बरमूडा ट्रायंगल से अलग समंदर में एक ऐसा हिस्सा और भी है जो जहाजों को निगल रहा है. एक दो जहाज नहीं, इसके अंदर 124 जहाज के मलब पाए गए हैं. इससे भी खास बात यह है कि समंदर का यह हिस्सा दिल्ली से भी 20 गुना छोटा है. हम बात कर रहे हैं स्ट्रेट ऑफ जिब्राल्टर, जो यूरोप के दक्षिणी छोर और अफ्रीका के उत्तर-पश्चिमी छोर के बीच स्थित है. आपने आजकल ईरान जंग के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का नाम सुना होगा. स्ट्रेट मतलब दो बड़े समुद्री हिस्सों को जोड़ने वाला संकरा रास्ता. स्ट्रेट ऑफ जिब्राल्टर के खारे पानी में जहाजों और लड़ाइयों का लंबा इतिहास डूबा हुआ है.
आज के समय में यह जगह ट्रांस-अटलांटिक जहाजों के रुकने की जगह है, जहां अब ज्यादातर तेल के जहाज आते-जाते हैं. हाल ही के एक रिसर्च पेपर में स्ट्रेट ऑफ जिब्राल्टर को लेकर बड़े खुलासे हुए हैं. CNN की रिपोर्ट के अनुसार स्पेन के पुरातत्वविदों ने कहा कि उन्होंने 2020 से 2023 के बीच किए गए सर्वे में इस 29 वर्ग मील के खाड़ी क्षेत्र में पानी के नीचे 151 पुरातात्विक स्थल खोजे हैं, जिनमें 124 डूबे हुए जहाज (शिपव्रेक) शामिल हैं.

अब तक खोजे गए पुरातात्विक स्थल लगभग 10 मीटर की गहराई तक पाए गए हैं. (फोटो- फेलिप सेरेजो आंद्रेओ)
हालांकि ज्यादातर डूबे हुए जहाज आधुनिक समय के हैं, लेकिन रिसर्चर्स को “कुछ बहुत दिलचस्प और पहले कभी न देखे गए जहाज” भी मिले हैं. हेड रिसर्चर फेलिपे सेरेज़ो आंद्रेओ ने CNN को बताया है कि सबसे पुराना जहाज 5वीं सदी ईसा पूर्व (BC) का मिला है. आंद्रेओ ने बताया कि यह जहाज काडिज शहर में बना मछली का सॉस लेकर जा रहा होगा और संभव है कि वह इसे भूमध्य सागर के रास्ते ले जा रहा था. आधुनिक समय में सबसे “दिलचस्प” जहाज वे हैं जो नेपोलियन युद्ध से जुड़े हैं, जो 19वीं सदी की शुरुआत में फ्रांस और बदलते हुए यूरोपीय सहयोगियों के बीच लड़े गए थे.
द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत के समय के भी जहाज मिले हैं. इनमें “मायाले” या “पिग” नाम का एक छोटा पनडुब्बी जैसा हथियार भी शामिल है, जिसे इटली की नौसेना ने जिब्राल्टर स्ट्रेट में ब्रिटिश नौसेना पर हमला करने के लिए इस्तेमाल किया था.
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