
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ...
वाशिंगटन:
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अफगानिस्तान के लिए अमेरिका की नई रणनीति की सोमवार को घोषणा करेंगे. इस बीच ऐसी खबरें हैं कि ट्रंप प्रशासन ने नीति समीक्षा के दौरान भारत के लिए भूमिका की संभावना पर भी चर्चा की है. व्हाइट हाउस ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वर्जीनिया के अर्लिंग्टन के फ़ोर्ट मायर सैन्य अड्डे से देश के सैनिकों और नागरिकों को संबोधित करेंगे . इससे पहले रविवार को रक्षा मंत्री जिम मैटिस ने इस बात की पुष्टि की थी कि ‘कठोर’ बहस के बाद प्रशासन ने नई अफगान नीति तैयार कर ली है.
इस बहुप्रतीक्षित नीति की घोषणा ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के आठ माह बाद की जा रही है . इस देरी के लिए उनकी काफी आलोचना भी हुई थी और कहा जा रहा था कि उन्हें निर्णय लेने में दिक्कतें आ रही हैं.
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वहीं पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने पद संभालने के 100 दिनों के अंदर अपनी अफगान नीति की घोषणा कर दी थी. यह नीति तीन सदस्यीय समिति की सिफारिशों पर आधारित थी. ट्रंप प्रशासन की इस देरी से झल्लाए सांसद जॉन मैक्केन ने 10 अगस्त को अफगानिस्तान के लिए अपनी ही एक नीति की घोषणा की थी जिसमें उन्होंने पाकिस्तान को आतंकवादी गुटों का समर्थन जारी रखने की सूरत में उस पर ‘ग्रेजुएटेड कॉस्ट’ लगाने का प्रस्ताव रखा था. मैक्केन ने अपनी रणनीति की घोषणा करते हुए कहा था कि अमेरिका अफगानिस्तान के मुद्दे पर दिशाहीन है. सीनेट आर्म्ड सर्विस कमेटी के अध्यक्ष ने युद्ध प्रभावित अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों की स्थाई मौजूदगी की मांग की .
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व्हाइट हाउस ने अपने बयान में नई रणनीति की रूपरेखा के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है. वहीं प्रेस सचिव सारा सैंडर्स ने सिर्फ यह कहा कि ट्रंप ‘अफगानिस्तान और दक्षिण एशिया में अमेरिका की आगे की भूमिका के बारे में जानकारी देंगे.’ रक्षा मंत्री ने रविवार को कहा था कि नई रणनीति अफगानिस्तान से भी कहीं आगे पूरी ‘दक्षिण एशिया रणनीति’ है. ओबामा की अफगान नीति जहां प्राथमिक तौर पर अफगानिस्तान और पाकिस्तान पर केन्द्रित थी, वहीं रिपोर्टें हैं कि ट्रंप प्रशासन ने अपनी नीति समीक्षा के दौरान भारत की भूमिका की संभावनाओं पर भी चर्चा की.
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कुछ माह पहले पेंटागन ने अफगान सेना की मदद के लिये करीब 3,800 अतिरिक्त सैनिक भेजने का निर्णय किया था.
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
इस बहुप्रतीक्षित नीति की घोषणा ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के आठ माह बाद की जा रही है . इस देरी के लिए उनकी काफी आलोचना भी हुई थी और कहा जा रहा था कि उन्हें निर्णय लेने में दिक्कतें आ रही हैं.
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वहीं पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने पद संभालने के 100 दिनों के अंदर अपनी अफगान नीति की घोषणा कर दी थी. यह नीति तीन सदस्यीय समिति की सिफारिशों पर आधारित थी. ट्रंप प्रशासन की इस देरी से झल्लाए सांसद जॉन मैक्केन ने 10 अगस्त को अफगानिस्तान के लिए अपनी ही एक नीति की घोषणा की थी जिसमें उन्होंने पाकिस्तान को आतंकवादी गुटों का समर्थन जारी रखने की सूरत में उस पर ‘ग्रेजुएटेड कॉस्ट’ लगाने का प्रस्ताव रखा था. मैक्केन ने अपनी रणनीति की घोषणा करते हुए कहा था कि अमेरिका अफगानिस्तान के मुद्दे पर दिशाहीन है. सीनेट आर्म्ड सर्विस कमेटी के अध्यक्ष ने युद्ध प्रभावित अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों की स्थाई मौजूदगी की मांग की .
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व्हाइट हाउस ने अपने बयान में नई रणनीति की रूपरेखा के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है. वहीं प्रेस सचिव सारा सैंडर्स ने सिर्फ यह कहा कि ट्रंप ‘अफगानिस्तान और दक्षिण एशिया में अमेरिका की आगे की भूमिका के बारे में जानकारी देंगे.’ रक्षा मंत्री ने रविवार को कहा था कि नई रणनीति अफगानिस्तान से भी कहीं आगे पूरी ‘दक्षिण एशिया रणनीति’ है. ओबामा की अफगान नीति जहां प्राथमिक तौर पर अफगानिस्तान और पाकिस्तान पर केन्द्रित थी, वहीं रिपोर्टें हैं कि ट्रंप प्रशासन ने अपनी नीति समीक्षा के दौरान भारत की भूमिका की संभावनाओं पर भी चर्चा की.
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कुछ माह पहले पेंटागन ने अफगान सेना की मदद के लिये करीब 3,800 अतिरिक्त सैनिक भेजने का निर्णय किया था.
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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