- अमेरिकी और ईरानी सैनिकों ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर 7 और 8 मई की मध्यरात्रि को कई बार ड्रोन और मिसाइल हमले किए
- दुबई से यमन जा रहा भारतीय ध्वज वाला जहाज अल फैज़ नूर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ड्रोन हमले के बाद डूब गया
- IMO के अनुसार, खाड़ी में पिछले 69 दिनों से लगभग 1600 जहाज और 22,000 नाविक फंसे हुए हैं, जो एक गंभीर संकट है
अमेरिकी और ईरानी सैनिकों ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर 7 और 8 मई की मध्यरात्रि को एक दूसरे पर ड्रोन और मिसाइलों के जरिये कई बार हमला किया. इस हमले के दौरान दुबई से यमन की ओर जा रहा एक भारतीय ध्वज वाला जहाज 'अल फैज़ नूर सुलेमानी' थाइस इसकी चपेट में आ गया और स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ में डूब गया.
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 8 मई को मध्यरात्रि में भारतीय समयानुसार लगभग 2.30 बजे एक ड्रोन ने जहाज पर हमला किया. उस समय 3 अमेरिकी युद्धपोत जलडमरूमध्य को पार कर रहे थे.
ग्लोबल शिपिंग नेटवर्क्स के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ में अब भी करीब 1600 कार्गो जहाज़ फंसे हुए हैं, जिन पर करीब 22,000 नाविक सवार हैं.

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संयुक्त राष्ट्र की संस्था International Maritime Organization (IMO) के Maritime Safety Division के निदेशक डेमियन शेवेलियर ने सीएनएन को दिए एक इंटरव्यू में स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ में पिछले 69 दिनों से फंसे हुए कार्गो जहाज़ों के संकट को एक अभूतपूर्व स्थिति करार दिया है. उनके मुताबिक, खाड़ी में लगभग दस सप्ताह से लगभग 20,000 नाविक फंसे हुए हैं. यह एक मानवीय संकट है. IMO ने पहले कभी ऐसी स्थिति का सामना नहीं किया है.
चुनौती भारत सरकार के सामने भी बड़ी हो रही है. शिपिंग मंत्रालय के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ में फंसे भारतीय ध्वज वाले कार्गो जहाज़ों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है.
28 फरवरी को युद्ध शुरु होने के बाद अब तक 11 कार्गो जहाज़ भारत के लिए गुड्स लेकर होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर चुके हैं. लेकिन स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ में अब भी भारतीय ध्वज वाले 13 जहाज फंसे हुए हैं, और SCI के स्वामित्व वाला एक भारतीय जहाज - एलएनजीसी दिशा भी फंसा हुआ है. इनमें 3 बड़े ऑयल टैंकर हैं और एक बड़ा LPG टैंकर है.
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