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ईरान के चलते UAE शिफ्ट कर रहा अपना बंदरगाह? अथाह पैसे से बन रहा ये नया पोर्ट

पिछले दो दशकों में डीपी वर्ल्ड ने पूरी दुनिया में पोर्ट्स और लॉजिस्टिक्स का एक विशाल साम्राज्य खड़ा किया है. इसमें जेबेल अली हमेशा से उनका सबसे कीमती रत्न की तरह रहा है.

ईरान के चलते UAE शिफ्ट कर रहा अपना बंदरगाह? अथाह पैसे से बन रहा ये नया पोर्ट
ईरान के हमलों के बचने के लिए यूएई में अब पूर्वी छोर पर बंदरगाह बनने जा रहा है.
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मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को देखकर संयुक्त अरब अमीरात ने अपनी इकोनॉमी और ट्रेड को सुरक्षित रखने के लिए अप्रत्याशित कदम उठाया है. दुनिया की दिग्गज लॉजिस्टिक्स कंपनी 'डीपी वर्ल्ड'अब दुबई के अपने सबसे मशहूर 'जेबेल अली' हब पर निर्भरता कम करने की तैयारी में है. इसके लिए यूएई के पूर्वी तट पर एक बिल्कुल नया मल्टीपर्पज पोर्ट बनाने की योजना पर काम चल रहा है, ताकि रणनीतिक तौर से संवेदनशील होर्मुज स्ट्रेट से गुजरे बिना ही व्यापार को जारी रखा जा सके.

फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दुबई की यह कंपनी फुजैराह के तटीय इलाके में एक नया बंदरगाह विकसित करने और वहां के मौजूदा हार्बर पर एक नया कंटेनर टर्मिनल बनाने के लिए बातचीत कर रही है.

क्यों पड़ी नए बंदरगाह की दरकार?

दरअसल, यह पूरा फैसला सुरक्षा और व्यापार को बचाने की मजबूरी से जुड़ा है. फरवरी के आखिर में अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में जब ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद किया, तब से इस क्षेत्र के सबसे बड़े कंटेनर पोर्ट 'जेबेल अली' का कामकाज 90 से 95 फीसदी तक ठप हो गया है. इसी मंदी और रुकावट ने पोर्ट ऑपरेटर को एक मजबूत विकल्प तलाशने पर मजबूर कर दिया.

इस पूरे क्षेत्रीय तनाव में यूएई सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में से एक रहा है. इस दौरान देश को निशाना बनाकर करीब 3000 ड्रोन और मिसाइलें दागी गईं, जो किसी भी अन्य देश के मुकाबले सबसे ज्यादा हैं. इतना ही नहीं, संघर्ष की शुरुआत में जेबेल अली पोर्ट भी सीधे हमले की चपेट में आ गया था, जब एक मिसाइल को हवा में तबाह करने के बाद उसका मलबा गिरने से पोर्ट पर भीषण आग लग गई थी.

ओमान की खाड़ी तक बढ़ेगी पहुंच

इस नए प्रोजेक्ट के जरिए डीपी वर्ल्ड की पहुंच 'ओमान की खाड़ी' में और गहरी हो जाएगी. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि मालवाहक जहाजों को ओमान और ईरान के बीच वाले उस संकरे और खतरनाक समुद्री रास्ते से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा जहां अक्सर अमेरिकी और ईरानी नाकेबंदी का खतरा रहता है.

एक बार जब जहाज सुरक्षित तरीके से पूर्वी तट के नए पोर्ट पर पहुंच जाएंगे, तो वहां से सामान को ट्रकों के जरिए जमीन के रास्ते दुबई, अबू धाबी और पड़ोसी खाड़ी देशों में आसानी से भेजा जा सकेगा.

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आबू धाबी का 'बुलेटप्रूफ' प्लान

यह कदम आबू धाबी की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह अपनी अर्थव्यवस्था को मध्य पूर्व के किसी भी भावी संकट या अशांति से सुरक्षित करना चाहता है.

प्रोजेक्ट की मौजूदा स्थिति की बात करें तो डीपी वर्ल्ड इस समय यूएई के अधिकारियों के साथ एक 'टर्म शीट' पर चर्चा कर रही है. हालांकि, इस प्रोजेक्ट की रूपरेखा और इसके लिए पैसा कहां से आएगा, यह अभी तय होना बाकी है. कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह नया पोर्ट बेहद तेजी से, यानी महज एक से डेढ़ साल के भीतर बनकर तैयार हो सकता है.

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तो क्या बंद हो जाएगा दुबई का 'जेबेल अली' पोर्ट?

खाड़ी देशों के अधिकारियों और कंपनी ने साफ किया है कि पूर्वी तट पर नए पोर्ट का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि दुबई का जेबेल अली पोर्ट बंद हो जाएगा या उसका महत्व कम होगा. कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "जेबेल अली हमेशा जेबेल अली ही रहेगा. इसके आकार या काम को कभी छोटा नहीं किया जाएगा. पूर्वी तट पर हमारी सक्रियता एक डिफेंसिव कदम है, ताकि अगर भविष्य में हालात और बिगड़ते हैं, तो हमारे पास बैकअप तैयार रहे."

शुरुआत में डीपी वर्ल्ड इन नई सुविधाओं को सीमित स्तर पर विकसित करेगी, लेकिन आने वाले समय में जरूरत के हिसाब से इसकी क्षमता को और ज्यादा बढ़ाया जा सकता है.

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