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अमेरिका के 'दंगाईयों' को मुआवजा बांटने निकले ट्रंप को झटका क्यों और कैसे लगा?

अमेरिका के न्याय विभाग ने कहा है कि वह कोर्ट के उस आदेश को मानेगा जिसमें डोनाल्ड ट्रंप के 'एंटी-वेपनाइजेशन फंड' पर रोक लगा दी गई थी. यहां समझिए यह स्पेशल फंड क्या है और इसपर इतना विवाद क्यों हो रहा है.

अमेरिका के 'दंगाईयों' को मुआवजा बांटने निकले ट्रंप को झटका क्यों और कैसे लगा?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कोर्ट ने झटका दिया था, अब वह फैसला मानने को तैयार हो गए हैं

Donald Trump 'anti-weaponisation' fund Explained: अमेरिकी न्याय विभाग ने सोमवार, 1 जून को कहा कि वह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'एंटी-वेपनाइजेशन फंड' (हथियार-विरोधी फंड) को फ्रीज करने वाले संघीय अदालत के आदेश का पालन करेगा, भले ही वह इस फैसले से पूरी तरह असहमत हो. इसी बीच, सीनेट में विपक्षी डेमोक्रेट सांसदों ने भी इस विवादित 1.8 अरब डॉलर की योजना को हमेशा के लिए रोकने के लिए एक नया कानून लाने की कोशिश शुरू कर दी है. सवाल है कि ट्रंप की यह योजना क्यों थी और इसपर इतना बवाल क्यों मचा है?

'एंटी-वेपनाइजेशन फंड' क्या है?

डोनाल्ड ट्रंप सरकार 'एंटी-वेपनाइजेशन फंड' लेकर आई ताकि उन व्यक्तियों को मुआवजा या औपचारिक माफी दी जा सके, जो यह दावा करते हैं कि पिछली सरकारों (विशेष रूप से जो बाइडेन प्रशासन) के दौरान सरकारी एजेंसियों का इस्तेमाल उनके खिलाफ हथियार (हथियारकरण) के रूप में किया गया था. आलोचकों का दावा है कि ट्रंप इसके जरिए उन लोगों को फायदा पहुंचाना चाहते हैं जो 6 जनवरी को कैपिटल हिल पर पुलिस पर हमले में शामिल थे. यह दंगाई ट्रंप के सपोर्टर थे और 2020 में ट्रंप की हार से नाराज थे.

अब न्याय विभाग ने क्या कहा?

सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म 'एक्‍स' पर जारी एक बयान में न्याय विभाग ने कहा कि यह 'एंटी-वेपनाइजेशन फंड' इसलिए बनाया गया था, ताकि उन लोगों को मुआवजा दिया जा सके जिन्हें 'गलत तरीके से, नुकसान पहुंचाया गया या निशाना बनाया गया,' चाहे वे डेमोक्रेट हों, रिपब्लिकन हों, स्वतंत्र हों या किसी और विचारधारा के हों. बयान में कहा गया, “न्याय विभाग इस फैसले से पूरी तरह सहमत नहीं है जो कि यूएस डिस्ट्रिक्ट कोर्ट की पूर्वी वर्जीनिया शाखा के जज ने दिया है, लेकिन विभाग अदालत के आदेश का पालन करेगा.”

दरअसल अमेरिकी जिला न्यायाधीश लियोनी ब्रिंकमा ने अस्थायी रूप से सरकार को इस फंड से जुड़ी किसी भी आगे की कार्रवाई से रोक दिया था. अदालत ने आदेश दिया कि सरकार सुनवाई (12 जून) तक इस फंड में पैसे ट्रांसफर नहीं कर सकती, न ही दावों पर विचार कर सकती है और न ही किसी को भुगतान कर सकती है.

विपक्ष भी तैयारी में

इसी बीच, सीनेट में डेमोक्रेटिक प्रतिनिधि एलिसा स्लॉटकिन (मिशिगन), एडम शिफ (कैलिफोर्निया) और मार्क केली (एरिजोना) ने मिलकर 'ड्रेन द स्लश फंड एक्ट' नाम का एक विधेयक पेश किया है. इसका मकसद इस फंड को खत्म करना है और यह सुनिश्चित करना है कि टैक्सपेयर्स का पैसा राष्ट्रपति, उनके सहयोगियों, दोषी अपराधियों या 6 जनवरी 2021 को कैपिटल हमले में शामिल लोगों को भुगतान के लिए इस्तेमाल न हो.

एलिसा स्लॉटकिन ने कहा, “ट्रंप ने सरकारी सिस्टम का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए किया है चाहे वो उनके परिवार की क्रिप्टोकरेंसी हो, स्टॉक ट्रेडिंग में अंदरूनी फायदा हो या माफी बेचने जैसी बातें हों.”

उन्होंने कहा, “यह 1.7 अरब डॉलर का तथाकथित एंटी-वेपनाइजेशन फंड सरकारी पैसे का गलत इस्तेमाल है और इसे रोका जाना चाहिए,” एडम शिफ ने इसे अब तक की सबसे खुली हुई भ्रष्ट योजनाओं में से एक बताया. कहा क‍ि इस फंड से एक भी पैसा नहीं दिया जाएगा.

मार्क केली ने भी सरकार पर आरोप लगाया कि वह जनता के पैसे का इस्तेमाल अपने राजनीतिक सहयोगियों को फायदा पहुंचाने में कर रही है.उन्होंने कहा, “जब आम अमेरिकी लोग रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तब ट्रंप अपने दोस्तों और सहयोगियों को सरकारी पैसे से फायदा देना चाहते हैं.”

इस कानून में यह भी प्रस्ताव है कि न्याय विभाग के सेटलमेंट फंड पर नई पाबंदियां लगाई जाएं, ताकि किसी मौजूदा राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति की ओर से दायर मामलों से जुड़े किसी भी समझौते या भुगतान को रोका जा सके.

इस फंड को लेकर संसद में पहले से ही काफी आलोचना हो रही है. सोमवार को ही सीनेट न्याय समिति के डेमोक्रेट सदस्य एलेक्स पडिला और अन्य लॉमेकर्स ने न्याय विभाग के इंस्पेक्टर जनरल से इस 'स्लश फंड' की तुरंत जांच करने की मांग की. उन्होंने इसे 'ऐसा भ्रष्टाचार और गलत इस्तेमाल' बताया जो पहले कभी नहीं देखा गया. उनका कहना था कि 'यह पैसा उन लोगों को दिया जा सकता है जिन्हें राष्ट्रपति ट्रंप चुनेंगे,' और उन्होंने इसकी पारदर्शिता और नियमों पर सवाल उठाए.

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