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ईरान और इजरायल पर अमेरिका के उपराष्ट्रपति वेंस और विदेश मंत्री रूबियो की राय अलग-अलग

सोमवार को खत्म हुए रॉयटर्स/इप्सोस पोल के मुताबिक, सिर्फ 52% रिपब्लिकन का मानना ​​है कि मौजूदा टकराव ने अमेरिका को मजबूत स्थिति में पहुंचाया है. इससे पता चलता है कि पार्टी इन गुटों के बीच बंटी हुई है.

ईरान और इजरायल पर अमेरिका के उपराष्ट्रपति वेंस और विदेश मंत्री रूबियो की राय अलग-अलग
रूबियो और वेंस दोनों को 2028 के राष्ट्रपति पद के संभावित दावेदार के तौर पर देखा जा रहा है.
  • उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इजरायल की बेरूत में नागरिक बुनियादी ढांचे पर बमबारी की कड़ी आलोचना की थी
  • विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने खाड़ी देशों के दौरे में इजरायल के मिलिट्री ऑपरेशन का समर्थन किया
  • वेंस ने ईरान के साथ बातचीत और सहयोग की संभावना जताई तथा शांति समझौते का बचाव किया

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने ईरान युद्ध पर एकजुट रुख दिखाने की पूरी कोशिश की है, लेकिन पिछले हफ्ते उनके उपराष्ट्रपति और विदेश मंत्री के बयानों में, खासकर इजरायल के मामले में, कभी-कभी मतभेद दिखे हैं. उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पिछले हफ्ते व्हाइट हाउस में बोलते हुए, शुरुआती अमेरिकी-ईरान समझौते की आलोचना करने वाले इजरायली लोगों की कड़ी आलोचना की. उन्होंने कहा कि बेरूत में आम नागरिकों के बुनियादी ढांचे पर इजरायल की बमबारी अमेरिका की अगुवाई वाली शांति कोशिशों को कमजोर कर रही थी.

रूबियो ने लिया इजरायल का पक्ष

इस हफ्ते खाड़ी देशों का दौरा करने वाले विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने लेबनान में इजरायल के मिलिट्री ऑपरेशन का बचाव किया और बार-बार कहा कि हिज्बुल्लाह के हमलों का जवाब देना सही था. जब उनसे वेंस की आलोचना के बारे में पूछा गया, तो रूबियो ने बात टाल दी और इसके बजाय लेबनान के मिलिशिया द्वारा हफ्ते की शुरुआत में इजरायली चेकपॉइंट पर किए गए हमले का जिक्र किया.

इस फर्क से पता चलता है कि भले ही प्रशासन ने एकता पर जोर दिया हो, लेकिन कभी-कभी अलग-अलग नजरिए सामने आ जाते हैं — यह व्हाइट हाउस के लिए एक चुनौती है, क्योंकि उसका पॉलिटिकल गठबंधन विदेश नीति के मामलों पर बुरी तरह बंटा हुआ है. इससे रिपब्लिकन पार्टी के भविष्य की भी एक शुरुआती झलक मिलती है, क्योंकि रूबियो और वेंस दोनों को 2028 के राष्ट्रपति पद के संभावित दावेदार के तौर पर देखा जा रहा है.

दोनों को मिले अलग-अलग काम

पिछले हफ्ते वाशिंगटन और तेहरान के बीच 17 जून को हुए शुरुआती शांति समझौते का बचाव करने के लिए वेंस और रूबियो, दोनों को विदेश की अहम यात्राओं पर भेजा गया था. वेंस ईरानी अधिकारियों के साथ बातचीत के लिए स्विट्जरलैंड गए थे. रविवार को पत्रकारों से बात करते हुए, उन्होंने ईरान के साथ बातचीत की स्थिति को लेकर काफी उम्मीद जताई. उन्होंने हाल के हफ्तों में कई बार यह भी कहा है कि खाड़ी देश ईरान के पुनर्निर्माण के लिए फंड दे सकते हैं. उन्होंने ईरान और अमेरिका के बीच एक नए और ज्यादा सहयोग वाले रिश्ते की संभावना का भी कई बार जिक्र किया है. गुरुवार को जारी एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि अमेरिका ने कतर में पेंटागन के साथ 'डी-कॉन्फ्लिक्शन लाइजन' (टकराव टालने के लिए संपर्क अधिकारी) के तौर पर काम करने के लिए ईरान के एक इंटेलिजेंस अधिकारी को बुलाया था
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इस बीच, रूबियो ने संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और बहरीन का दौरा किया, ताकि सहयोगियों को भरोसा दिलाया जा सके कि उनके हितों की रक्षा की जाएगी. इनमें से कुछ सहयोगियों को चिंता है कि अमेरिका और ईरान के बीच हुआ अंतरिम समझौता तेहरान के लिए कुछ ज्यादा ही उदार है.

मंगलवार को रूबियो ने कहा कि अपनी यात्रा के दौरान वे खाड़ी देशों के सहयोगियों से ईरान के पुनर्निर्माण के लिए फंड देने को नहीं कहेंगे, क्योंकि ऐसी संभावना अभी बहुत दूर की बात है. गुरुवार को क्षेत्रीय अधिकारियों के साथ बैठक में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कोई भी समझौता ऐसा होना चाहिए जो अमेरिका और उसके सहयोगियों के हितों के मामले में पूरी तरह पक्का और मजबूत हो. उन्होंने कहा, "हम समझौता तो चाहते हैं, लेकिन किसी भी कीमत पर नहीं."

'राष्ट्रपति ट्रंप के साथ पूरी तरह एकजुट'

व्हाइट हाउस ने दोनों अधिकारियों के बीच किसी भी तरह के मतभेद से सख्ती से इनकार किया. व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एना केली ने कहा, "सिर्फ़ एक ही खेमा है – राष्ट्रपति ट्रंप का खेमा – और पूरा प्रशासन राष्ट्रपति की उन कोशिशों का पूरी तरह से समर्थन करता है जिनका मकसद यह पक्का करना है कि ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार न हों."

विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने रूबियो और वेंस के बीच विदेश नीति को लेकर किसी भी तरह के मतभेद की बात को "पुरानी और झूठी" कहानी बताया और कहा, "पूरा प्रशासन 100% राष्ट्रपति ट्रंप के साथ एकजुट है."

विदेश विभाग के एक अलग प्रवक्ता ने आगे कहा कि लेबनान के मामले में दोनों अधिकारियों के बीच कोई मतभेद नहीं था; उन्होंने कहा कि प्रशासन का लक्ष्य लेबनान सरकार की उसके पूरे इलाके पर संप्रभुता बहाल करना है.

कुछ एनालिस्ट और कमेंटेटर इससे सहमत नहीं हैं.

अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट थिंक टैंक के सीनियर फेलो माइकल रुबिन ने कहा कि रूबियो और वेंस की राय साफ तौर पर अलग-अलग थी. उन्होंने कहा, "असल में, वे अलग-अलग विचारधाराओं का प्रतिनिधित्व करते हैं." ये दोनों अधिकारी विदेश नीति के बिल्कुल अलग-अलग बैकग्राउंड से आते हैं. पिछले साल पद संभालने से पहले, वेंस अक्सर विदेशी युद्धों की आलोचना करते थे और उन्हें जान-माल की बर्बादी मानते थे. रूबियो ने सीनेट में एक "हॉक" (कठोर रुख अपनाने वाले नेता) के तौर पर अपनी पहचान बनाई, जहां उन्होंने ईरान, रूस और क्यूबा के प्रति ज्यादा आक्रामक रुख अपनाने की वकालत की.

दोनों अलग-अलग खेमों से

दोनों ही नेताओं को ट्रंप का संभावित उत्तराधिकारी माना जाता है और वे रिपब्लिकन पार्टी के भीतर मौजूद ताकतवर और एक-दूसरे के विरोधी गुटों से निकले हैं. एक तरफ "नियो-कंजर्वेटिव" (neoconservatives) हैं, जो अक्सर दूसरे देशों के मामलों में दखल देने की वकालत करते हैं. दूसरी तरफ रिपब्लिकन वोटर और पॉलिसी एक्सपर्ट हैं, जिनका मानना ​​है कि हाल के कई विदेशी युद्ध बहुत महंगे और गैर-जिम्मेदाराना थे. सोमवार को खत्म हुए रॉयटर्स/इप्सोस पोल के मुताबिक, सिर्फ 52% रिपब्लिकन का मानना ​​है कि मौजूदा टकराव ने अमेरिका को मजबूत स्थिति में पहुंचाया है. इससे पता चलता है कि पार्टी इन गुटों के बीच बंटी हुई है.

इसके बावजूद, रूबियो और वेंस दोनों ने ही ट्रंप की विदेश नीति से जुड़े सभी बड़े फैसलों का समर्थन किया है. इनमें वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो को पकड़ने की कोशिश, फरवरी में ईरान पर हमला और उसके बाद शांति की दिशा में आगे बढ़ने का फैसला शामिल है. हाल के हफ्तों में दोनों ने एक जैसी बातें भी कही हैं; उनका कहना है कि बातचीत के दौरान वे तेहरान के कामों को देखेंगे, न कि उसकी बातों को. गुरुवार को एक रिपोर्टर ने पूछा कि ईरान को लेकर उनके विचार वेंस से कितने अलग हैं, तो रूबियो ने कहा कि वे दोनों ट्रंप के रुख का ही पालन करते हैं. उन्होंने कहा, "यहां हर कोई राष्ट्रपति के साथ है."

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