अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ खेला हो गया है. मिडटर्म चुनावों में डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को करारी हार मिली है. मंगलवार को डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमेरिका की संसद के दोनों सदनों यानी सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स पर कब्जा कर लिया. यह नतीजा डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ पूरे देश में लोगों की नाराजगी को दिखाता है. वैसे एक सवाल आपके मन में आ सकता है कि क्या संसद में बहुमत हारने के बाद डोनाल्ड ट्रंप की सरकार चली जाएगी, क्योंकि भारत में तो ऐसा ही होता है कि जिसका लोकसभा में बहुमत होगा, उसी की सरकार होती है. इस सवाल के जवाब के लिए आपको मिडटर्म चुनाव को समझना होगा और साथ ही यह भी जानना होगा कि अमेरिका में सरकार और संसद के बीच क्या संबंध है.
क्या डोनाल्ड ट्रंप की सरकार जा रही है?
भारत में सरकार कानून बनाने वाली संसद का भी हिस्सा है और उस कानून को लागू करने वाली शक्ति भी. जिसका लोकसभा में बहुमत होता है, उसकी ही सरकार होती है. लेकिन अमेरिका में कार्यपालिका और विधायिका के बीच स्पष्ट अंतर है. वहां राष्ट्रपति का चुनाव अलग होता है और संसद के लिए चुनाव अलग. अगर संसद में राष्ट्रपति की पार्टी का बहुमत न भी हो तो उसकी सरकार (प्रशासन) बनी रहती है. संसद कानून बनाएगी और राष्ट्रपति अपनी शक्तियों के साथ उसे लागू करेगा.
मिडटर्म चुनाव क्या होता है?
अभी अमेरिका में मिडटर्म चुनाव हुआ है. इसमें अमेरिकी नागरिकों ने कांग्रेस (अमेरिका संसद) के सदस्यों को चुना है. यानी यह चुनाव सांसदों का है. अमेरिका की संसद में दो सदन हैं- हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट. अमेरिका में संसद के लिए चुनाव हर दो साल में होते हैं, और जब ये राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के बीच में होते हैं, तो इन्हें 'मिडटर्म' कहा जाता है.
कांग्रेस के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के सभी 435 सदस्यों का चुनाव हुआ है. भारत में लोकसभा सांसदों का कार्यकाल 5 सालों का होता है लेकिन अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के सांसदों का कार्यकाल दो साल का होता है. दूसरी तरफ सीनेट (उच्च सदन) की 100 में से 35 सीटों के लिए भी चुनाव हुए हैं. अमेरिका में सीनेटरों का कार्यकाल छह साल का होता है.
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संसद में बहुमत जाने का ट्रंप सरकार पर क्या असर होगा?
डेमोक्रेट्स की इस बड़ी जीत से विपक्ष को कई ताकतें मिल गई हैं. अब वे कानून बनने से रोक सकते हैं, ट्रंप सरकार के कामकाज की बड़े स्तर पर जांच शुरू कर सकते हैं और न्यायपालिका के साथ-साथ सरकार के बड़े पदों पर ट्रंप की नियुक्तियों को रोक सकते हैं.
हाउस की ताकतवर ओवरसाइट कमेटी का नेतृत्व करने जा रहे रॉबर्ट गार्सिया ने सोशल मीडिया पर रिपब्लिकन को चेतावनी दी कि वकील कर लो. हाउस में डेमोक्रेट नेता हकीम जेफरीज ने कहा कि ट्रंप का MAGA आंदोलन 'समंदर से समंदर तक भाग रहा है'.
नई संसद जनवरी में शुरू होगी, तब जेफरीज हाउस के पहले अश्वेत स्पीकर बन सकते हैं. दूसरी तरफ ट्रंप ने सोशल मीडिया पर यह भी कहा कि अगर वे खुद चुनाव लड़ रहे होते तो रिपब्लिकन भारी बहुमत से जीतते, जबकि पूरे प्रचार के दौरान वे समर्थकों से बार-बार कहते रहे थे कि ऐसा मानो मैं ही बैलेट पर हूं. उन्होंने डेमोक्रेट्स के द्वारा पास किए कानूनों पर राष्ट्रपति वीटो लगाने की धमकी भी दोहराई और सोशल मीडिया पर एक लाल टोपी की तस्वीर पोस्ट की जिस पर सिर्फ लिखा था- वीटो.
चुनाव के नतीजों से पता चलता है कि अमेरिका के लोग महंगाई, टैरिफ और ईरान के खिलाफ ट्रंप की जंग से काफी नाराज हैं. इस जंग के कारण पेट्रोल-डीजल और ईंधन की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं. इससे पहले से ही अलोकप्रिय राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ लोगों की नाराजगी और बढ़ गई है.
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