अमेरिका में मिडटर्म चुनावों (US Midterm Election 2026) के लिए मतदान शुरू हो गया है और इसके साथ ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के अगले दो वर्षों की राजनीतिक दिशा तय करने वाली सबसे बड़ी लोकतांत्रिक कवायद भी शुरू हो गई है. पूरे देश और दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या रिपब्लिकन पार्टी कांग्रेस पर अपना नियंत्रण बनाए रख पाएगी या डेमोक्रेट्स सत्ता का संतुलन बदल देंगे. करीब 6 करोड़ मतदाता पहले ही वोट डाल चुके हैं.
अमेरिका के कई राज्यों में मतदान जारी है. फ्लोरिडा, जॉर्जिया, मिशिगन, पेनसिल्वेनिया, मैरीलैंड, मैसाचुसेट्स, मिसौरी, साउथ कैरोलिना और वॉशिंगटन डीसी समेत कई इलाकों में पोलिंग बूथ खुल चुके हैं. इससे पहले पूर्वी तट के राज्यों, जिनमें ओहायो और मेन में वोटिंग शुरू हो गई थी.

मतदान से पहले ही करीब 6 करोड़ वोट
चुनाव दिवस से पहले ही बड़ी संख्या में अमेरिकी मतदाता अपना मताधिकार इस्तेमाल कर चुके हैं. आंकड़ों के अनुसार लगभग 5.87 करोड़ वोट पहले ही पड़ चुके हैं. इनमें करीब 3.19 करोड़ लोगों ने मतदान केंद्रों पर जाकर अग्रिम मतदान किया, जबकि लगभग 2.68 करोड़ मतदाताओं ने डाक मतपत्र के जरिए वोट डाला. हाल के सालों में अमेरिका में अर्ली वोटिंग का चलन तेजी से बढ़ा है और अधिकांश मतदाताओं को यह सुविधा उपलब्ध है.

आखिर क्या होते हैं मिडटर्म चुनाव?
अमेरिका में राष्ट्रपति का कार्यकाल चार साल का होता है. इसी कार्यकाल के बीच में होने वाले चुनावों को मिडटर्म चुनाव कहा जाता है. इन्हें राष्ट्रपति के कामकाज और लोकप्रियता की बड़ी परीक्षा भी माना जाता है.
इन चुनावों में अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों के लिए मतदान होता है. कांग्रेस का काम पूरे देश के लिए संघीय कानून बनाना और उन्हें मंजूरी देना होता है.

इस बार अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की सभी 435 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं. हाउस के सदस्य दो साल के लिए चुने जाते हैं और ज्यादातर विधेयक सबसे पहले इसी सदन में पेश किए जाते हैं.
फिलहाल हाउस में रिपब्लिकन पार्टी के पास 219 सीटें हैं, जबकि डेमोक्रेट्स के पास 214 सीटें हैं. दो सीटें खाली हैं.
वहीं, ऊपरी सदन सीनेट की 100 में से 35 सीटों पर वोटिंग हो रही है. सीनेटरों का कार्यकाल छह साल का होता है और वे हाउस से पारित विधेयकों को मंजूरी देते हैं या उन्हें रोक सकते हैं. वर्तमान में सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के पास 53 सीटें हैं. डेमोक्रेट्स के पास 45 सीटें हैं और उन्हें दो निर्दलीय सीनेटरों का भी समर्थन हासिल है.

ट्रंप के लिए क्यों अहम हैं ये चुनाव?
मिडटर्म इलेक्शन के जरिए राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का चुनाव नहीं होता है, लेकिन निचले सदन के सांसदों का चुनाव किया जाता है. मिडटर्म चुनाव सिर्फ सांसद चुनने की प्रक्रिया नहीं हैं. इन्हें राष्ट्रपति ट्रंप के कामकाज पर जनता के जनादेश के तौर पर भी देखा जा रहा है.
इस समय व्हाइट हाउस के साथ-साथ कांग्रेस के दोनों सदनों में रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण है. यही वजह है कि ट्रंप प्रशासन अपने पसंदीदा विधेयकों को कांग्रेस (अमेरिकी संसद) से पारित कराने की स्थिति में रहा है.
लेकिन अगर डेमोक्रेट्स हाउस या सीनेट में बहुमत हासिल कर लेते हैं तो ट्रंप के लिए अपने एजेंडे को आगे बढ़ाना आसान नहीं रहेगा. विपक्ष को सत्ता संतुलन बदलने के लिए अहम सीटों पर बढ़त बनानी होगी. ऐसे में यह चुनाव आने वाले सालों की अमेरिकी राजनीति की दिशा तय कर सकता है.
राज्यों में भी दांव पर बड़ी सियासी लड़ाइयां
कांग्रेस के चुनावों के साथ-साथ कई राज्यों में गवर्नर और अन्य राज्य स्तरीय पदों के लिए भी मतदान हो रहा है. कैलिफोर्निया, फ्लोरिडा, जॉर्जिया और मिशिगन जैसे राज्यों में गवर्नर पद की लड़ाई पर खास नजर रखी जा रही है. इन चुनावों के नतीजे भविष्य की राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर डाल सकते हैं.

नतीजे कब आने शुरू होंगे?
मतगणना के शुरुआती रुझान भारतीय समयानुसार देर रात और तड़के आने शुरू होंगे. शुरुआती नतीजे उन इलाकों से आएंगे जिन्हें अपेक्षाकृत सुरक्षित सीटें माना जाता है. हालांकि चुनाव की असली तस्वीर ओहायो, मेन और अन्य कड़े मुकाबले वाले राज्यों के परिणाम सामने आने के बाद ही साफ होगी.
कई सीटों पर मुकाबला बेहद करीबी माना जा रहा है. ऐसे में अमेरिकी मीडिया संस्थान अपनी प्रोजेक्शन जारी करेंगे, लेकिन कुछ राज्यों के नतीजों पर अंतिम तस्वीर आने में समय लग सकता है. यदि मुकाबला बेहद कांटे का रहा तो कांग्रेस पर किसका नियंत्रण होगा, इसका फैसला अगले दिन तक भी खिंच सकता है.
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