- राष्ट्रपति ट्रंप के आदेश पर वेनेजुएला से एनरिच्ड यूरेनियम छीनकर अमेरिका ले जाया गया है
- अमेरिका के राष्ट्रीय परमाणु सुरक्षा प्रशासन के मुताबिक, इस यूरेनियम का इस्तेमाल बिजली बनाने में किया जाएगा
- अमेरिका 1996 से अब तक दर्जनों देशों से करीब 7,350 किलो यूरेनियम और प्लूटोनियम हटा चुका है
ईरान का परमाणु कार्यक्रम बंद कराने और उसका यूरेनियम छीनने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पूरी जान लगा रखी है. 6 हफ्ते तक जंग भी लड़ी. पूरी दुनिया में खलबली मचा दी. फिर भी अभी तक ईरान को काबू नहीं कर पाए हैं. ट्रंप एक तरफ ईरान से जंग लड़ते रहे, वहीं दूसरी तरफ एक देश का एनरिच्ड यूरेनियम कब्जा करके अपने देश ले गए. ये देश है वेनेजुएला.
मादुरो को पकड़ने के लिए चलाया था कमांडो ऑपरेशन
वेनेजुएला में डोनाल्ड ट्रंप ने इस साल की शुरुआत में एक सीक्रेट ऑपरेशन चलाया था. इसके तहत अमेरिकी कमांडो चुपचाप 3 जनवरी को तड़के करीब 3 बजे वेनेजुएला की राजधानी काराकास में उतरे और सीधे राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के महल में घुस गए. मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़कर न्यूयॉर्क ले गए. इसके बाद वेनेजुएला की कमान डेल्सी रोड्रिग्ज को सौंप दी गई.

छह हफ्ते में ही यूरेनियम अमेरिका ले गए ट्रंप
वेनेजुएला पर धावा बोलने के पीछे ट्रंप का मकसद सिर्फ मादुरो को गिरफ्तार करना ही नहीं था, उनकी नजर वेनेजुएला के एनरिच्ड यूरेनियम पर भी थी. मादुरो की गिरफ्तारी के कुछ महीने बाद, अब ट्रंप ने वेनेजुएला का यूरेनियम चुपचाप निकलवाकर अमेरिका मंगवा लिया है. वैसे तो परमाणु सामग्री को हटाने में कई साल लग जाते हैं, लेकिन ट्रंप को इतनी जल्दी थी कि उन्होंने छह हफ्ते में ही इस मिशन को पूरा करवा दिया.
वेनेजुएला से अमेरिका ऐसे पहुंचा यूरेनियम
- यूरेनियम को वेनेजुएला के रिएक्टर से निकालकर पहले सुरक्षित स्पेंट फ्यूल कंटेनर में रखा गया.
- उसके बाद सड़क के रास्ते से इस कंटनेर को वेनेजुएला के बंदरगाह तक लाया गया.
- बंदरगाह लाने के बाद इस यूरेनियम को खास तौर पर तैयार जहाज में रखवाया गया.
- इस काम में परमाणु सामग्री लाने-ले जाने में एक्सपर्ट यूके के न्यूक्लियर ट्रांसपोर्ट सॉल्यूशंस के एक्सपर्ट्स की मदद ली गई.
- ये जहाज समुद्र में अपना सफर तय करते हुए मई की शुरुआत में अमेरिका पहुंच गया.
- अब यह यूरेनियम साउथ कैरोलिना में अमेरिकी ऊर्जा विभाग की सवाना रिवर फैसिलिटी में रखवा दिया गया है.
मिशन में IAEA और ये देश शामिल
अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी के नेशनल न्यूक्लियर सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन (NNSA) के मुताबिक, वेनेजुएला से एनरिच्ड यूरेनियम को अमेरिका तक लाने के मिशन में अमेरिका, वेनेजुएला, यूनाइटेड किंगडम (यूके) के अलावा अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा संगठन (IAEA) के एक्सपर्ट्स भी शामिल थे.
वेनेजुएला से कितना यूरेनियम ले गए ट्रंप
NNSA के डिफेंस न्यूक्लियर नॉन प्रॉलिफिरेशन (DNN) कार्यालय ने बताया है कि इस मिशन के दौरान वेनेजुएला से करीब 13.5 किलोग्राम यूरेनियम अमेरिका पहुंचाया गया. ये 20 पर्सेंट तक एनरिच्ड यूरेनियम है. वेनेजुएला के आरवी-1 रिएक्टर का फिजिक्स और न्यूक्लियर रिसर्च के लिए दशकों तक इस्तेमाल होता रहा था, लेकिन 1991 में यहां रिसर्च गतिविधियां बंद कर दी गईं. यहीं पर ये यूरेनियम सरप्लस मटीरियल के तौर पर रखा हुआ था.

इस यूरेनियम से अपने यहां बनाएंगे बिजली
अमेरिका इस यूरेनियम का क्या करेगा, इसके बारे में भी NNSA ने बताया है. उसके मुताबिक, इस एनरिच्ड यूरेनियम को अब सवाना रिवर साइट की एच-कैन्यन केमिकल सेपरेशन फैसिलिटी में प्रोसेस किया जाएगा. उसके बाद उसका इस्तेमाल अमेरिका के लिए परमाणु ऊर्जा उत्पादन कार्यक्रमों में किया जाएगा.
हजारों किलो परमाणु सामग्री ले चुका अमेरिका
लेकिन ये पहली बार नहीं है, जब अमेरिका ने किसी देश से परमाणु सामग्री को हटाया हो. इससे पहले भी परमाणु अप्रसार के तहत दर्जनों देशों से यूरेनियम और प्लूटोनियम को निकाला जा चुका है. खुद NNSA ने बताया है कि 1996 से लेकर अब तक अमेरिका दुनिया के कई दर्जन देशों से करीब 7,350 किलो से ज्यादा खतरनाक यूरेनियम और प्लूटोनियम को हटा चुका है. ये कार्रवाई इसलिए की जाती है ताकि कोई देश इस खतरनाक परमाणु सामग्री का गलत इस्तेमाल न कर सके.
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