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This Article is From Nov 25, 2025

पछताएगा पाक... भारत को 'अनमोल खजाना' देने को तैयार अफगानिस्तान, देखें तालिबान मंत्री के साथ स्पेशल इंटरव्यू

अफगानिस्तान के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री अलहाज नूरुद्दीन अजीजी ने भारत की अपनी पहली यात्रा के दौरान NDTV के साथ विशेष रूप से बातचीत की है. यहां उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान भारत के साथ "व्यापार के लिए खुला" है.

पछताएगा पाक... भारत को 'अनमोल खजाना' देने को तैयार अफगानिस्तान, देखें तालिबान मंत्री के साथ स्पेशल इंटरव्यू
अफगानिस्तान के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री अलहाज नूरुद्दीन अजीजी के साथ खास बातचीत
  • भारत आए अफगानिस्तान के उद्योग मंत्री नूरुद्दीन अजीजी का भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार, निवेश बढ़ाने पर जोर
  • "भारत-अफगानिस्तान के बीच व्यापार वर्तमान में एक अरब डॉलर है, जो दोनों देशों की क्षमता से काफी कम है"- अजीजी
  • अफगानिस्तान ने नई दिल्ली में वाणिज्यिक अटैची भेजने की पुष्टि की और राजनयिक उपस्थिति बढ़ाने की योजना है
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अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी के बाद वहां के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री अलहाज नूरुद्दीन अजीजी इस समय भारत दौरे पर हैं और NDTV ने उनके साथ खास बातचीत की है. भारत और अफगानिस्तान के बीच मजबूत होते रिश्तों के बीच अलहाज नूरुद्दीन अजीजी ने भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार, निवेश और राजनयिक जुड़ाव के एक बड़े स्तर के विस्तार का आह्वान किया है. भारत की ओर यह हाथ उस समय बढ़ाया जा रहा है जब पाकिस्तान के साथ तनाव के कारण अफगानिस्तान के व्यापार मार्ग अस्थायी रूप से बंद हो गए हैं और राजनयिक दरार बढ़ गई है. 

भारत की अपनी पहली यात्रा के दौरान NDTV के आदित्य राज कौल से विशेष रूप से बात करते हुए, अजीजी ने कहा कि अफगानिस्तान भारत के साथ "व्यापार के लिए खुला" है और काबुल में भारतीय राजनयिकों के लिए पूर्ण सुरक्षा गारंटी प्रदान करने के लिए तैयार है.

अजीजी की यात्रा अफगान विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी की दिल्ली यात्रा के कुछ ही हफ्तों बाद हो रही है. यह 2021 के बाद भारत में पहली उच्च स्तरीय तालिबान भागीदारी है और नई दिल्ली के साथ संबंधों को स्थिर करने के लिए काबुल द्वारा नए सिरे से प्रयास का संकेत देती है. इस दौरों और मजबूत होते रिश्तों के पीछे की कूटनीतिक पृष्ठभूमि जटिल है. दरअसल पिछले महीने ही, पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर झड़पों ने ताजा गतिरोध पैदा कर दिया है, जिससे व्यापार रुक गया और हजारों ट्रक फंस गए. अफगानिस्तान ने तब से व्यापारियों को तीन महीने के लिए पाकिस्तान से दवाओं के आयात को रोकने का आदेश दिया है, इस कदम को अजीजी ने "अस्थायी" बताया है. उन्होंने कहा कि काबुल गुणवत्ता वाले सामान और बेहतर शर्तों की पेशकश करने वाले पार्टनर्स को प्राथमिकता देता है.

क्षेत्रीय अशांति के बावजूद, अजीजी ने भारत-अफगानिस्तान आर्थिक सहयोग पर उत्साह के साथ बातचीत की. उन्होंने कहा कि वर्तमान में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार केवल 1 अरब डॉलर का है. उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा "क्षमता से काफी कम" है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उनकी भारत यात्रा का उद्देश्य "व्यापार के लिए नए रास्ते खोजना" और यह सुनिश्चित करना है कि नए सिरे से बातचीत "ईश्वर की इच्छा से सभी समस्याओं का समाधान प्रदान करेगी."

वायु, समुद्र और भूमि कनेक्टिविटी का विस्तार करने पर जोर

अजीजी ने खुलासा किया कि तालिबान प्रशासन भारत-अफगानिस्तान एयर कॉरिडोर को मजबूत करने के लिए एरियाना अफगान एयरलाइंस को सब्सिडी देने और अन्य निजी वाहकों (कैरियर्स) का समर्थन करने की योजना बना रहा है. इससे माल ढुलाई सस्ती और अधिक अनुमानित (प्रिडिक्टेबल) हो जाएगी. उन्होंने कहा, "अगर कोई भारतीय कंपनी इस हवाई गलियारे में निवेश करना चाहती है, तो उन्हें हमारी अनुमति है." उन्होंने कहा कि आर्थिक आयोग ने अफगानी सूखे मेवों और भारतीय दवाओं सहित दोनों तरह के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए टैरिफ कम करने की सिफारिश की है.

हवाई संपर्क के अलावा, काबुल ईरान के रास्ते व्यापार की संभावनों का भी आकलन कर रहा है, ताकि पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए लागत प्रभावी विकल्प तलाशे जा सकें. अजीजी ने कहा, "राजनीतिक समस्याएं अस्थायी हैं और हमेशा के लिए नहीं." उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अफगानिस्तान की आर्थिक कमजोरी को कम करने के लिए विविधीकरण महत्वपूर्ण है.

खनन, दुर्लभ पृथ्वी और भारत की भूमिका

अफगानिस्तान के विशाल खनिज भंडार में भारत की रुचि पर मंत्री ने कहा कि जब तक कंपनियां अफगानिस्तान के खनन और दुर्लभ-पृथ्वी नियमों का पालन करती हैं, तालिबान सरकार भारतीय भागीदारी का स्वागत करती है. उन्होंने आश्वासन दिया, ''हम सभी को व्यापार के लिए समान पहुंच देते हैं,'' उन्होंने संकेत दिया कि भारत अपनी तकनीकी बढ़त और प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण के कारण एक पसंदीदा भागीदार बना हुआ है.

राजनयिक स्तर पर जुड़ाव: एक महीने के भीतर वाणिज्यिक अटैची

अजीजी ने पुष्टि की कि अफगानिस्तान एक महीने के भीतर नई दिल्ली में एक वाणिज्यिक अटैची भेजेगा. साथ ही दोनों देशों में नए राजदूतों की नियुक्ति पर चर्चा प्रगति पर है. उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री मुत्ताकी ने अफगान कैबिनेट को भारत में मिले "गर्मजोशी से स्वागत" और राजनयिक उपस्थिति बढ़ाने के लिए बातचीत में सकारात्मक गति के बारे में जानकारी दी थी.

अजीजी ने यह भी दावा किया कि काबुल ने पहले ही भारतीय राजनयिकों और अफगानिस्तान में दूतावास को पूरी सुरक्षा प्रदान की है. उन्होंने कहा, ''हम सुरक्षा के आश्वासन के बिना किसी को आमंत्रित नहीं करते हैं.'' उन्होंने कहा कि तालिबान सरकार अमेरिकी उपस्थिति के दौरान बनाई गई बड़ी विस्फोट दीवारों को हटा रही है. उन्होंने जोर देकर कहा, "अफगानिस्तान आज शांतिपूर्ण है."

'हम शांति चाहते हैं, खून नहीं'

पहलगाम में हाल के आतंकवादी हमले और दिल्ली के लाल किले के पास आत्मघाती बम विस्फोट पर सवालों का जवाब देते हुए, अजीजी ने कहा कि उन्होंने केवल इन घटनाओं के बारे में संक्षेप में सुना है लेकिन भारत के साथ उन्होंने "शांतिपूर्ण संबंधों" के लिए अफगानिस्तान की इच्छा दोहराई. उन्होंने कहा, "हमने 50 साल तक कठिनाइयां देखी हैं. हम नहीं चाहते कि खून की एक बूंद भी बहायी जाए."

महिला एंटरप्रेन्योरशिप और एस जयशंकर, गोयल को निमंत्रण

अजीजी ने महिलाओं के लिए चैंबर ऑफ कॉमर्स के लिए काबुल के समर्थन पर प्रकाश डाला. इसमें नए ऑफिस खोलना और गैर सरकारी संगठनों (NGO's) और प्राइवेट कंपनियों के साथ पार्टनर्शिप में $ 100 मिलियन की सुविधा प्रदान करना शामिल है. उन्होंने भारतीय महिला-केंद्रित बिजनेसेज को अफगान महिला उद्यमियों के साथ सहयोग करने के लिए आमंत्रित किया.

इंटरव्यू को खत्म करते हुए, अजीजी ने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को अगले साल जून या जुलाई में अफगानिस्तान का दौरा करने के लिए औपचारिक निमंत्रण दिया. उन्होंने भारतीय पत्रकारों से अफगानिस्तान की यात्रा करने और "अफगान लोगों और अफगान निजी क्षेत्र की कहानी बताने" का भी आग्रह किया. NDTV के साथ यह विशेष इंटरव्यू बदलते क्षेत्रीय समीकरणों और पाकिस्तान के साथ बढ़ते तनाव के बीच भारत को एक केंद्रीय आर्थिक भागीदार के रूप में स्थापित करने के तालिबान की एक पुरजोर कोशिश को दर्शाता है.

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