Offbeat News: क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि इस धरती पर एक ऐसा जीव भी रह चुका है, जो कभी बड़ा ही नहीं होता था? वो हमेशा अपने 'बचपन' के रूप में ही रहता था और उसी रूप में रहते-रहते 'बूढ़ा' होकर मर जाता था. सुनने में यह नामुमकिन सा लगता है, लेकिन वैज्ञानिकों ने एक ऐसे ही जीव के कंकाल को खोज निकाला है.
खोज के 3 साल बाद हुई टेस्टिंग
हैरानी की बात यह है कि इस जीव के अवशेष पिछले करीब 3 दशक से मेक्सिको की मशहूर यूनिवर्सिटी नेशनल ऑटोनॉमस यूनिवर्सिटी ऑफ मेक्सिको (UNAM) के अंतर्गत आने वाले FES Zaragoza के पैलियोबॉटनी रिसर्च ग्रुप की लैब में रखे थे. इनकी खोज के वक्त इन्हें सामान्य छिपकली या सालामैंडर प्रजाति का मान लिया गया था और इस पर कोई खास रिसर्च नहीं हुई थी.
सीटी स्कैन की रिपोर्ट से हुआ खुलासा
जब हाल ही में साइंटिस्टों की एक टीम ने इन पुराने कंकालों की दोबारा जांच करने का फैसला किया, तब इस रेयर क्रिएचर का पता चला. सीटी स्कैन की रिपोर्ट देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई, क्योंकि यह कोई मामूली जीव नहीं, बल्कि लाखों साल पुरानी एक रहस्यमयी प्रजाति थी, जिसे वैज्ञानिकों ने आधिकारिक तौर पर Ambystoma quetzalcoatli नाम दिया है.
सिर में लंबा छेद, 17 रीड़ की हड्डियां
जब जॉर्ज हेरेरा की टीम ने इस जीव के कंकाल का 3D स्ट्रक्चर तैयार किया और इसकी तुलना आज के समय के 13 अलग-अलग जीवित सालामैंडर और एक्सोलोटल प्रजातियों (जैसे सोचीमिल्को एक्सोलोटल और टाइगर सालामैंडर) से की, तो उन्हें कई अजीबोगरीब अंतर दिखाई दिए. इस जीव के सिर के ठीक ऊपर एक अजीब सा लंबा छेद (Elongated Opening) था. इसके अलावा इसके तालू (Palate) की बनावट और खोपड़ी की अन्य हड्डियों का ढांचा आज के जीवों से बिल्कुल अलग था.
इतना ही नहीं, आज के समय के जो आधुनिक एक्सोलोटल जीव होते हैं, उनके शरीर में केवल 16 या उससे कम रीढ़ की हड्डियां (Trunk Vertebrae) होती हैं. लेकिन इस प्राचीन जीव के शरीर में पूरे 17 रीढ़ की हड्डियां थीं, जो इसे विज्ञान की दुनिया में बिल्कुल अनोखा और नया साबित करती हैं.
मीठे पानी की झील में रहता था यह जीव
वैज्ञानिकों ने रिसर्च में उस जगह का भी पूरा इतिहास निकाला है जहां यह जीव रहता था. यह जीवाश्म मेक्सिको के हिदालगो (Hidalgo) प्रांत के अटोतोनिलको एल ग्रांडे (Atotonilco el Grande) नाम के इलाके से बरामद हुआ था. लाखों साल पहले (प्लीओसीन युग में) यह इलाका ऐसा सूखा नहीं था जैसा आज है. लाखों साल पहले वहां बहने वाली अमाजैक नदी (Amajac River) का रास्ता अचानक ब्लॉक हो गया था, जिसकी वजह से वहां 85 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैला मीठे पानी की झीलों का एक बहुत बड़ा नेटवर्क बन गया था. इस शांत, ठंडे और नमी वाले माहौल में यह जीव पेड़-पौधों, घोंघों (Gastropods), झींगुरों (Beetles) और मछलियों के बीच मजे से रहता था.
बड़े हुए बिना बूढ़ा कैसे हो जाता था?
अब आते हैं सबसे बड़े सवाल पर कि यह जीव बिना बड़ा हुए बूढ़ा कैसे हो जाता था? वैज्ञानिकों ने प्रतिष्ठित जर्नल Palaeontologia Electronica में छपी अपनी रिपोर्ट में बताया कि यह जीव नियोटेनी (Neoteny) नाम की एक बेहद दुर्लभ जैविक खूबी से लैस था. आसान शब्दों में कहें तो, जब यह जीव अंडा फोड़कर बाहर आता था, तो इसके बाहरी गलफड़े (Gills) होते थे ताकि यह पानी के अंदर सांस ले सके (जैसे मेंढक का बच्चा या टैडपोल होता है). सामान्य तौर पर अन्य उभयचर (Amphibians) जीवों को बड़े होने के बाद जमीन पर रहने के लिए अपने शरीर को पूरी तरह बदलना पड़ता है (Metamorphosis), जिससे उनके गलफड़े गायब हो जाते हैं और फेफड़े विकसित होते हैं.
लेकिन इस अजीब जीव के साथ ऐसा नहीं होता था. चूंकि वह 85 वर्ग किलोमीटर की झील का वातावरण बेहद शांत और सुरक्षित था, इसलिए इस जीव को खाना ढूंढने या बचने के लिए कभी पानी से बाहर जमीन पर आने की जरूरत ही महसूस नहीं हुई. नतीजा यह हुआ कि इसके शरीर ने कभी अपना रूप बदला ही नहीं. यह वयस्क होने, शारीरिक रूप से परिपक्व होने और बच्चे पैदा करने के बाद भी दिखने में बिल्कुल 'बच्चा' ही रहता था और पानी के अंदर ही इसी रूप में बूढ़ा हो जाता था.
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