
काबुल:
अफगानिस्तान सरकार और तालिबान के प्रतिनिधियों के बीच दूसरे दौर की आधिकारिक वार्ता 30 जुलाई को चीन में होगी। इस वार्ता का उद्देश्य 14 साल से जारी संघर्ष को समाप्त करना है।
आतंकवादियों के साथ समझौते पर बातचीत की जिम्मेदारी संभाल रही संस्था उच्च शांति परिषद के मोहम्मद इस्माइल कासिमयार ने कहा कि दोनों पक्ष वार्ता में शामिल होने वाले सदस्यों सहित अन्य बातों पर अब भी काम कर रहे हैं और इस बारे में अगामी दिनों में अंतिम फैसला होगा।
कासिमयार ने कहा कि काबुल अस्थायी संघर्ष विराम का अनुरोध करेगा। तालिबान के अप्रैल के हमले के बाद से यह संघर्ष और तेज हो गया है। उन्होंने कहा, ‘‘हम संघर्षविराम चाहते हैं और यह इस बात का अच्छा परीक्षण होगा कि मैदान पर मौजूद लड़ाके तालिबान नेतृत्व के संघर्षविराम निर्देश को स्वीकार करना चाहते हैं या नहीं।’’
पहले दौर की आमने-सामने की आधिकारिक वार्ता 7 जुलाई को इस्लामाबाद में हुई थी, जिसकी निगरानी अमेरिका और चीन के प्रतिनिधियों ने की थी। पिछले साल राष्ट्रपति अशरफ गनी के पद संभालने के बाद उन्होंने कई अनौपचारिक संपर्क किए थे। गनी ने तालिबान के साथ शांति वार्ता को प्राथमिकता में रखा है।
गनी के उपप्रवक्ता जफर हाशमी ने अगले दौर की वार्ता की जानकारियों की पुष्टि तो नहीं की है, लेकिन कहा है कि राष्ट्रपति चाहते हैं कि अफगान पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वालों में ‘‘समाज के सभी वर्गों’’ के लोग तथा तालिबान के 1996-2001 के शासन के खिलाफ लड़ने वाले जेहादी नेता शामिल हों। उच्च शांति परिषद के प्रवक्ता शहजाद शाहिद ने कहा कि सरकारी दल में कम से कम एक महिला होगी।
आतंकवादियों के साथ समझौते पर बातचीत की जिम्मेदारी संभाल रही संस्था उच्च शांति परिषद के मोहम्मद इस्माइल कासिमयार ने कहा कि दोनों पक्ष वार्ता में शामिल होने वाले सदस्यों सहित अन्य बातों पर अब भी काम कर रहे हैं और इस बारे में अगामी दिनों में अंतिम फैसला होगा।
कासिमयार ने कहा कि काबुल अस्थायी संघर्ष विराम का अनुरोध करेगा। तालिबान के अप्रैल के हमले के बाद से यह संघर्ष और तेज हो गया है। उन्होंने कहा, ‘‘हम संघर्षविराम चाहते हैं और यह इस बात का अच्छा परीक्षण होगा कि मैदान पर मौजूद लड़ाके तालिबान नेतृत्व के संघर्षविराम निर्देश को स्वीकार करना चाहते हैं या नहीं।’’
पहले दौर की आमने-सामने की आधिकारिक वार्ता 7 जुलाई को इस्लामाबाद में हुई थी, जिसकी निगरानी अमेरिका और चीन के प्रतिनिधियों ने की थी। पिछले साल राष्ट्रपति अशरफ गनी के पद संभालने के बाद उन्होंने कई अनौपचारिक संपर्क किए थे। गनी ने तालिबान के साथ शांति वार्ता को प्राथमिकता में रखा है।
गनी के उपप्रवक्ता जफर हाशमी ने अगले दौर की वार्ता की जानकारियों की पुष्टि तो नहीं की है, लेकिन कहा है कि राष्ट्रपति चाहते हैं कि अफगान पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वालों में ‘‘समाज के सभी वर्गों’’ के लोग तथा तालिबान के 1996-2001 के शासन के खिलाफ लड़ने वाले जेहादी नेता शामिल हों। उच्च शांति परिषद के प्रवक्ता शहजाद शाहिद ने कहा कि सरकारी दल में कम से कम एक महिला होगी।