिल सिस्टम और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर है. मिसाइल हमलों के बाद क्या होता है और कौन मौके पर सबसे पहले पहुंचता है. साथ ही कैसे दुनिया की महाशक्तियां इन हथियारों के निर्माण में एक-दूसरे से जुड़ी हैं, इसे समझना जरूरी है.

यरूशलम में दिखा तबाही का मंजर

ईरान-इजरायल संघर्ष में मिसाइलें सबसे बड़ा हथियार बनकर उभरी हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने अपनी मिसाइल तकनीक के दम पर ही सुपरपावर की मनमानी को चुनौती दी है. जब भी दावा किया जाता है कि ईरान का अंत निकट है, तभी एक मिसाइल गरजती है और समीकरण बदल जाते हैं. 28 मार्च 2026 को इजरायल के एश्तॉल और यरूशलम में गिरी ईरानी मिसाइलों ने जो मंजर दिखाया, वह दहला देने वाला था. जमीन पर 6 फीट गहरे और 30 फीट चौड़े गड्ढे बन गए, जिनकी जांच बुलेटप्रूफ जैकेट पहने मिलिट्री एक्सपर्ट्स कर रहे हैं. भूकंप और मिसाइल हमले के विनाश में यही अंतर है- मिसाइल हमले के बाद वैज्ञानिक और सैन्य विश्लेषण सर्वोपरि होता है.

तबाही का पैटर्न चौंकाने वाला

इजरायल के बेत शेमेश और अरड जैसे इलाकों में तबाही का पैटर्न चौंकाने वाला है. 4 मार्च 2026 के हमलों में कंक्रीट की इमारतें ऐसी दिखीं जैसे उन्हें किसी ग्राइंडर में पीस दिया गया हो. अरड में हुए हमले में ईरान ने 'मल्टी-वॉरहेड' मिसाइलों का इस्तेमाल किया, जिससे पूरा इलाका खंडहर में तब्दील हो गया. यहां एक अजीबोगरीब दृश्य दिखा- इमारतों के ढांचे (बीम और पिलर) खड़े थे, लेकिन दीवारें गायब थीं. यह भारी विस्फोटकों से पैदा होने वाली उन 'शॉकवेव्स' का नतीजा है, जो दीवारों को पर्दों की तरह फाड़ देती हैं. यह इस बात का भी प्रमाण है कि इजरायल का एयर डिफेंस सिस्टम उन 'मल्टीपल वॉरहेड्स' को रोकने में पूरी तरह सफल नहीं रहा, जो रात के आसमान में जलते हुए बिंदुओं की तरह तेजी से धरती की ओर बढ़ते हैं.

मिसाइल में क्या-क्या होता है? 

मिसाइल की बनावट अपने आप में विज्ञान का चमत्कार और तबाही जैसा है. इसकी बाहरी परत हाई-स्ट्रेंथ स्टील, एल्युमिनियम एलॉय और कार्बन फाइबर जैसे कंपोजिट मटेरियल से बनी होती है. इसके सबसे ऊपरी हिस्से, जिसे 'नोज' कहते हैं, उसमें वॉरहेड (विस्फोटक) होता है. ये मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं- कन्वेंशनल (पारंपरिक), फ्रैगमेंटेशन (टुकड़ों में बंटने वाला) और पेनीट्रेटर (बंकर भेदने वाला). इसके अलावा इसमें गाइडेंस सेक्शन (सेंसर और GPS), प्रोपल्शन (ईंधन) और फिन्स होते हैं जो इसे दिशा देते हैं. मिसाइलें अपनी गति और दूरी के आधार पर शॉर्ट रेंज से लेकर इंटरकॉन्टीनेंटल तक हो सकती हैं, जो अंतरिक्ष से होकर वापस धरती पर हमला करती हैं.

धमाके के बाद क्या-क्या होता है?

धमाके के फौरन बाद राहत और बचाव का एक निर्धारित प्रोटोकॉल शुरू होता है. सबसे पहले रेस्क्यू टीम और डॉग स्क्वाड मौके पर पहुंचते हैं. स्निफर डॉग्स मलबे के ढेर में मौत के तांडव के बीच जिंदगी की तलाश शुरू करते हैं. इसके बाद सड़क सफाई दल, डॉक्टर, फायर फाइटर्स और धूल दबाने के लिए पानी के टैंकर पहुंचते हैं. बड़े मलबे को हटाने के लिए बुलडोजर तैनात किए जाते हैं. ईरान जैसे देशों में 'रेड क्रिसेंट' नामक प्रशिक्षित दल इस काम में सबसे आगे रहता है, जो न केवल घायलों को बचाता है बल्कि शोकाकुल लोगों को ढांढस भी बंधाता है.

इतने कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद ईरान का मिसाइल और ड्रोन कार्यक्रम कैसे फल-फूल रहा है, यह एक बड़ा सवाल है. इसके पीछे एक चर्चित थ्योरी है: दावा किया जाता है कि ईरान की मिसाइलों में चीन और रूस का बारूद है, जिसे उत्तर कोरिया के वैज्ञानिकों की मदद से असेंबल किया जाता है. यह एक ऐसा त्रिकोण है जहाँ चीन पेट्रोलियम के बदले तकनीक देता है और रूस रणनीतिक बढ़त के लिए ईरान को मोहरा बनाता है. इस पूरे तंत्र के लिए पैसा ईरान के अवैध पेट्रोलियम कारोबार से आता है. अमेरिका इस बात को जानता है और इसीलिए वह सीधे तौर पर हस्तक्षेप कर रहा है. अंततः, यह युद्ध केवल जमीन का नहीं बल्कि 'होर्मूज जलडमरूमध्य' और ऊर्जा संसाधनों पर नियंत्रण का है, जहाँ चीन और रूस का वर्चस्व अमेरिका के डॉलर और सत्ता को चुनौती दे रहा है.

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