- अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई के तहत नए प्रतिबंध आज लागू करने की योजना बनाई है
- वित्त मंत्री बेसेंट का संकेत- अमेरिका उन देशों को भी निशाना बनाएगा जो ईरान के साथ आर्थिक संबंध जारी रखेंगे
- ईरान की चेतावनी- आर्थिक युद्ध जारी रहने पर वह खाड़ी से होर्मुज, फारस से तेल निर्यात को पूरी तरह बंद कर देगा
क्या अमेरिका और ईरान की जंग अपने आखिरी पड़ाव पर पहुंच चुकी है. कम से कम अपनी जीत के आश्वस्त अमेरिका को तो यही लग रहा है. अब अमेरिका ने ईरान को चेतावनी दी है कि वह उसके खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई करने जा रहा है. अमेरिका सोमवार को ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों और कंपनियों पर नए आर्थिक प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है. अमेरिका ने इस दिन को यानी सोमवारो को इकनॉमकि D-Day करार दिया है. D-Day एक मिलिट्री कोड शब्द है जो उस सटीक दिन के लिए इस्तेमाल किया जाता है जब कोई लड़ाकू हमला या बड़ा ऑपरेशन शुरू होता है. दूसरी तरफ, ईरान ने धमकी दी है कि अगर उसके खिलाफ आर्थिक युद्ध जारी रहा, तो वह खाड़ी से होने वाले तेल के सभी निर्यात को रोक देगा.
अमेरिका ने क्या कहा?
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट सोमवार को दोपहर 2 बजे EDT (भारतीय समय के अनुसार रात 11:30 बजे) प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे. इसमें ईरान के खिलाफ और भी कड़े कदमों की घोषणा किए जाने की उम्मीद है. बेसेंट ने रविवार को फाइनेंशियल टाइम्स में लिखे एक आर्टिकल में कहा, “सुबह होते ही आर्थिक डी-डे शुरू होगा. यह किसी दुश्मन के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई होगी.”
बेसेंट ने नए प्रतिबंधों के बारे में कोई खास जानकारी नहीं दी. लेकिन उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका उन देशों को भी निशाना बनाएगा, जो ईरान के साथ उसके आर्थिक और वित्तीय सिस्टम के जरिए कारोबार करके उसे समर्थन दे रहे हैं. उन्होंने फाइनेंशियल टाइम्स में लिखा कि इन देशों को ईरान के साथ आर्थिक संबंध जारी रखने के नतीजों के बारे में सोचना चाहिए.
ईरान की क्या तैयारी है?
ईरान पिछले कई दिनों से इन नए प्रतिबंधों के लिए तैयार हो रहा है. ईरान की ओर से लगातार कड़े बयान आए थे, जिनसे संकेत मिला था कि वह इसके जवाब में बड़ी सैन्य कार्रवाई कर सकता है. ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसेन रेजाई ने रविवार को आर्थिक जवाबी कार्रवाई की बात कही.
उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “अगर आर्थिक युद्ध जारी रहा, तो तेल की एक बूंद भी निर्यात नहीं की जाएगी. न स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से और न ही फारस की खाड़ी में किसी दूसरी जगह से. ईरान अमेरिका के आर्थिक युद्ध में किसी भी देश की भागीदारी या समर्थन को ईरानी लोगों के खिलाफ युद्ध की कार्रवाई मानेगा.”
तेल पर संकट
बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच कई हफ्तों से एक-दूसरे पर सैन्य हमले नहीं हुए हैं. लेकिन छह महीने से चल रहे इस संघर्ष को खत्म करने के लिए दोनों देशों के बीच कोई गंभीर बातचीत भी नहीं हुई है. अमेरिका को भी पता है कि ईरान के पास अभी भी इतनी मिसाइल और ड्रोन क्षमता है कि वह खाड़ी के आसपास के देशों पर हमला कर सकता है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले तेल टैंकरों को खतरा पैदा कर सकता है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है. यहां से दुनिया का 20 प्रतिशत तेल का कारोबार होता है. ईरान और अमेरिका की जंग की वजह से यहां जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है. इससे दुनिया भर में तेल-गैस की कीमते तेजी से बढ़ी हैं.
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