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ट्रंप के पास वीटो का ब्रह्मास्त्र, जानें बेअसर करने के लिए डेमोक्रेट्स को क्या करना होगा

अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स को बहुमत मिलने से विपक्ष को कितनी ताकत मिल गई है? क्या डोनाल्ड ट्रंप अब संसद में पास हर कानून को मानने को मजबूर होंगे?

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अमेरिका का जनादेश आ चुका है. अमेरिका की जनता ने साफ कह दिया है कि राष्ट्रपति के रूप में डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले 2 सालों में जो कुछ किया है, वह उन्हें पसंद नहीं आया. अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी की करारी हार हुई है. मंगलवार को विपक्षी डेमोक्रेट्स ने सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स, दोनों पर कब्जा कर लिया. उन्होंने रिपब्लिकन के गढ़ माने जाने वाले इलाकों में ऐसी बड़ी जीत हासिल की, जो कई सालों में पहली बार हुई है. करोड़ों वोटर्स ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को करारा जवाब दिया.

जिन रूढ़िवादी इलाकों के वोटर्स ने सिर्फ दो साल पहले ट्रंप को दूसरी बार राष्ट्रपति बनाया था, वही अब बड़ी संख्या में डेमोक्रेट्स की तरफ चले गए. इसकी वजह थी ईरान के साथ अलोकप्रिय जंग को लेकर नाराजगी, महंगाई को लेकर चिंता और ट्रंप के देश चलाने के तरीके पर गुस्सा. अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में विपक्ष को बहुमत मिल गया है. ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप ने डेमोक्रेट्स द्वारा पास किए कानूनों पर राष्ट्रपति वीटो लगाने की धमकी भी दोहराई और सोशल मीडिया पर एक लाल टोपी की तस्वीर पोस्ट की जिस पर सिर्फ लिखा था- वीटो.

सवाल है कि डोनाल्ड ट्रंप के पास यह कैसे ब्रह्मास्त्र है और इसे बेअसर करने के लिए डेमोक्रेट्स को क्या करना होगा?

राष्ट्रपति के पास कैसी वीटो पावर है?

अमेरिका में कानून कांग्रेस यानी संसद बनाती है और सरकार (ट्रंप प्रशासन अभी) उसे लागू करती है. भारत के विपरीत अमेरिका में सरकार संसद का हिस्सा नहीं होती. संसद जो भी कानून बनाती है, राष्ट्रपति उस पर वीटो लगाकर उसे लागू करने से इनकार कर सकता है. वीटो पावर मतलब राष्ट्रपति के पास वो ताकत है जिससे वो संसद द्वारा पास किए गए किसी भी कानून को रोक सकता है यानी साइन करने से मना कर सकता है.

अमेरिकी संविधान के अनुच्छेद I, धारा 7 के तहत, हाउस और सीनेट से पारित होने वाला हर विधेयक राष्ट्रपति के पास जाता है. यदि वे इसे मंजूरी देते हैं, तो वे इस पर साइन करते हैं. यदि उन्हें कोई आपत्ति होती है, तो उन्हें इसे “अपनी आपत्तियों के साथ” उस सदन में वापस भेजना होता है जहां से यह शुरू हुआ था. संसद या तो उसमें सुधार करके वापस राष्ट्रपति के पास भेजे या फिर एक तरीका है, जिससे राष्ट्रपति को उसी विधेयक पर साइन करने को मजबूर किया जा सकता है.

राष्ट्रपति के वीटो पावर को कैसे बेअसर कर सकती है संसद?

संविधान के अनुसार, वीटो किए गए किसी बिल को कानून तभी बनाया जा सकता है, जब हाउस के दो-तिहाई सदस्य और सीनेट के दो-तिहाई सदस्य उसे दोबारा पास करने के लिए वोट दें. अगर सभी सदस्य वोट देते हैं, तो इसका मतलब है कि 435 रिप्रेजेंटेटिव्स में से 290 और 100 सीनेटरों में से 67 सदस्यों का समर्थन चाहिए होगा. इस बार भले डेमोक्रेट्स ने शानदार प्रदर्शन किया है लेकिन इसके बावजूद उनके पास दोनों सदन में दो-तिहाई बहुमत नहीं होगा. यानी अगर उन्हें ट्रंप के वीटो पावर को बेअसर करना है तो डेमोक्रेट्स को दोनों सदनों में रिपब्लिकन पार्टी के एक बड़े गुट की जरूरत होगी, जो ट्रंप के खिलाफ जाकर विपक्ष का साथ दें.

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