दमिश्क:
सीरिया में शुक्रवार के प्रदर्शनों से पहले लोकतंत्र समर्थक आंदोलन सेना तक भी पहुंच चुका है। सैनिकों से आग्रह किया गया है कि वे इस आंदोलन में शामिल हों, जबकि वैश्विक मानवाधिकार समूहों ने सेना पर गोली मारकर मौत के घाट उतार देने की नीति अपनाने का आरोप लगाया है। सत्ता विरोधी प्रदर्शनों को हवा दे रहे फेसबुक समूह सीरियन रिवोल्यूशन 2011 ने कहा, हम सीरियाई सेना में अपने समर्थकों से आग्रह करते हैं कि वे सैनिकों को छूट दें, ताकि देश के रखवाले हमारी शांतिपूर्ण क्रांति में शामिल हो सकें। सीरिया में मार्च के मध्य से विरोध प्रदर्शन जारी हैं। इस हफ्ते के प्रदर्शन फ्राइडे ऑफ गार्जियंस ऑफ होमलैंड के नाम से आयोजित किए जा रहे हैं, जो सेना और उन शब्दों के संदर्भ में है, जिनका इस्तेमाल सीरिया के राष्ट्रगान के प्रथम पद्य में किया गया। यूसुफ अल अजमाह की तस्वीर के साथ फेसबुक पर बने समूह ने कहा, सेना और आम लोग एक हैं। अजमाह को सीरिया का राष्ट्रीय नायक माना जाता है, जो फ्रांसीसी सेना के समक्ष उठ खड़ा हुआ था। हालांकि इस बात की संभावना नहीं है कि सेना प्रदर्शन में शामिल होगी, क्योंकि शीर्ष कमांडर राष्ट्रपति बशर अल असद के प्रति पूरी तरह वफादार हैं और इनमें से अधिकतर उनके अल्पसंख्यक समुदाय अलाविते से हैं। सेना की चौथी डिवीजन का नियंत्रण उनके भाई माहेर के पास है। दरा शहर में प्रदर्शनों को दबाने के लिए इसी डिवीजन को भेजा गया था। उधर, एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा है कि उसके पास इस बात के सबूत है कि सेना गोली मारकर मौत के घाट उतार देने की नीति अपना रही है।
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सीरिया, जनक्रांति, गृह युद्ध, लोकतंत्र समर्थक आंदोलन