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'गोल्ड कार्ड' वीजा... जिसके जरिए अमीरों की अमेरिका में होगी एंट्री, इसके पीछे क्या है ट्रंप की मंशा

Gold Card Visa : रिपोर्ट के मुताबिक ईबी-5 प्रोग्राम के तहत पांच से सात साल में नागरिकता मिलती थी जबकि प्रस्तावित 'गोल्ड कार्ड' वीजा योजाना में नागरिकता तुंरत मिलेगी.

'गोल्ड कार्ड' वीजा... जिसके जरिए अमीरों की अमेरिका में होगी एंट्री, इसके पीछे क्या है ट्रंप की मंशा

5 मिलियन डॉलर खर्च करके अमेरिकी नागरिकता हासिल करें... अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में घोषणा की कि वह जल्द ही दुनियाभर के अमीरों को 'गोल्ड कार्ड' बेचने की योजना बना रहे हैं. हालांकि 'गोल्ड कार्ड' उनके लिए अमेरिकी नागरिकता का रास्ता खोलेगा जो अमेरिका में रोजगार पैदा करने के लिए निवेश करेंगे. इस कार्ड के जरिए उन्हें अमेरिका में बसने का अवसर मिलेगा. ट्रंप के अनुसार, यह 'गोल्ड कार्ड' अमेरिकी ग्रीन कार्ड की तरह होगा, लेकिन इसमें कुछ विशेष लाभ भी होंगे. इसके लिए 5 मिलियन डॉलर का निवेश जरूरी होगा. अब सवाल यह उठता है कि गोल्ड कार्ड है क्या और यह ग्रीन कार्ड से किस प्रकार अलग होगा और  इस योजना के पीछे ट्रंप की क्या मंशा है?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि 'गोल्ड कार्ड' 35 वर्ष पुराने ईबी-5 वीजा प्रोग्राम की जगह लेगा, जो अमेरिकी व्यवसायों में करीब 1 मिलियन डॉलर का निवेश करने वाले विदेशियों के लिए उपलब्ध है. ट्रंप ने कहा कि इस कार्ड को खरीदकर अमीर लोग हमारे देश में आएंगे. वे अमीर और कामयाब होंगे, वे बहुत सारा पैसा खर्च करेंगे, बहुत से लोगों को रोजगार देंगे.

गोल्ड कार्ड के पीछे क्या है ट्रंप की योजना?
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अनुसार इस योजना के तहत यदि 1 मिलियन गोल्ड कार्ड बेचे जाते हैं, तो यह 5 ट्रिलियन डॉलर का राजस्व उत्पन्न कर सकता है, जिसे देश के कर्ज को कम करने में इस्तेमाल किया जा सकता है. ट्रंप के अनुसार, इस योजना से कंपनियां नए कर्मचारियों के लिए वीजा प्राप्त कर सकती हैं और इससे आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा. व्यवसायी अमेरिका में निवेश करेंगे और रोजगार सृजन करेंगे, जिससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.

ईबी-5 और 'गोल्ड कार्ड' में क्या अंतर है?
रिपोर्ट के मुताबिक ईबी-5 प्रोग्राम के तहत पांच से सात साल में नागरिकता मिलती थी जबकि प्रस्तावित 'गोल्ड कार्ड' वीजा योजाना में नागरिकता तुंरत मिलेगी. इसके अलावा, ईबी-5 के तहत आवेदक ऋण ले सकते हैं या 'पूर फंड' का सहारा ले सकते हैं, जबकि 'गोल्ड कार्ड' वीजा के लिए पहले से ही पूरा नकद भुगतान करना पड़ेगा, जिससे यह भारतीयों के एक बड़े हिस्से की पहुंच से बाहर हो जाएगा.

EB-5 वीजा क्या है?

  • यह एक अमेरिकी वीजा प्रोग्राम है जो विदेशी निवेशकों को अमेरिका में स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) प्राप्त करने की अनुमति देता है
  • इस प्रोग्राम के तहत, विदेशी निवेशक अमेरिकी व्यवसायों में निवेश करते हैं.
  • निवेशकों को एक निश्चित राशि का निवेश करना होता है, जो आमतौर पर 1 मिलियन डॉलर या कुछ मामलों में कम होता है.
  • हाई अन एम्प्लॉयमेंट एरिया में 800,000 डॉलर तक का निवेश किया जा सकता है
  • निवेश करने के बाद, निवेशकों और उनके परिवार को ग्रीन कार्ड मिलता है, जो उन्हें अमेरिका में रहने और काम करने की अनुमति देता है इस प्रोग्राम का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना और रोजगार पैदा करना है.
  • यह कार्यक्रम 1990 में शुरू किया गया था.


भारतीयों पर इसका क्या असर होगा?
5 मिलियन डॉलर (43,56,14,500.00 भारतीय रूपये) की कीमत का मतलब है कि केवल भारत के सुपर-रिच और बिजनेस टाइकून ही अमेरिकी नागरिकता पाने के लिए इतना खर्च उठा सकते हैं. इससे उन कुशल पेशेवरों की परेशानी बढ़ने की संभावना है जो पहले से ही ग्रीन कार्ड के लिए लंबे समय तक प्रतीक्षा कर रहे हैं, कुछ मामलों में दशकों से. भारत के बहुत अमीर और बड़े कारोबारी ही अमेरिकी निवास पाने के लिए इस गोल्ड कार्ड वीजा को ले सकते हैं.

क्या है ग्रीन कार्ड

  • अमेरिका में ग्रीन कार्ड प्राप्त करने के लिए ईबी-5 निवेशक वीजा व्यवस्था एक लोकप्रिय विकल्प है.
  • 1.05 मिलियन डॉलर (करीब 8.70 करोड़ रुपये) का निवेश करना होता है.
  •  यह निवेश अमेरिका में बिजनेस शुरू करने के लिए किया जाता है.
  •  निवेशकों को अमेरिका में बिजनेस शुरू करने के लिए कम से कम 10 अमेरिकियों को नौकरी देनी होती है.
  •  यह नौकरी देने की आवश्यकता अमेरिकी अर्थव्यवस्था में योगदान देने के लिए है.
  •  इस वीजा के तहत अमेरिका में पांच से सात वर्ष तक की नागरिकता मिलती है.
  • -यह नागरिकता अमेरिका में रहने और काम करने की अनुमति देती है. 

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