- जेडी वेंस की मुलाकात पाकिस्तानी-नॉर्वेजियन मूल के बिजनेसमैन उमर फारूक जहूर से इस्लामाबाद में हुई थी
- उमर फारूक जहूर पर नॉर्वे में 6 मिलियन डॉलर की धोखाधड़ी का आरोप है जो लगभग 60 करोड़ रुपये के बराबर है
- जहूर को पाकिस्तान का हिलाल-ए-इम्तियाज सम्मान मिला और वे विदेशी निवेश लाने में मदद कर चुके हैं
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस जब ईरान के साथ शांति वार्ता के पहले दौर के लिए 11 अप्रैल को इस्लामाबाद पहुंचे थे, तब उन्हें पाकिस्तानी-नॉर्वेजियन मूल के बिजनेसमैन उमर फारूक जहूर के साथ बातचीत करते देखा गया था. एक वीडियो में दिखा कि जेडी वेंस की मुलाकात अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ ने जहूर से कराई. लेकिन अब उसी उमर फआरूक जहूर के बारें में एक बड़ा खुलासा हुआ है. नॉर्वे के अखबार वेर्देन्स गैंग के अनुसार, जहूर पर 6 मिलियन डॉलर की धोखाधड़ी का आरोप है. भारतीय करेंसी में यह रकम 60 करोड़ रुपए के आसपास बैठती है.
उमर फारूक जहूर कौन है?
1975 में नॉर्वे के ओस्लो में पाकिस्तान के सियालकोट से आए माता-पिता के घर जन्मे जहूर खुद को “मशहूर सीरियल एंटरप्रेन्योर, सफल निवेशक और दुबई के समाजसेवी” बताते हैं. उन्होंने 18 साल की उम्र में एक ट्रैवल कंपनी शुरू की, जिसे वे सफल बताते हैं, और इससे उनका बिजनेस और निवेश में रुचि बढ़ी. 2003 में, ओस्लो की एक पारिवारिक ट्रैवल एजेंसी से एयरलाइन टिकट गबन करने के मामले में उन्हें एक साल की सजा मिली. वे सजा के लिए कोर्ट में पेश नहीं हुए और जल्द ही नॉर्वे छोड़ दिया, और 10 साल बाद यह सजा खत्म हो गई. बाद में स्विट्जरलैंड जाने के बाद, उन पर 20 मिलियन डॉलर से ज्यादा की बड़ी वित्तीय धोखाधड़ी में शामिल होने का आरोप लगा, जिसमें ज्यूरिख में नकली बैंक बनाने के दावे भी शामिल थे.
2010 में नॉर्डिया बैंक से जुड़े एक बड़े धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग केस में नॉर्वे की पुलिस उन्हें ढूंढ रही है. अधिकारियों का कहना है कि 60 मिलियन नॉर्वेजियन क्रोनर (लगभग 60 करोड़ रुपये) की रकम निकाल ली गई, जिसे देश के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक माना जाता है. नॉर्वे की सुप्रीम कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी का आदेश दिया है, और नॉर्वे कई बार उन्हें पकड़कर वापस लाने की कोशिश कर चुका है. हालांकि, जहूर ने सभी आरोपों से इनकार किया है.
2025 में, उन्हें पाकिस्तान का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान “हिलाल-ए-इम्तियाज” दिया गया, क्योंकि उन्होंने देश में 700 मिलियन डॉलर का विदेशी निवेश लाने में मदद की. उन्होंने खुद को एक भ्रष्टाचार मामले में व्हिसलब्लोअर भी बताया, जिससे कथित तौर पर पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को जेल हुई.
उन्हें IIMSAM द्वारा नियुक्त किया गया, जो संयुक्त राष्ट्र के साथ काम करता है. उनका काम स्पिरुलिना (पोषक तत्वों से भरपूर खाना) को बढ़ावा देना था, ताकि खासकर गरीब देशों में कुपोषण से लड़ने में मदद मिले. वे लाइबेरिया के “एंबेसडर-एट-लार्ज” भी रहे, जहां उनका काम मुख्य रूप से आर्थिक कूटनीति पर केंद्रित था.
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