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परमाणु हथियार से होर्मुज तक, ट्रंप और ईरान के 'इस्लामाबाद समझौते' में क्या लिखा? मुहर का इंतजार

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान, दोनों देश बहुत मजबूत समझौता ज्ञापन यानी MoU पर सहमत हो गए हैं. वहीं ईरान का कहना है कि अभी कोई समझौता फाइनल नहीं हुआ है.

परमाणु हथियार से होर्मुज तक, ट्रंप और ईरान के 'इस्लामाबाद समझौते' में क्या लिखा? मुहर का इंतजार
US Iran 'Islamabad Agreement': अमेरिका और ईरान में क्या आखिरकार डील होने वाली है (फोटो- NDTV)

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि इसी हफ्ते यानी अगले दो दिन के अंदर ईरान के साथ डील होने ही वाली है. ट्रंप ने ईरान पर लगातार तीसरे दिन हमले की अपनी प्लानिंग को रद्द करते हुए साफ-साफ कह दिया है कि ईरान के साथ जंग आज खत्म हो गई है. उन्होंने कहा है कि दोनों देश एक बहुत मजबूत समझौता ज्ञापन यानी मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर सहमत हो गए हैं. दूसरी तरफ ईरान का कहना है कि अभी कोई समझौते फाइनल नहीं हुआ है. 

ऐसे में एक रिपोर्ट एक्सियोस ने वार्ता में शामिल एक सूत्र के हवाले से छापी है और बताया है कि MoU के तहत सीजफायर को 60 दिनों के लिए बढ़ाया जाएगा, जिसमें लेबनान भी शामिल होगा. यानी लेबनान में भी कोई हमला नहीं होगा. इन 60 दिनों में परमाणु मुद्दे पर अमेरिका, ईरान के बीच बातचीत की जाएगी. इस डॉक्यूमेंट में ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम (शुद्ध यूरेनियम, जिससे परमाणु हथियार बन सकता है) के भंडार से जुड़े मुद्दे को हल करने की रूपरेखा दी गई है. चलिए बताते हैं कि परमाणु मुद्दे से लेकर होर्मुज और ईरान की जब्त की गई संपत्ति पर कौन सी डील होने का दावा इस रिपोर्ट में किया गया है.

परमाणु कार्यक्रम

एक्सियोस की इस रिपोर्ट के अनुसार इस डील में ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर कुछ वादे करेगा. सबसे बड़ा वादा यह होगा कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करेगा और अपने एनरिच्ड यूरेनियम को लेकर चल रहे विवाद का समाधान करेगा. इस रिपोर्ट में लिखा है कि एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि डोनाल्ड ट्रंप इस बात पर सहमत हुए हैं कि इसका एक हल यह हो सकता है कि ईरान के बहुत अधिक एनरिच किए गए यूरेनियम को देश के अंदर ही कम एनरिच वाले स्तर पर बदला जाए, और यह काम संयुक्त राष्ट्र (UN) की परमाणु एजेंसी की निगरानी में हो.

हालांकि ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े किसी भी कदम पर तभी अमल होगा जब दूसरा समझौता हो जाएगा. रिपोर्ट के अनुसार एक सूत्र ने दावा किया कि MoU में सभी परमाणु मुद्दों का विस्तार से जिक्र किया गया है और यह अमेरिका की सभी मांगों को पूरा करता है.

होर्मुज जलडमरूमध्य

MoU में कहा गया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को डील पर साइन होते ही तुरंत खोला जाएगा और जहाजों से कोई टोल नहीं लिया जाएगा. साथ ही, 30 दिनों के भीतर युद्ध से पहले जितना समुद्री व्यापार होता था, उसे फिर से बहाल किया जाएगा. अमेरिका भी अपनी नाकेबंदी हटा देगा. एक्सियोर की पहले की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी अधिकारियों ने पहले बताया था कि होर्मुज खुलने के बाद ईरान को 60 दिनों के लिए अस्थायी तौर पर प्रतिबंध से छूट दी जाएगी, ताकि वह तेल बेच सके. इससे तेहरान की खूब कमाई होगी.

रिपोर्ट के अनुसार अगर ईरान शुरुआती समझौते का पालन करता है और आगे की बातचीत में अच्छी नीयत (गुड फेथ) दिखाता है, तो उसे मिलने वाली प्रतिबंध राहत और बढ़ सकती है.

ईरान की जब्त हुई संपत्ति

एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार यह स्पष्ट नहीं है कि इस MoU में विदेशों में जब्त किए गए ईरान की अरबों डॉलर की संपत्ति (फ्रोजेन एसेट) के बारे में विस्तार से कोई जानकारी दी गई है या नहीं. ईरान का कहना है कि किसी भी शुरुआती डील पर साइन होते ही उसे तुरंत कुछ संपत्ति मिलनी चाहिए. वहीं, अमेरिका का कहना है कि यह पैसा किस्तों में जारी किया जाएगा, और यह इस बात पर निर्भर करेगा कि ईरान समझौते का कितना पालन करता है. रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप सरकार से बाहर के एक सूत्र ने चिंता जताई कि फ्रोजेन एसेट का मुद्दा कहीं किसी गुप्त साइड डील में तो शामिल नहीं है.

समझौते का नाम क्या होगा?

यह समझौता कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता में तैयार किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार अगर दोनों देश आखिरकार इस पर हस्ताक्षर करने के लिए सहमत हो जाते हैं, तो इस समझौते का नाम “इस्लामाबाद समझौता” रखा जाएगा.

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