- रूस हर दिन 90 लाख बैरल से ज्यादा तेल का उत्पादन करता है
- रूस तीसरे नंबर पर है जहां तेल का सबसे ज्यादा उत्पादन होता है
- रूस के पास 80 अरब बैरल से ज्यादा तेल का खजाना है
रूस के तेल और गैस पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नाराजगी खत्म ही नहीं हो रही है. अब ट्रंप की सरकार ने एक ऐसा बिल पास किया है, जिससे उन्हें रूस पर प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ रूसी तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर भी 100% टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाएगा. अब यह कानून बनने के लिए ट्रंप के पास ही जाएगा.
अमेरिकी सीनेट ने इस बिल को पिछले महीने ही पास कर दिया था. अब इसे हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में भी पास करा लिया गया है. बुधवार को इस बिल के समर्थन में 262 और विरोध में 159 वोट पड़े.
ट्रंप के इस बिल का सबसे ज्यादा असर भारत और चीन पर पड़ेगा, क्योंकि रूसी तेल के सबसे बड़े खरीदार यही दोनों हैं.
वहीं, भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस बिल पर प्रतिक्रिया देते हुए साफ कर दिया है कि भारत वही करेगा जो इसके 1.4 अरब लोगों की एनर्जी सिक्योरिटी पक्की करने के लिए जरूरी होगा. विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह अपने आर्थिक हितों की रक्षा और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा.
रूस से तेल खरीदने वालों में पहले नंबर पर चीन और दूसरे पर भारत है. रूसी तेल को लेकर लंबे वक्त से ऐसी चर्चाएं होती रही हैं कि वह अपना तेल 'शैडो फ्लीट' के जरिए बेच रहा है. लेकिन सवाल उठता है कि आखिर रूस के पास तेल कितना है?
रूस के पास कितना कच्चा तेल है?
रूस दशकों से तेल की दुनिया का बड़ा बादशाह है. रूस दुनिया का दूसरा देश है, जहां सबसे ज्यादा तेल का उत्पादन होता है.
व्लादिमीर पुतिन के राष्ट्रपति बनने के बाद रूस की सरकार ने तेल पर और ज्यादा कंट्रोल बढ़ाया. रूस में तेल का ज्यादातर काम सरकारी कंपनियां ही संभालती हैं. 2016 में रूस OPEC से जुड़ा और OPEC+ बनाया. OPEC+ ही जो तेल की कीमतों पर कंट्रोल रखता है.
OPEC की 2026 की एनुअल रिपोर्ट बताती है कि रूस के पास 80 अरब बैरल तेल का खजाना है. ये तो वो खजाना है जो मिल चुका है और अभी भी तेल के कुओं की खुदाई चलती रहती है. OPEC की रिपोर्ट के मुताबिक, 5 साल से रूस के तेल का खजाना 80 अरब बैरल पर ही टिका हुआ है.
रूस का तेल किसी एक कोने में नहीं हैं, बल्कि इसका तेल बर्फीले इलाकों से लेकर कैस्पियन सागर तक फैला हुआ है. क्षेत्रफल के लिहाज से रूस दुनिया का सबसे बड़ा देश है. रूस का क्षेत्रफल 1.70 करोड़ वर्ग किलोमीटर तक फैला हुआ है. इसे ऐसे समझिए कि भारत से भी 5 गुना बड़ा है.
अनुमान है कि रूस का सबसे ज्यादा तेल उसके पश्चिमी साइबेरिया में है. रूस के पास तेल का जितना खजाना है, उसमें से 87% पश्चिमी साइबेरिया में ही है.

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क्या मिडिल ईस्ट से भी ज्यादा तेल है?
नहीं. रूस के पास तेल भले ही बहुत ज्यादा हो, लेकिन मिडिल ईस्ट से ज्यादा नहीं. मिडिल ईस्ट में रूस की तुलना में 10-12 गुना ज्यादा तेल है.
OPEC की 2026 की रिपोर्ट बताती है कि मिडिल ईस्ट के देशों के पास 873 अरब बैरल तेल का खजाना है. सऊदी अरब के पास सबसे ज्यादा तेल है. उसके पास 267 अरब बैरल से ज्यादा कच्चा तेल है. उसके बाद ईरान है, जिसके पास 208 अरब बैरल से ज्यादा कच्चा तेल है. इराक, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात के पास भी सैकड़ों अरब बैरल तेल का भंडार है.

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फिर रूस की ताकत कहां है?
तेल का खजाना होना और उससे तेल निकालना... दो अलग-अलग बातें हैं. मिडिल ईस्ट के पास भले ही तेल का सबसे बड़ा खजाना हो, लेकिन रूस के पास तेल निकालने की क्षमता कहीं ज्यादा है.
अमेरिका और सऊदी अरब के बाद दुनिया का सबसे बड़ा ऑयल प्रोड्यूसर रूस ही है. OPEC की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका हर दिन 1.35 करोड़ बैरल कच्चा तेल प्रोड्यूस करता है. दूसरे नंबर पर सऊदी अरब है, जो रोजाना 95 लाख बैरल कच्चा तेल निकालता है. जबकि, रूस हर दिन 91 लाख बैरल से ज्यादा कच्चे तेल का उत्पादन करता है.
2024 में रूस ने सऊदी अरब से भी ज्यादा कच्चा तेल निकाला था. लेकिन 2025 में उसका प्रोडक्शन 0.7% तक गिर गया.

और तेल को बेचता कहां है रूस?
रूस अपना तेल पहले ज्यादातर यूरोपीय देशों को बेचता था. लेकिन यूक्रेन जंग ने सब बदल दिया. अब रूस का ज्यादातर तेल भारत और चीन जैसे एशियाई देशों के पास आता है.
एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में रूस ने चीन को हर दिन 22 लाख बैरल और भारत को 17 लाख बैरल कच्चा तेल बेचा. अब रूस का 80% से ज्यादा तेल एशियाई देशों के पास आ रहा है.
थिंक टैंक सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के मुताबिक, दिसंबर 2022 से अगस्त 2026 के बीच रूस ने अपना 50% से ज्यादा कच्चा तेल चीन को बेचा. इसके बाद 37% एक्सपोर्ट भारत को किया. तुर्की और यूरोपीय देशों को 5-5% एक्सपोर्ट किया.
भारत भी पहले कच्चा तेल मिडिल ईस्ट के देशों से खरीदता था लेकिन कुछ सालों में रूस से ज्यादा खरीद रहा है. ग्लोबल ट्रेड रिसर्च एनिशिएटिव (GTRI) के मुताबिक, 2025-26 में भारत ने जो कच्चा तेल इंपोर्ट किया, उसमें से 30.3% रूस से ही आया. इस दौरान भारत ने 40 अरब डॉलर से ज्यादा का कच्चा तेल रूस से खरीदा.
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