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खुद को 'जर्मनी का राजा' बताने वाले शेफ पर मुकदमा शुरू, नाम रखा है 'पीटर द फर्स्ट'

फ़िट्ज़ेक संसद चुनाव भी लड़ चुके हैं. फ़िट्ज़ेक ने बताया कि उनके अनुयायी अक्सर ऐसे लोग होते हैं, जिनमें कुछ नया करने की भावना होती है और जो इस दुनिया में एक सकारात्मक बदलाव लाना चाहते हैं.

खुद को 'जर्मनी का राजा' बताने वाले शेफ पर मुकदमा शुरू, नाम रखा है 'पीटर द फर्स्ट'
फ़िट्ज़ेक से पहले भी कई ग्रुप जर्मनी पर कब्जे की कोशिश कर चुके हैं. (फोटो-AFP)
  • जर्मनी में किंगडम ऑफ जर्मनी समूह के चार सदस्यों पर मुकदमा शुरू हुआ, जिसमें खुद को राजा बताने वाला शामिल है
  • इस समूह पर जर्मनी की संवैधानिक व्यवस्था को खत्म कर अपनी बनावटी राज्य व्यवस्था स्थापित करने का आरोप है
  • फिट्ज़ेक के नेतृत्व में समूह पर अपनी मुद्रा, पहचान पत्र और बीमा योजना जैसी समानांतर संस्थाएं चलाने का आरोप है

शुक्रवार को जर्मनी के पश्चिमी शहर डसेलडोर्फ में एक प्रतिबंधित चरमपंथी समूह के चार सदस्यों पर मुकदमा शुरू हुआ. इनमें एक ऐसा व्यक्ति भी शामिल है जो खुद को जर्मनी का "राजा" बताता है. इन चारों लोगों पर "किंगडम ऑफ जर्मनी" (जर्मनी का साम्राज्य) के मुख्य सरगना होने का आरोप है. यह समूह "सिटिजन्स ऑफ द रीच" ("रीचसबर्गर") नामक एक ऐसे आंदोलन से जुड़ा है, जो आधुनिक जर्मन गणराज्य की वैधता को नहीं मानता.

कौन है ये जर्मनी का नया राजा

इस समूह के खुद को "राजा" घोषित करने वाले 61 वर्षीय पीटर फिट्ज़ेक ने 2012 में इस संगठन की स्थापना की थी. वह पहले एक शेफ और कराटे प्रशिक्षक रह चुके हैं. मई 2025 में, जब गृह मंत्रालय ने इस समूह पर प्रतिबंध लगाया, तब फिट्ज़ेक को अन्य तीन सदस्यों के साथ हिरासत में ले लिया गया था. मुख्य अभियोजक (सरकारी वकील) इंगो कैसर ने डसेलडोर्फ हायर रीजनल कोर्ट को बताया कि इस संगठन का उद्देश्य फेडरल रिपब्लिक ऑफ जर्मनी की व्यवस्था को खत्म करना और उसकी जगह अपनी खुद की एक बनावटी राज्य संरचना स्थापित करना था.

कोर्ट में फिट्ज़ेक ने जोर देकर कहा कि उसे पीटर प्रथम (पीटर द फर्स्ट) के नाम से बुलाया जाए. इस पर न्यायाधीश जान वैन लेसेन ने कहा कि प्रतिवादी अपनी व्यक्तिगत जानकारी के बारे में सही विवरण देने से इनकार कर रहा है. आलोचकों ने लंबे समय तक 'राइशबर्गर' समूह के लोगों को असंतुष्ट और अजीबोगरीब मानकर खारिज कर दिया था, लेकिन हाल के वर्षों में ये लोग और भी कट्टर हो गए हैं और अब इन्हें सुरक्षा के लिए एक बढ़ता हुआ खतरा माना जा रहा है.

जर्मनी के राजा पर ये हैं आरोप

फ़िट्ज़ेक के समूह (जिसे जर्मन भाषा में "कोनिगरेइच डॉयचलैंड" कहा जाता है) ने प्रतिबंध लगने के समय लगभग 6,000 सदस्य होने का दावा किया था. संघीय अभियोजक कार्यालय ने इस समूह पर समानांतर संस्थाएं बनाने, अपनी खुद की मुद्रा और पहचान पत्र जारी करने, और अपने सदस्यों के लिए एक बीमा योजना चलाने का आरोप लगाया है. अभियोजक कार्यालय के अनुसार, "सर्वोच्च संप्रभु" के रूप में, फ़िट्ज़ेक के पास सभी प्रमुख क्षेत्रों में नियंत्रण और निर्णय लेने की शक्ति थी.

क्यों कर रहा ऐसा 

फ़िट्ज़ेक संसद चुनाव भी लड़ चुके हैं (पर जीत नहीं पाए). उन्होंने 2023 में AFP को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि इस संगठन की स्थापना करना उस बड़े हेरफेर का एकमात्र जवाब था, जिसे उन्होंने जर्मन समाज में देखा था. पूर्वी जर्मनी में स्थित इस समूह के मूल केंद्र विटेनबर्ग में, फ़िट्ज़ेक ने AFP को बताया कि उनके अनुयायी अक्सर ऐसे लोग होते हैं जिनमें "कुछ नया करने की भावना" होती है और जो "इस दुनिया में एक सकारात्मक बदलाव लाना चाहते हैं".

2022 में भी हुआ था ऐसा मामला

डसेलडोर्फ में चल रहा यह मामला, जर्मनी भर में 'राइशबर्गर' आंदोलन के समर्थकों से जुड़े कई मामलों में से एक है. साल 2022 में, एक समूह के सदस्यों को गिरफ्तार किया गया था. इस समूह में एक पूर्व सांसद और पूर्व सैनिक शामिल थे. इन लोगों ने संसद पर हमला करने, सरकार को गिराने और कुलीन व्यक्ति तथा व्यवसायी प्रिंस हेनरिक XIII रॉयस को देश का प्रमुख बनाने की साजिश रची थी. रॉयस और उनके कई साथियों पर 2024 से फ्रैंकफर्ट में मुकदमा चल रहा है.

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