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श्रीलंका के स्कूलों में बैन हो गया फास्ट फूड, अब बच्चों को न बर्गर मिलेंगे, न पिज्जा, न आइसक्रीम

बच्चों के स्वास्थ्य के लिए श्रीलंका सरकार ने लिया बड़ा फैसला, अब स्कूलों में ज्यादा चीनी, नमक और फैट वाले खाद्य पदार्थ नहीं दिए जा सकेंगे.

श्रीलंका के स्कूलों में बैन हो गया फास्ट फूड, अब बच्चों को न बर्गर मिलेंगे, न पिज्जा, न आइसक्रीम
श्रीलंका के स्कूलों में बैन हो गया फास्ट फूड (फाइल फोटो- एएफपी)
  • श्रीलंका में अधिकारियों ने मंगलवार से स्कूलों में बच्चों को फास्ट फूड देने पर रोक लगाना शुरू कर दिया
  • इन नियमों के तहत स्कूलों में ज्यादा चीनी, नमक और फैट वाले खाद्य पदार्थ नहीं दिए जा सकेंगे
  • वजह- श्रीलंका में अब ज्यादा से ज्यादा बच्चे मोटापे और जरूरत से ज्यादा वजन की समस्या का शिकार हो रहे हैं

श्रीलंका ने मंगलवार से स्कूलों में बच्चों को फास्ट फूड देने पर रोक लगाना शुरू कर दिया. सरकार का कहना है कि बच्चों में डायबिटीज और दिल की बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं, इसलिए यह कदम उठाया गया है. यह फैसला उस देश की सरकार ने लिया है जिसकी बड़ी आबादी अब भी गरीबी रेखा के नीचे रहती है और कई बच्चों को आज भी पर्याप्त खाना नहीं मिल पाता. लेकिन दूसरी तरफ यह देश एक नई समस्या का भी सामना कर रहा है. यहां के अधिकारियों का कहना है कि अब ज्यादा से ज्यादा बच्चे मोटापे और जरूरत से ज्यादा वजन की समस्या का शिकार हो रहे हैं.

श्रीलंका में क्या फैसला लिया गया?

न्यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार श्रीलंका के सार्वजनिक स्वास्थ्य निरीक्षकों ने मंगलवार को बताया कि उन्होंने इस सप्ताह शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नए नियम लागू करने शुरू कर दिए हैं. इन नियमों के तहत स्कूलों में ज्यादा चीनी, नमक और फैट वाले खाद्य पदार्थ नहीं दिए जा सकेंगे. इस बैन के बाद देश के 40 लाख छात्रों के लिए हॉट डॉग, बर्गर, पिज्जा, डोनट, आइसक्रीम, बिस्कुट, फ्लेवर वाला दूध, एनर्जी ड्रिंक, पेस्ट्री, डीप फ्राई स्नैक्स और यहां तक कि टमाटर सॉस जैसी चीजें भी स्कूल मेन्यू से बाहर हो जाएंगी.

सोमवार को जारी एक बयान में शिक्षा मंत्रालय ने कहा, "बच्चों की खराब खानपान की आदतें सीधे तौर पर पोषण संबंधी समस्याओं को बढ़ाती हैं. बाद में यही आदतें डायबिटीज, दिल की बीमारी और कैंसर जैसी बीमारियों के बढ़ते मामलों का कारण बनती हैं."

खराब हो रही बच्चों की हेल्थ

श्रीलंका में बच्चों में डायबिटीज, कैंसर या दिल की बीमारियों के मामलों का राष्ट्रीय स्तर पर कोई भरोसेमंद आंकड़ा नहीं है. लेकिन अधिकारियों का कहना है कि उनके अनुभव के अनुसार ऐसे मामलों की संख्या बढ़ रही है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2024 तक 13 से 17 साल की उम्र के 12 प्रतिशत स्कूली बच्चे जरूरत से ज्यादा वजन वाले थे, जबकि 3 प्रतिशत बच्चे मोटापे का शिकार थे. यूनिसेफ के अनुसार, श्रीलंका में पांच साल से कम उम्र के लगभग 17 प्रतिशत बच्चे कुपोषण की वजह से शारीरिक विकास में रुकावट (स्टंटिंग) का सामना करते हैं.

विश्व बैंक के अनुसार, 2024 में श्रीलंका की 2.2 करोड़ आबादी में से लगभग एक-चौथाई लोग गरीबी रेखा के नीचे रहते थे. हालांकि इस साल यह हिस्सा घटकर लगभग पांचवें हिस्से तक आने की संभावना है.

ऐसे में शिक्षा मंत्रालय ने स्कूलों के मैनेजमेंट से कहा है कि वे छात्रों को चावल, ताजे फल, सब्जियां, मछली, मांस, अंडे, फ्रूट जूस (नेचुरल), ताजा दूध और कम चीनी वाली चाय या कॉफी पीने के लिए प्रोत्साहित करें.

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