महाराष्ट्र में स्कूलों के आसपास अब से एक्सेसिव फैट, ट्रांस फैट, और चीनी की अधिक मात्रा वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री, विज्ञापन और प्रचार पर रोक रहेगी. दरअसल, महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने राज्य भर के स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे स्कूल परिसर और उसके आसपास ऐसे खाद्य पदार्थों की बिक्री, इनके विज्ञापन और प्रचार पर रोक लगाने पर काम करें. एफडीए का कहना है कि ये फैसला यह बच्चों में स्वस्थ खान-पान की आदतों को बढ़ावा देने के व्यापक अभियान के तहत लिया गया है.
'खानपान की स्वस्थ संस्कृति को बढ़ावा देना मकसद'
महाराष्ट्र एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंधे ने कहा कि इस निर्देश का उद्देश्य छात्रों में स्वस्थ खान-पान की संस्कृति को बढ़ावा देना है. मुंधे ने कहा कि महाराष्ट्र के प्रत्येक बच्चे के लिए सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराना हमारे द्वारा कल जारी किए गए आदेशों का उद्देश्य है. इससे हमें स्वस्थ खान-पान की संस्कृति विकसित करने और स्वस्थ मानव बनाने में मदद मिलेगी.
स्कूल प्रिंसिपलों को सौंपी गई जिम्मेदारी
इस आदेश के तहत, ज़्यादा फैट, ट्रांस फैट और चीनी वाले प्रोडक्ट्स को स्कूलों या उनके आस-पास बेचने या उनका विज्ञापन करने की इजाजत नहीं होगी. मुंधे ने कहा कि इस निर्देश को लागू करने की जिम्मेदारी स्कूल प्रिंसिपलों को सौंपी गई है.
मुंधे के अनुसार, नए नियम 22 महीने की उम्र से लेकर कक्षा 12 में पढ़ने वाले छात्रों तक के बच्चों पर लागू होंगे और स्कूलों के आसपास निर्धारित सीमा के भीतर एचएफएसएस खाद्य पदार्थों की बिक्री, विज्ञापन या मुफ्त वितरण की इजाजत नहीं होगी.
उन्होंने कहा कि आदेशों में कहा गया है कि ज्यादा फैट, ट्रांस फैट और ज़्यादा चीनी वाले प्रोडक्ट्स को स्कूलों और उनके आस-पास के इलाकों में बेचने या उनका विज्ञापन करने की इजाजत नहीं होगी. प्रिंसिपलों को इसे लागू करना चाहिए. राज्य सरकार ने 27 जुलाई को सभी शिक्षण संस्थानों में फ़ूड सेफ़्टी और न्यूट्रिशन से जुड़े स्टैंडर्ड्स को लागू करने के लिए एक आदेश जारी किया था.
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