- अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के प्रदर्शनकारियों को अपना समर्थन दिया है और सैन्य कार्रवाई की संभावना जताई है
- हालांकि मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य ताकत में कमी आई है और यहां एख भी अमेरिकी विमान वाहक जहाज नहीं हैं
- ईरान की मिसाइल क्षमता अभी भी मजबूत है और उसके पास हजारों बैलिस्टिक मिसाइलें मौजूद हैं
क्या अमेरिका ईरान पर जल्द हमला करने वाला है? जैसे-जैसे ईरान में जारी विरोध-प्रदर्शन हिंसक होता जा रहा है, इस सवाल का वजन बढ़ता जा रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यह संकेत देने में थोड़ा भी नहीं झिझक रहे कि ईरान के खिलाफ जल्द सैन्य कार्रवाई शुरू होने वाली है. ट्रंप ने ईरान के लोगों से "विरोध करते रहने" को कहा है और साफ-साफ कहा है कि मदद रास्ते में है. सिग्नल साफ है कि अमेरिका हमला करने वाला है. भले डोनाल्ड ट्रंप दिखा रहे हैं कि वो ईरान के खिलाफ सैन्य बल का उपयोग करने से नहीं डरेंगे, लेकिन वास्तविकता यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति के पास बहुत कम विकल्प हैं. सवाल है कि क्या ट्रंप सैन्य ताकत का उपयोग करके स्पष्ट रूप से ईरान के विरोध आंदोलन में मदद कर सकते हैं? मिडिल ईस्ट अमेरिका के लिए इतिहास में सांपों का वह बिल साबित हुआ है जिसमें अंकल सैम ने जब भी हाथ डाला है, उसके हाथ जहर ही लगा है.
चलिए आपको वो 6 वजहें बताते हैं जो ट्रंप को अभी ईरान पर हमला करने से रोक रही होंगी.
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1- सैन्य तैयारी नहीं: ध्यान रहे कि वेनेजुएला में घुसकर वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उठाने के लिए अमेरिका ने महीनों तक योजना बनाई थी. अगर ट्रंप ऐसा कुथ ईरान में करना चाहते हैं तो ऐसी कोई तैयारी शायद ही हो उनके पास. ईरान के मामले में तो ठीक इसके उलट है. द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार मिडिल ईस्ट में पिछले कुछ महीनों में अमेरिकी सेना में कमी आई है, जिससे सैन्य विकल्प और भी कम हो गए हैं. इजरायल पर हमास के हमले के बाद अमेरिका ने लगातार दो साल तक मिडिल ईस्ट में अपना विमान वाहक जहाज तैनात रखा था. लेकिन अक्टूबर के बाद से अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में कोई विमान वाहक तैनात नहीं किया है.
2- साथी देशों पर जवाबी हमले का बड़ा खतरा: अमेरिका को ईरान में हवाई हमले के लिए कतर, बहरीन, इराक, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान और सऊदी अरब जैसे देशों में मौजूद अपने सैन्य अड्डों का उपयोग करने की अनुमति भी मांगनी होगी. ऐसी स्थिति में जब ईरान बदला लेने के लिए जवाबी हमला करेगा तो ट्रंप की सेना को खुद के साथ साथ उन मेजबान देशों की रक्षा करनी होगी. किसी भी कार्रवाई के लिए क्षेत्रीय ठिकानों का इस्तेमाल राजनीतिक और रणनीतिक रूप से जोखिम भरा है.
3- ईरानी सेना इतनी भी कमजोर नहीं: पिछले साल इजरायल और अमेरिका के साथ हुई 12-दिनों की जंग में ईरान की सैन्य क्षमताएं कमजोर हो गईं, और उसका एयर डिफेंस सिस्टम आसानी से फेल होता दिखा था. इसके बावजूद ईरान ने अपनी सीमित मिसाइल क्षमता बरकरार रखी है. द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार ईरान के प्रमुख लॉन्च साइड पहाड़ों में दबे हुए हैं, और इसको फिर से बनाया जा रहा है. ऐसा अनुमान है कि ईरान के पास अभी भी 2,000 भारी बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, जो अगर बड़ी संख्या में एक साथ लॉन्च की जाएं तो अमेरिका और इजरायली हवाई सुरक्षा को चकमा देने में सक्षम हैं.

4- अमेरिकी हमला कहीं ईरानी लोगों को न मार दे: सवाल यह भी है कि क्या अमेरिका ईरान में सटीक बमबारी करने में सक्षम है, क्या उसे अपने इंटेल (खुफिया जानकारी) पर इतना भरोषा है कि वह अपने हमले में ईरान के आम लोगों, वहां के प्रदर्शनकारियों को नहीं मारेगा. ईरान की खामेनेई सरकार द्वारा उपयोग किए जाने वाले सैन्य और नागरिक स्थलों की पहचान करना कितना संभव है? जब ईरान भर में लोग सड़क पर उतरे हुए हैं, अमेरिका के लिए सही टारगेट बनाना मुश्किल होगा. एक गलत इंटेल और शहरी स्थानों में नागरिक हताहत एक स्पष्ट जोखिम होगा. ट्रंप की सेना अगर ईरान के आम लोगों को मारती है तो वहां का प्रदर्शन कमजोर होगा, अमेरिका के खिलाफ माहौल तैयार होगा, उलटे खामेनेई सरकार को ही मजबूती मिलेगी.
5- अभी ईरान का शासन कमजोर नहीं: ईरान के आम लोगों के बीच खामेनेई सरकार भले कितना भी अलोकप्रिय क्यों न हो, वह कमजोर नहीं दिख रही है. जून में इजरायल के लगातार हमले के बाद भी वह नहीं टूटी. ईरान में सरकार और सेना के बीच एक स्पष्ट एकजुटता दिखती है. वो प्रदर्शनकारियों के दमन से पीछे नहीं हट रही है. यहां तक की NBC की रिपोर्ट के अनुसार इजरायल और सऊदी के अधिकारियों ने अमेरिका को ईरान पर हमला करने के लिए तब तक इंतजार करने को कहा है जबतक कि खामेनेई शासन के खिलाफ गुस्सा और न बढ़ जाए. इजरायल और सऊदी का मानना है कि हथौड़ा अभी इतना भी गर्म नहीं हुआ.
6- लंबे युद्ध की इच्छा नहीं: अमेरिका के सहयोगी देश, वहां के संसद और खुद ट्रंप लंबा संघर्ष नहीं चाहते हैं. ट्रंप ने पहले ही कह दिया है कि वो ईरान में अपनी सेना को नहीं उतारेंगे.
अमेरिका Vs ईरानः सैन्य ताकत में कौन कितने पानी में, खामेनेई कैसे कर सकते हैं ट्रंप की नाक में दम?
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