वेनेजुएला में अस्पतालों की इमारतें जमींदोज हो चुकी हैं और जो बची हैं, वहां पैर रखने की जगह नहीं है. ऐसे में जिंदगी बचाने की जद्दोजहद अब मैकडॉनल्ड्स के रेस्टोरेंट और बस टर्मिनलों के भीतर चल रही है. लोग अब भी त्रासदी से जंग लड़ रहे हैं.
वेनेजुएला के ला गुआरा प्रांत में आए दो लगातार विनाशकारी भूकंपों ने कुछ ऐसा ही खौफनाक मंजर पैदा कर दिया है. 7.2 और 7.5 की शिद्दत (तीव्रता) वाले इन जुड़वां भूकंपों ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है. इस भयानक त्रासदी में अब तक 2,600 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 12,600 से अधिक लोग जख्मी हैं.
-
Ashwini Vaishnaw के ऑफिस में कुर्सी के पीछे क्यों लगी है कील? NDTV World Summit में खोला राज -
NDTV World Summit 2026: Asian Games में कैसे जीते 2 Gold Medal? Shooter Neeru Dhanda ने बताया -
AI न नौकरी खाएगा, न इंसानों की जगह लेगा... NDTV World Summit में माइक वॉल्श ने बता दिया AI का फ्यूचर -
महंगाई, GDP और AI पर RBI गवर्नर Sanjay Malhotra का बड़ा बयान, आम आदमी को कितनी राहत? | EXCLUSIVE -
Ashwini Vaishnaw की कुर्सी के पीछे की ओर क्यों लगी है कील? | EXCLUSIVE | NDTV World Summit 2026 -
रेलमंत्री वैष्णव ने बताया बुलेट ट्रेन में देरी की क्या रहीं वजहें, जापानी मंत्री के आरोपों का दिया जवाब -
NDTV World Summit 2026 | भारत पर साइबर अटैक का खतरा कितना बड़ा? Microsoft के निकोलस बट्स ने बताया -
AI पर भारत में आएगा कानून, NDTV World Summit में बोले अश्विनी वैष्णव- चंद हफ्तों में आएगा कंसल्टेशन पेपर -
NDTV World Summit 2026: सेमीकंडक्टर, AI और बुलेट ट्रेन पर क्या है भारत का मेगा प्लान? अश्विनी वैष्णव ने बताया -
'भारत के लिए खतरा बिल्कुल रियल': NDTV वर्ल्ड समिट में माइक्रोसॉफ्ट के AI विशेषज्ञ निकोलस बट्स
अस्पतालों की इमारतें जमींदोज हो चुकी हैं और जो बची हैं, वहां पैर रखने की जगह नहीं है. ऐसे में जिंदगी बचाने की जद्दोजहद अब मैकडॉनल्ड्स के रेस्टोरेंट और बस टर्मिनलों के भीतर चल रही है.
फास्ट फूड काउंटर पर बंट रही दवाएं
तबाही के इस केंद्र में हालात इस कदर बदतर हैं कि जहां कभी लोग बर्गर और आइसक्रीम का लुत्फ उठाने आते थे, आज वह मैकडॉनल्ड्स का रेस्टोरेंट एक फील्ड हॉस्पिटल में तब्दील हो चुका है. काराबालेदा इलाके के इस मैकडॉनल्ड्स की छत से अब चार-चार आईवी फ्लूइड की बोतलें लटकी नजर आ रही हैं.

Photo Credit: AFP
राहत और बचाव कार्य में जुटीं 33 साल की वालंटियर सर्जन कार्लीज फिगुएरा ने बताया कि यहां हर तरफ चीख-पुकार मची है. रेस्टोरेंट के भीतर बने इस अस्थायी अस्पताल में लोग हाई ब्लड प्रेशर, पैनिक अटैक और डायरिया की शिकायत लेकर आ रहे हैं. इस रेस्टोरेंट को बहुत सलीके से अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया गया है.
