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This Article is From Nov 17, 2025

सजा-ए-मौत की सजा पर शेख हसीना का पहला रिएक्शन

तीन सदस्यों वाले ICT-BD ने 28 दिनों (वर्किंग डे) तक इस मामले पर सुनवाई की. आखिर में 23 अक्टूबर को मामले की सुनवाई पूरी की, जिसमें 54 गवाहों ने अदालत के सामने गवाही थी.

सजा-ए-मौत की सजा पर शेख हसीना का पहला रिएक्शन

बांग्लादेश कोर्ट के फैसले के बाद पूर्व पीएम शेख हसीना ने पहली प्रतिक्रिया दी है. हसीना ने फैसले को पक्षपाती और राजनीति से प्रेरित बताया है. शेख हसीना के बेटे ने पहले ही उन्हें मौत की सजा सुनाए जाने का अंदेशा जताया था और वो सच साबित हो गया.

शेख हसीना के साथ-साथ उनके सरकार में गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल और पुलिस प्रमुख अब्दुल्ला अल-मामून को दोषी पाया गया है. अब्दुल्ला अल-मामून सरकारी गवाह बन गए थे तो उन्हें कम सजा दी गई. कोर्ट ने शेख हसीना को अगस्त 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हुई हत्याओं का मास्टरमाइंड माना है. बताते चलें कि शेख हसीना तख्तापलट के बाद भारत आ गईं थीं. वे पिछले 15 महीने से भारत में ही रह रही हैं.

तीन सदस्यों वाले ICT-BD ने 28 दिनों (वर्किंग डे) तक इस मामले पर सुनवाई की. आखिर में 23 अक्टूबर को मामले की सुनवाई पूरी की, जिसमें 54 गवाहों ने अदालत के सामने गवाही थी.

ट्रिब्यूनल ने फैसला सुनाते हुए क्या कहा?

  • "प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मानवता के खिलाफ अपराध किया. यह न्यायाधिकरण उन्हें दोषी पाता है."
  • "उन्होंने घातक हथियारों, हेलीकाप्टरों के उपयोग करने के आदेश जारी करके मानवता के खिलाफ अपराध किए."
  • "आरोपी प्रधानमंत्री शेख हसीना वरिष्ठ कमांडिंग पद पर थीं."
  • "इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (IGP) चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून (आरोपी) गवाह बन गए थे और उन्होंने पूरा खुलासा किया है. साबूत देने के लिए उन्हें माफ कर दिया गया है. उनसे एक गवाह के रूप में पूछताछ की गई है."
  • "IGP के अपराधों के लिए मृत्युदंड का प्रावधान है, लेकिन उसके खुलासे को ध्यान में रखते हुए हम उसे दोषी ठहराते हैं और उसे कम सजा देते हैं."

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