झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर छात्रों का जो आंदोलन अब तक रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में चल रहा था, वह सोमवार को विधानसभा के करीब तक जा पहुंचा. झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (JPSC) और झारखंड सिविल सर्विस कमीशन (JSSC) की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्र 25 जुलाई से आंदोलन कर रहे हैं.
विधानसभा मार्च से पहले रविवार को सरकार और छात्रों के बीच छठे दौर की बातचीत भी हुई थी, लेकिन इससे भी कोई हल नहीं निकला. तकनीकी और उच्च शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने बातचीत के बाद दावा किया था कि छात्रों की 98 फीसदी मांगों को मान लिया गया है.
हालांकि, परीक्षाओं में गड़बड़ी की CBI जांच की मांग सरकार ने नहीं मानी. छात्र नेता रवींद्र पासवान का कहना था कि जब तक CBI जांच की मांग पूरी नहीं हो जाती, तब तक कोई समझौता नहीं होगा. 2 अगस्त से भूख हड़ताल पर बैठे देवेंद्र नाथ महतो ने सोमवार को कहा कि JPSC और JSSC की परीक्षाओं में गड़बड़ी की CBI जांच हो और दोषियों पर कार्रवाई हो.
CBI जांच की मांग क्यों नहीं मानी?
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रविवार को भी कहा था कि छात्रों को न्याय मिलेगा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी. उन्होंने यह बात तब कही थी जब छात्रों और सरकार के बीच बातचीत चल रही थी. हालांकि, अभी भी छात्रों की मांगें पूरी नहीं हो सकी हैं.
झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार ने रविवार को कहा था कि छात्रों की 98 फीसदी मांगें मान ली हैं, लेकिन JSSC-CGL परीक्षा की CBI जांच की मांग को मानने की स्थिति में नहीं है, क्योंकि यह परीक्षा हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुई थी.

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झारखंड सरकार इन कथित गड़बड़ियों की जांच सीआईडी से करवा रही है. इस मामले में अब तक दर्जनों गिरफ्तारियां भी हो चुकी हैं. सोमवार को ही सीआईडी ने JPSC के पूर्व चेयरमैन एल खियांग्ते को भी गिरफ्तार किया है. हालांकि, छात्र CBI जांच पर अड़े हैं. विधानसभा मार्च निकाल रहे छात्र अपने हाथों में तिरंगा और तख्तियां लिए हुए थे, जिस पर 'JSSC-CGL परीक्षा रद्द करें या CBI जांच कराएं' और 'निष्पक्ष जांच कराएं, सच सामने लाएं' जैसे नारे लिखे थे.
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तो क्या केंद्र खुद नहीं करवा सकती CBI जांच?
झारखंड में जब सारा बवाल मचा हुआ है, तब ऐसे में एक सवाल उठता है क्या केंद्र सरकार खुद से इस मामले की जांच CBI को नहीं सौंप सकती, क्योंकि आखिरकार CBI केंद्र की एजेंसी ही तो है?
तो इसका जवाब है- नहीं. वह इसलिए क्योंकि झारखंड में CBI को कोई भी जांच करने के लिए राज्य सरकार की इजाजत लेना जरूरी है. झारखंड सरकार ने नवंबर 2020 में CBI को जो 'सामान्य सहमति' दे रखी थी, उसे वापस ले लिया था.
दरअसल, CBI को 'दिल्ली पुलिस एस्टैब्लिशमेंट एक्ट 1946' के तहत बनाया गया है. इस कानून की धारा 5 में कहा गया है कि केंद्र सरकार आदेश जारी कर CBI को किसी भी राज्य में जांच के लिए भेज सकती है.

हालांकि, इसी कानून की धारा 6 यह भी साफ करती है कि केंद्र सरकार ने भले ही CBI को जांच का आदेश दिया हो लेकिन राज्य सरकार की सहमति के बिना वह जांच नहीं कर सकती.
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तो क्या झारखंड में CBI नहीं आ सकती?
आमतौर पर राज्य सरकारें CBI को 'सामान्य सहमति' दे देते हैं, लेकिन झारखंड समेत कई राज्यों ने इसे वापस ले लिया है. इसलिए अब CBI को जांच करनी हो या झारखंड के किसी अधिकारी या कर्मचारी पर केस करना हो, उसके लिए राज्य सरकार की सहमति लेनी होगी.

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अब CBI झारखंड में तभी आ सकती है, जब राज्य सरकार उसे आने की इजाजत दे. हालांकि, अगर सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट जांच करने का आदेश देती है तो फिर CBI को आने के लिए राज्य सरकार की इजाजत लेनी जरूरी नहीं होगी.
ये सहमति सिर्फ CBI को ही लेनी पड़ती है. अगर प्रवर्तन निदेशालय (ED) जांच करना चाहती है तो उसे राज्य सरकार की सहमति लेने की जरूरत नहीं है.
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