विज्ञापन
This Article is From Jul 30, 2011

धोखाधड़ी मामले में अमेरिकी विश्वविद्यालय शक के घेरे में

वाशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका का एक और शैक्षणिक संस्थान धोखाधड़ी के मामले में आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन विभाग के निशाने पर है। विभाग के दर्जनों एजेंट इसी अंदेशे के तहत उत्तरी वर्जिनिया विश्वविद्यालय के दफ्तरों पर छापा मार रहे हैं। इस विश्वविद्यालय में सकड़ों भारतीय छात्र पढ़ते हैं। इस घटना के बाद नई दिल्ली में स्थित अमेरिकी दूतावास ने नामांकन कराने से पहले अमेरिकी शैक्षणिक संस्थानों के बारे में विस्तृत जानकारी हासिल करने की सलाह दी है। वाशिंगटन के बाहरी इलाके अनानडेल में स्थित यह विश्वविद्यालय गैरमान्यताप्राप्त और धन कमाने के लिए स्थापित निजी विश्वविद्यालय है। यह खुद को एशियाई मूल के छात्रों के लिए खुद को अमेरिका का सबसे अच्छा विश्वविद्यालय होने का दावा करता है। इस विश्वविद्यालय में अभी 2400 छात्र पंजीकृत हैं। इनमें से 90 फीसदी भारत के आंध्र प्रदेश राज्य से हैं। ये छात्र उत्तरी वर्जिनिया प्रांत के तीन स्थानों पर पंजीकृत हैं। एजेंटों ने इस मामले में अपनी जांच के अंतर्गत गुरुवार को विश्वविद्यालय की इमारतों में रखे गए दो बक्सों को खोला। यद्यपि, केलिफोर्निया के ट्राई वैली विश्वविद्यालय में हुए मामले से उलट अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि भारतीय छात्रों के हितों की रक्षा की जाएगी। ट्राई वैली विश्वविद्यालय मामले से अनुभव लेकर जांच का केंद्र छात्रों को नहीं बल्कि विश्वविद्यालय को बनाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि वे इस बात को लेकर प्रयास कर रहे हैं कि इस मामले में कोई गिरफ्तारी न हो और न ही किसी छात्र को इलेक्ट्रॉनिक मॉनिटरिंग सिस्टम पहनाया जाए। अधिकारियों ने यह भी कहा है कि उत्तरी वर्जिनिया विश्वविद्याल को तत्काल बंद नहीं किया जाएगा क्योंकि इसे पूरे मामले पर प्रकाश डालने के लिए महीनों का समय दिया गया है। इस विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों के पास तीन रास्ते हैं-या तो वे इस विश्वविद्याल में पढ़ाई जारी रख सकते हैं, या तो ये किसी अन्य विश्वविद्याल में स्थानांतरण ले सकते हैं या फिर स्वदेश लौट सकते हैं। विश्वविद्यालय के दफ्तरों के दरवाजों पर लगाई गई नोटिस के मुताबिक इसमें फिलहाल विदेशी छात्रों के नामांकन की प्रक्रिया कुछ समय के लिए बंद कर दी गई है। विश्वविद्यालय को आने वाले वक्त में किसी प्रोग्राम में शामिल होने के लिए मना कर दिया गया है लेकिन इसके लिए कोई विशेष कारण नहीं बताया गया है। इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है लेकिन विश्वविद्यालय के खिलाफ इस अंदेशे के साथ जांच जारी है कि उसने कहीं छात्रों के वीजा को लेकर संघीय नियमों का उल्लंघन तो नहीं किया है। इधर, नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास ने अमेरिका में पढ़ाई की इच्छा रखने वाले छात्रों से कहा है कि वे नामांकन कराने से पहले अमेरिकी शैक्षणिक संस्थानों के बारे में विस्तृत जानकारी हासिल कर लें। दूतावास द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है, "अमेरिका सरकार उन सभी छात्रों से अपील करती है कि वे अमेरिका के किसी भी शैक्षणिक संस्थान में दाखिला लेने से पहले उसके बारे में पूरी जानकारी हासिल कर लें।" "छात्रों को यह जानकारी खासतौर पर हासिल करनी होगी कि छात्र वीजा के तहत वे अमेरिका में कौन सा काम कर सकते हैं और कौन सा नहीं कर सकते। सभी छात्र इस बात को गांठ बांध लें कि अमेरिकी विश्वविद्यालों हाजिरी एक बहुत अहम चीज है और अगर कोई छात्र कोर्स के दौरान काम करता या काम के दौरान कोर्स करता पाया गया तो उसका सम्बंधित वीजा रद्द कर दिया जाएगा।" दूतावास के मुताबिक अमेरिका में पढ़ाई की इच्छा रखने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। बीते वर्ष की तुलना में इस वर्ष 20 फीसदी अधिक छात्रों ने वीजा के लिए आवेदन किया है। अमेरिका में अभी 100,000 से अधिक छात्र पढ़ाई कर रहे हैं।

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
धोखाधड़ी, अमेरिकी, विश्वविद्यालय, शक