वाशिंगटन:
अमेरिका ने भारत तथा ईरान से तेल आयात करने वाले 11 अन्य प्रमुख आयातक देशों को नोटिस जारी कर कहा है कि उन पर वित्तीय प्रतिबंध लगाने का फैसला ईरान से तेल आयात की कटौती की दिशा में हो रही प्रगति पर निर्भर होगा।
विदेश विभाग की प्रवक्ता विक्टोरिया नूलैंड से बुधवार को जब पूछा गया कि क्या अमेरिका प्रतिबंधों से मुक्त देशों की सूची से बाहर रखे गए भारत, चीन और अन्य 10 देशों पर कोई निर्णय लेना चाहता है, इस पर उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "मैं समझती हूं कि यह उन देशों की प्रगति पर निर्भर करता है।"
नूलैंड ने कहा, "आपको पता है कि हम कहां है, इसलिए हम चाहते हैं कि ईरानी कच्चे तेल का भारी आयात करने वाले सभी देश अपने आयात में कमी लाएं।"
नूलैंड ने कहा, "हमने जिस तरह की प्रगति जापान और यूरोपीय संघ में देखी है, उसी तरह की प्रगति बाकी देशों में भी देखना चाहते हैं। लेकिन उन सरकारों के साथ बातचीत लगातार जारी है।"
ज्ञात हो कि अमेरिका ने मंगलवार को जापान और 10 यूरोपीय देशों- बेल्जियम, चेक गणराज्य, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, इटली, नीदरलैंड, पोलैंड, स्पेन, और ब्रिटेन को अमेरिकी प्रतिबंधों से बाहर कर दिया, क्योंकि इन देशों ने ईरानी कच्चे तेल की खरीदी में पर्याप्त कटौती की है।
यह पूछे जाने पर कि जापान द्वारा की गई 15 से 22 प्रतिशत की कटौती को मानक मानकर अमेरिका बाकी 12 देशों से भी इतनी ही अपेक्षा रखता है, नूलैंड ने कहा, "जापान में भूकम्प, सुनामी और परमाण विद्युत संयंत्र के क्षतिग्रस्त होने के बाद स्थितियां बहुत गम्भीर थीं। लेकिन इन गम्भीर स्थितियों में भी उन्होंने 15 से 20 प्रतिशत कटौती की है। इसलिए बाकी देशों से उम्मीद की जाती है कि वे जितना हो सके अधिक से अधिक कटौती करें।"
भारत से अमेरिकी अपेक्षाओं के बारे में पूछने पर नूलैंड ने किसी खास देश से अपनी खास बातचीत के बारे में बात करने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा, "लेकिन भारत के साथ हमारी लगातार फलदायी बातचीत हो रही है, और उनके कुछ अपने विकल्प हैं, जिसे वे अपनाने के बारे में सोच रहे हैं।"
विदेश विभाग की प्रवक्ता विक्टोरिया नूलैंड से बुधवार को जब पूछा गया कि क्या अमेरिका प्रतिबंधों से मुक्त देशों की सूची से बाहर रखे गए भारत, चीन और अन्य 10 देशों पर कोई निर्णय लेना चाहता है, इस पर उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "मैं समझती हूं कि यह उन देशों की प्रगति पर निर्भर करता है।"
नूलैंड ने कहा, "आपको पता है कि हम कहां है, इसलिए हम चाहते हैं कि ईरानी कच्चे तेल का भारी आयात करने वाले सभी देश अपने आयात में कमी लाएं।"
नूलैंड ने कहा, "हमने जिस तरह की प्रगति जापान और यूरोपीय संघ में देखी है, उसी तरह की प्रगति बाकी देशों में भी देखना चाहते हैं। लेकिन उन सरकारों के साथ बातचीत लगातार जारी है।"
ज्ञात हो कि अमेरिका ने मंगलवार को जापान और 10 यूरोपीय देशों- बेल्जियम, चेक गणराज्य, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, इटली, नीदरलैंड, पोलैंड, स्पेन, और ब्रिटेन को अमेरिकी प्रतिबंधों से बाहर कर दिया, क्योंकि इन देशों ने ईरानी कच्चे तेल की खरीदी में पर्याप्त कटौती की है।
यह पूछे जाने पर कि जापान द्वारा की गई 15 से 22 प्रतिशत की कटौती को मानक मानकर अमेरिका बाकी 12 देशों से भी इतनी ही अपेक्षा रखता है, नूलैंड ने कहा, "जापान में भूकम्प, सुनामी और परमाण विद्युत संयंत्र के क्षतिग्रस्त होने के बाद स्थितियां बहुत गम्भीर थीं। लेकिन इन गम्भीर स्थितियों में भी उन्होंने 15 से 20 प्रतिशत कटौती की है। इसलिए बाकी देशों से उम्मीद की जाती है कि वे जितना हो सके अधिक से अधिक कटौती करें।"
भारत से अमेरिकी अपेक्षाओं के बारे में पूछने पर नूलैंड ने किसी खास देश से अपनी खास बातचीत के बारे में बात करने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा, "लेकिन भारत के साथ हमारी लगातार फलदायी बातचीत हो रही है, और उनके कुछ अपने विकल्प हैं, जिसे वे अपनाने के बारे में सोच रहे हैं।"
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं