- अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि नाटो और अधिकांश सहयोगी देशों ने होर्मुज की सुरक्षा में मदद से मना किया
- ट्रंप के अनुसार ईरान की सैन्य क्षमता ध्वस्त हो चुकी है और अमेरिका को अब किसी भी सहयोगी की आवश्यकता नहीं है
- ईरान के खाड़ी देशों पर हमलों और जलडमरूमध्य नियंत्रण से वैश्विक ऊर्जा संकट और विश्व अर्थव्यवस्था अस्थिर हुई है
US Israel War Against Iran: ईरान के साथ युद्ध के तीसरे सप्ताह में प्रवेश करने के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (NATO) और अधिकतर अन्य सहयोगी देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा में मदद करने के उनके आह्वान को खारिज कर दिया है. ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता “ध्वस्त” हो चुकी है और उन्हें अब नाटो देशों या किसी अन्य से सहायता की आवश्यकता नहीं है.
पिछले सप्ताह ट्रंप ने यूरोपीय देशों और अन्य देशों से मदद का आह्वान किया था ताकि अहम समुद्री मार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य' की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल' पर अपने पोस्ट में कहा, “हमारे अधिकतर नाटो सहयोगियों ने अमेरिका को सूचित किया है कि वे पश्चिम एशिया में ईरान के आतंकवादी शासन के खिलाफ हमारे सैन्य अभियान में शामिल नहीं होना चाहते, जबकि लगभग हर देश इस बात से सहमत है कि ईरान को किसी भी सूरत में परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.”
उन्होंने यह भी कहा कि ऑस्ट्रेलिया, जापान और दक्षिण कोरिया ने भी मदद के उनके आह्वान को ठुकरा दिया है.
ट्रंप ने कहा, “खुशकिस्मती से हमने ईरान की सेना को पूरी तरह कमजोर कर दिया है. उनकी नौसेना खत्म हो गई है, वायुसेना खत्म हो गई है, उनकी विमान रोधी और रडार व्यवस्था भी खत्म हो चुकी है. और शायद सबसे अहम बात यह है कि लगभग हर स्तर के उनके नेता अब नहीं रहे, इसलिए वे फिर कभी हमें, हमारे पश्चिम एशिया के सहयोगियों या दुनिया को धमकी नहीं दे पाएंगे.”
उन्होंने कहा कि हाल की सैन्य सफलताओं को देखते हुए अमेरिका को अब नाटो देशों की मदद की न आवश्यकता है और न ही इच्छा, और वह पहले भी ऐसे समर्थन पर निर्भर नहीं रहा है. ट्रंप ने कहा, “दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश का राष्ट्रपति होने के नाते मैं कहता हूं कि हमें किसी की मदद की जरूरत नहीं है.”
अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला शुरू किया था तथा जवाब में ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों वाले कुछ खाड़ी देशों पर हमले किए और अमेरिका व इजराइल पर दबाव बनाने के लिए रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य को बाधित कर दिया. हालांकि, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि तेहरान के नजरिए से जलडमरूमध्य “खुला” है और यह केवल ईरान के दुश्मनों तथा उनके सहयोगियों के लिए बंद है.
भारतीय ध्वज वाला दूसरा LPG टैंकर भारत पहुंचा
इस बीच, युद्धग्रस्त क्षेत्र से सुरक्षित निकलकर भारतीय ध्वज वाला दूसरा एलपीजी टैंकर ‘नंदा देवी' भारत पहुंच गया. सोमवार को पहला जहाज ‘शिवालिक' गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पहुंचा था. फिलहाल 22 भारतीय पोत जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में और दो पूर्वी हिस्से में मौजूद हैं. अधिकारियों ने कहा कि शेष जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए भारतीय अधिकारी क्षेत्र के सभी संबंधित पक्षों के संपर्क में हैं.
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं