- BNP के सांसदों ने ड्यूटी फ्री कार और सरकारी प्लॉट स्वीकार न करने का निर्णय संसदीय बैठक में लिया गया
- तारिक रहमान बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री बने हैं और उन्होंने 25 मंत्री तथा 24 राज्य मंत्री नियुक्त किए हैं
- नए मंत्रियों के लिए 45 सरकारी वाहन लोक प्रशासन मंत्रालय के माध्यम से संसदीय सचिवालय के सामने उपलब्ध कराए गए
बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (BNP) के नवनिर्वाचित सांसदों ने ड्यूटी फ्री कार और सरकारी प्लॉट्स स्वीकार नहीं करने का निर्णय लिया है. यह निर्णय मंगलवार को सुबह 11:30 बजे के बाद हुई संसदीय दल की बैठक में लिया गया. पार्टी के मीडिया प्रकोष्ठ के सदस्य शायरुल कबीर खान ने मीडिया को इस जानकारी की पुष्टि की.
तारिक रहमान ने बांग्लादेश में प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, 25 मंत्री और 24 राज्य मंत्री बनाए
इस बीच, नए मंत्रियों के लिए कुल 45 सरकारी वाहन तैयार किए गए हैं. ये वाहन राष्ट्रीय संसद सचिवालय भवन संख्या 1 के सामने कतार में खड़े देखे गए. अधिकारियों ने बताया कि कैबिनेट विभाग की आवश्यकताओं के अनुसार लोक प्रशासन मंत्रालय (सरकारी परिवहन विभाग) के माध्यम से वाहनों की व्यवस्था की गई थी.
कपिल-गावस्कर सहित दुनिया के दिग्गज क्रिकेटरों ने इमरान खान का किया समर्थन तो बौखलाई पाकिस्तान सरकार
बांग्लादेश में आज ही नई सरकार ने शपथ ली है. तारिक रहमान बांग्लादेश के नये पीएम बने हैं. उन्होंने 25 मंत्री और 24 राज्य मंत्री बनाए हैं. उनकी कोशिश है कि बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाया जाए. साथ ही इतनी बड़ी जीत मिलने के बाद बीएनपी की तरफ से कार और प्लॉट को लेकर किए गए निर्णयों से पता चलता है कि तारिक रहमान जनता को संदेश देना चाहते हैं कि नई सरकार जनता के एक-एक पैसे को सही काम में खर्च करेगी.
जिनेवा और नई दिल्ली पर दुनिया की क्यों नजर? तीसरा विश्वयुद्ध या होगी शांति और तरक्की
सरकार बनते ही आरोप भी शुरू
नेशनल सिटीजन पार्टी के संयोजक और सांसद नाहिद इस्लाम ने आज आरोप लगाया कि खलीलुर रहमान को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने से "चुनाव में धांधली, नतीजों में हेरफेर और संवैधानिक सुधारों से जुड़ी जटिलताओं" के आरोप सार्वजनिक हो गए हैं. संसद सदस्य और संवैधानिक सुधार परिषद के सदस्य के रूप में शपथ लेने के तुरंत बाद पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, "अगर खलीलुर रहमान बीएनपी सरकार में मंत्री बनते हैं, तो यह सवाल उठता है कि क्या उन्होंने अंतरिम सरकार के कार्यकाल के दौरान उस पार्टी की ओर से काम किया था."
नाहिद इस्लाम ने आगे कहा, "छात्र सलाहकारों ने चुनाव से पहले तटस्थता बनाए रखने के लिए इस्तीफा दे दिया था, क्योंकि उन पर उस समय एक विशेष राजनीतिक दल से जुड़े होने के आरोप लगे थे." नाहिद ने कहा कि इस तरह के घटनाक्रम से चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक सुधारों के प्रयासों में जनता का विश्वास कमज़ोर होने का खतरा है, क्योंकि निष्पक्षता और संस्थागत अखंडता को लेकर चिंताएं फिर से उभर रही हैं.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं