- अमेरिका-ईरान के बीच सैन्य तनाव के कारण वैश्विक बाजारों में गिरावट और कच्चे तेल के दाम चढ़ रहे हैं
- इतिहास गवाह है कि जब भी खाड़ी देशों में जंग की नौबत आई है, तेल की कीमतें आसमान छूने लगती हैं
- ट्रंप ने मिडिल ईस्ट में बड़ी फौज तैनात कर दी है औरईरान को चेतावनी दे रहे हैं. ईरान ने भी तैयारी शुरू कर दी है
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक बाजार में खलबली मचा दी है. वैश्विक बाजारों में गिरावट का दौर शुरू हो गया है. कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने लगी हैं. गुरुवार को ही कच्चे तेल की कीमतों में करीब 2 फीसदी का उछाल देखा गया. जानकारों का मानना है कि अगर अमेरिका ने ईरान पर हमला कर दिया तो तेल की कीमतों में आग लग सकती है. शेयर बाजारों में भी इस तनाव का असर दिखने लगा है. अमेरिका में निवेशकों ने युद्ध की आशंका में बिकवाली शुरू कर दी है.
तेल के दाम 6 महीनों के उच्चतम स्तर पर
इतिहास गवाह है कि जब भी खाड़ी देशों में जंग की नौबत आई है, तेल की कीमतें आसमान छूने लगती हैं. ईरान-इराक युद्ध के दौरान भी ऐसा देखा गया था. मिडिल ईस्ट में मौजूदा तनाव का असर तेल के दामों पर नजर आने लगा है. गुरुवार को ही ब्रेंट क्रूड 2 फीसदी बढ़कर 71.58 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी क्रूड (WTI) 66.53 प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया. यह पिछले छह महीनों का उच्चतम स्तर है.

मिडिल ईस्ट में अमेरिकी फौज तैनात
अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी बड़ी फौज तैनात कर दी है. उसके कम से कम 13 जंगी जहाज वहां पहुंच चुके हैं. एक विमानवाहक पोत भी आ गया है. दूसरा दुनिया का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत भी पहुंच रहा है. इसके अलावा बड़ी संख्या में लड़ाकू विमान भी मोर्चे पर तैनात कर दिए गए हैं. ये दुर्लभ मौका है, जब एकसाथ दो अमेरिकी विमानवाहक पोत यहां तैनात किए जा रहे हैं.
ट्रंप ने ईरान को दी साफ चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान को धमकी दे रहे हैं. गुरुवार को वॉशिंगटन में बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक के दौरान भी उन्होंने ईरान की साफ शब्दों में चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि अगर ईरान ने सार्थक समझौता नहीं किया तो अमेरिका मामले को आगे ले जा सकता है. उन्होंने सैन्य कार्रवाई की तरफ इशारा करते हुए कहा कि अगले 10 दिनों में दुनिया को पता चल जाएगा.
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ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट बंद किया
ईरान ने भी अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं. उसने रूस के साथ मिलकर सैन्य अभ्यास तेज कर दिए हैं. इन युद्धाभ्यासों को वजह बताकर उसने अस्थायी रूप से होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को भी बंद कर दिया है. यह वही समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20% से 25% हिस्सा गुजरता है.
क्या है होर्मुज जलडमरूमध्य?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण चोक पॉइंट्स में से एक है, जिसके जरिए दुनिया में तेल और गैस की सप्लाई होती है. वैश्विक आपूर्ति का पांचवां हिस्सा यहीं से होकर गुजरता है. यह फारस की खाड़ी को अरब सागर और हिंद महासागर से जोड़ता है. इसका सबसे संकरा बिंदु करीब 33 किलोमीटर चौड़ा है. यह उत्तर में ईरान और दक्षिण में अरब प्रायद्वीप को जोड़ता है.

ये इतना अहम क्यों है?
एक दौर में यह पश्चिमी देशों के लिए बहुत महत्वपूर्ण था, खासकर अमेरिका और यूरोप के लिए. हालांकि अब यह चीन और एशिया की लाइफलाइन बन चुका है. भारत के लिए भी होर्मुज जलडमरूमध्य बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि उसके कुल तेल आयात का अहम हिस्सा यहीं से होकर आता है.
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तेल एक्सपोर्ट का प्रमुख रास्ता
होर्मुज जलडमरूमध्य अगर लंबे समय तक बंद रहा तो कई देशों को नुकसान हो सकता है. सऊदी अरब, इराक, यूएई, कतर, ईरान और कुवैत जैसी क्षेत्रीय महाशक्तियों के तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा इस संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है.
जानकारों का कहना है कि सोने की कीमतों में पहले से ही रिकॉर्ड बढ़ोतरी देखी जा रही है और अब कच्चा तेल वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अगली बड़ी मुसीबत बन सकता है. कच्चे तेल में लगी ये आग अगर भड़की तो न सिर्फ पेट्रोल-डीजल महंगा होगा, बल्कि माल ढुलाई की लागत बढ़ने से तमाम चीजें के दाम भी बढ़ सकते हैं.
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