मलबे में 16 घंटे जिंदगी की जंग, बस स्टेशन बना सहारा
ला गुआरा का कैटिया ला मार बस टर्मिनल भी आज एक बड़े हेल्थ सेंटर का रूप ले चुका है, जहां अब तक करीब 4,000 मरीजों का इलाज किया जा चुका है. भूकंप के फौरन बाद घायलों को सिर्फ दो अस्पतालों में ले जाया गया था, लेकिन लैटिन अमेरिका की इस सबसे बड़ी आपदा के सामने वे अस्पताल चंद घंटों में ही पस्त (लाचार) हो गए.
इसी बस स्टेशन के भीतर लगे एक बड़े टेंट में, प्राइवेट फंड से जुटाए गए मेडिकल इक्विपमेंट्स के सहारे 13 साल का मासूम इवरसन मदीना स्ट्रेचर पर लेटा अपनी बारी का इंतजार कर रहा था. उसके दाहिने पैर और बाएं टखने पर पट्टियां बंधी थीं. इवरसन अपने ढह चुके मकान के मलबे में पूरे 16 घंटे तक जिंदगी और मौत के बीच झूलता रहा.
इवरसन ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा, "मैं बहुत खौफजदा था. मुझे लगा कि शायद अब मैं कभी बाहर नहीं निकल पाऊंगा. लेकिन जब मैंने दमकलकर्मियों को देखा, तब जाकर मेरी जान में जान आई." इस हादसे ने इवरसन को जिंदगी तो दे दी, लेकिन एक गहरा जख्म भी दे गया. उसने मलबे के भीतर ही अपनी दादी और एक चचेरे भाई को दम तोड़ते देखा. वह इस सदमे से अब शायद ही उबर पाएगा.
'सड़कों पर लाशें थीं और कब्रिस्तान छोटे पड़ गए'
भूकंप की इस विभीषिका को खुद झेलने वाली डॉक्टर मारिया जोस पिनो ने वहां के खौफनाक मंजर को बयां किया. मारिया ने बताया कि उनके मोबाइल पर आए अर्थक्वेक अलर्ट ने वक्त रहते उन्हें घर से बाहर निकलने का मौका दे दिया, जिससे उनकी जान बच गई. पैर में चोट होने के बावजूद मारिया बिना रुके मरीजों की सेवा में लगी हैं.

Photo Credit: AFP
मारिया कहती हैं, "मंजर बेहद खौफनाक था. सड़कों पर लाशें बिखरी पड़ी थीं. मुर्दाघरों में जगह नहीं बची थी, लाशें सड़ रही थीं. मुझे आज भी लगता है कि जितना मैंने किया, वह कुछ भी नहीं था."
अब महामारी का बढ़ा खतरा
ला गुआरा प्रांत में 150 से ज्यादा बहुमंजिला इमारतें पूरी तरह जमींदोज हो चुकी हैं. बेघर हुए हजारों लोग अब शेल्टर होम में रहने को मजबूर हैं. संयुक्त राष्ट्र (UN) ने चेतावनी दी है कि इन शेल्टर होम में बढ़ती भीड़ की वजह से अब संक्रामक बीमारियों का खतरा तेजी से मंडरा रहा है.
डॉ. एंटोनियो ओलाइज़ोला ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में डायरिया, पेचिश (डिसेंट्री), पेट दर्द और उल्टी के मरीजों की तादाद बहुत तेजी से बढ़ी है. उन्होंने कहा कि भूकंप की तबाही के बाद अब इस भीड़भाड़ के चलते संक्रामक बीमारियां पैर पसारने लगी हैं, जिससे निपटना हमारे लिए इस वक्त सबसे बड़ी चुनौती है.
यह भी पढ़ें: वेनेजुएला में भूकंप के मलबे से 8 दिन बाद जिंदा निकला गार्ड, 8 देशों के बचावकर्मियों ने मिलकर बचाया
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं