- ईरान ने समुद्र में बिना पायलट वाली गार्क बोट और माइन्स बिछाने वाली 22 विशेष बोटों का निर्माण किया है
- अमेरिका के बी-टू बॉम्बर ने ईरान के पहाड़ी ठिकानों पर सटीक हमले कर मिसाइल फैसल्टी को नष्ट किया है
- ईरान ने क्लस्टर बम और FPV ड्रोन का इस्तेमाल कर इजरायल के टैंकों और आबादी पर सटीक हमले किए हैं
ईरान, इजरायल, अमेरिका के युद्ध में विनाश और विपदा से ज्यादा चर्चा हथियारों की हो रही है. इजरायल और अमेरिका के पास ऐसे-ऐसे खतरनाक हथियार हैं कि धरती हिल रही है. इन्हीं हथियारों के बूते नेतन्याहू और ट्रंप को उम्मीद थी कि चंद घंटों में ईरान को घुटने के बल पर ला देंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ क्योंकि ईरान के पास एक तो हथियारों को बड़ा जखीरा है दूसरा उसने कुछ अनसुने हथियारों का इस्तेमाल किया है. इस स्टोरी में हम आपको इस युद्ध में इस्तेमाल किए जा रहे हथियारों के बारे में बताएंगे.
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गार्क
ईरान के खिलाफ समुद्र में तैरती ये बोट बेहद खतरनाक है. नाम है गार्क. पूरा नाम ग्लोबल ऑटोनॉमस रिकॉनसेंस क्राफ्ट. ये बिना पायलट के चलता है. अपने आप भी चल सकता है और रिमोट से भी चला सकते हैं. इसका मकसद है समुद्री खतरों की जासूसी करना. 5000 घंटे तक लगातार काम करने की अग्निपरीक्षा पास कर चुका है. रियर टाइम डेटा कलेक्शन और ट्रांसमिशन करता है. मुश्किल स्थितियों में कम्यूनिकेशन कनेक्टिविटी दे सकता है. सरफेस वॉरफेयर में समुद्र से जमीन पर हमला कर सकता है. पनडुब्बियों को पहचान कर उनपर हमला कर सकता है. समुद्र में बिछी माइन्स को खोजकर खत्म कर सकता है. समुद्र के बीच से पानी के नीचे और ऊपर ड्रोन उड़ा सकता है. 1 घंटे में 25 किलोमीटर क्रूज कर सकता है. इसकी अधिकतम 74 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार होती है. अमेरिका इस बोट को अपनी ताकत बता रहा है. जबकि कुछ दिन पहले ही अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान की ऐसी ही एक विशेष बोट को बहुत गलत बता रहे थे. जिसका मकसद समुद्र में माइन्स बिछाना था.


डोनाल्ड ट्रंप
समुद्र में अमेरिका और इजरायल के लिए ईरान के हथियारों का खौफ केवल छोटी बोट और समुद्री माइन्स तक सीमित नहीं था. ईरान ने अमेरिका के उन युद्धपोतों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया जिन्हें अमेरिका समुद्र में इसीलिए लाता है ताकि आगे बढ़ सके. ईरान का दावा है कि उसने अपनी चतुर रणनीति और चालाक हथियारों से भूमध्य सागर में तैनात अमेरिका के युद्ध पोत जेराल्ड और लाल सागर में खड़े अब्राहम लिंकन को 1000 मील पीछे हटने पर मजबूर कर दिया और भूमध्य सागर से ईरान को घेर रहे जेराल्ड एस फोर्ड में ऐसा हमला किया कि उसमें आग लग गई. जिसकी वजह से वो युद्ध क्षेत्र से बाहर ग्रीस के सुडा बे में मरम्मत के लिए खड़ा है.

डोनाल्ड ट्रंप

बी-टू बॉम्बर
युद्ध में अमेरिका के राष्ट्रपति बी-टू बॉम्बर की बहुत तारीफ कर रहे हैं. वो इसे मिलिट्री माइट की सबसे बड़ी ट्रॉफी बता रहे हैं. वो कहते हैं-अगर आपको बुरा न लगे तो मैं इसे यहां रखना चाहता हूं. क्या ये आपको बेहद खूबसूरत नहीं लगता है? मैं इसको निहारता रहता हूं. और कहना चाहता हूं कि ये कला का बेहतरीन नमूना है. लेकिन ये दिखेगा कैसे ये तो स्टेल्थ है, रडार की पकड़ में नहीं आता है.
परमाणु क्षमता और जमीन के भीतर बने रक्षा कारखानों और स्टोर को तबाह करने के लिए अमेरिका ने बीटू बॉम्बर का इस्तेमाल किया है. 2025 में ऑपरेशन मिडनाइट हैमर चलाया गया था जिसमें ईरान के नतांज. फोर्ड और इस्फहान पर हमला किया गया. ये तीनो पर्वत के भीतर बने हैं. इसके बाद ऑपरेशन एपिक फ्यूरी में खर्ग और आईलैंड में हार्डेन्ड बैलास्टिक मिसाइल फैसेल्टी को नष्ट करने के लिए बी-2 बॉम्बर का इस्तेमाल किया गया.

डोनाल्ड ट्रंप
ईरान की मिसाइलें
ईरान इस युद्ध में अपनी मिसाइल पॉवर का खूंखार प्रदर्शन कर रहा है. तेल अवीव में ईरान के मिसाइल हमले का एक वीडियो सामने आया जिसमें एक रिहायशी इलाके में कई कार खड़ी हैं. कार के बगल से दो लोग निकलते हैं और तभी एक मिसाइल आती है और सीधे कार की छत में घुस जाती है. मुश्किल से पांच से दस सेकेंड की चूक होती है वरना कार के बगल से निकले दोनो लोग शायद अब इस दुनिया में नहीं होते. लेकिन चौकाने वाली बात ये है कि अगल बगल के हिस्से वैसे के वैसे हैं. सिर्फ कार को नुकसान होता है.


क्लस्टर बम
ईरान की मिसाइलों का सिस्टम युद्ध में बहुत सरप्राइज कर रहा है. तेलअवीव से ऐसे बहुत वीडियो सामने आ रहे हैं जो लोगों ने अपने मोबाइल फोन पर बनाए हैं. इनकी वीडियो क्वालिटी कमजोर है लेकिन जो दिखता है वो डराने वाला है. ईरान कई बम वाली मिसाइल का इस्तेमाल कर रहा है. इसमें एक मिसाइल आती है लेकिन अटैक से पहले उससे कई वॉरहेड्स निकलते हैं और अलग अलग धमाके के लिए तेजी से आगे बढ़ते हैं. इसे क्लस्टर बम कहा जा रहा है. ये मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए बड़ी चुनौती बन रही है. बेत शेमेश,डिमोना, अराद और तेलअवीव में हमलों का दावा खुद इजरायल कर रहा है. ईरान ने मिसाइल और ड्रोन को मिला कर अटैक का ऐसा कॉकटेल तैयार किया है जिसमें आयरन डोम जैसे ताकतवर सिस्टम को भी धोखा दिया है.

हिज्बुल्लाह का FPV ड्रोन
युद्ध का एक मोर्चा लेबनान में भी खुला है. जहां हिज्बुल्लाह और इजरायल की सेना लड़ रही हैं. यहां पर इजरायल जमीन से भी हमला कर रहा है. इजरायल के प्रसिद्ध टैंक मर्कावा मोर्चे पर तैनात हैं. हिज्बुल्लाह ने दावा किया है कि उसने मर्कवा टैंक पर हमला करने के लिए पहली बार FPV ड्रोन का इस्तेमाल किया है. हिज्बुल्लाह ने 100 से अधिक मर्कवा टैंक ब्लास्ट करने के दावा किया है. FTP ड्रोन का फुल फॉर्म है- फर्स्ट पर्सन व्यू ड्रोन. ये ड्रोन बहुत तेजी से उड़ते हैं. इनमे लगा कैमरा क्लियर वीडियो भेजता है. इसका इस्तेमाल सुसाइड ड्रोन की तरह किया जाता है. क्योंकि इसमें टारगेट को आखिरी समय तक देखा जा सकता है और जहां पर अटैक करना है बिल्कुल वहीं अटैक किया जाता है. मर्कावा टैंक बहुत मजबूत है. इसलिए FTP के कैमरे से उसकी सबसे कमजोर जगह देख कर वहीं पर हमला किया जाता है जिससे टैंक फट जाता है.

ईरान के ड्रोन
ईरान ने परवेज नाम के एक सुसाइड ड्रोन के विकास का दावा किया था. ये भी FPV ड्रोन जैसा ही काम करता है. इससे इराक के अमेरिकन बेस में अटैक के वीडियो भी IRGC ने जारी किए हैं. ईरान के ड्रोन्स ने युद्ध की तस्वीर बदल दी है. ईरान के पास ड्रोन की करीब 10 श्रेणियां हैं. इसमें से सबसे खतरनाक ड्रोन है शाहेद. जिसके तीन प्रकार हैं. ड्रोन का कहर इतना ज्यादा है कि बीच युद्ध में अमेरिका ने इसकी नकल तैयार की. रिवर्स इंजीनियरिंग से जो प्रोडक्ट तैयार करने का दावा है उसका नाम है Tलूकस. इसका पूरा नाम है लो कॉस्ट अनक्रूड कॉम्बैट अटैक सिस्टम. ये अमेरिकी का स्कॉर्पियन टास्कफोर्स के पास है. पहली बार इसका इस्तेमाल ऑपरेशन एपिक फ्यूरी में किया गया है.

एडमिरल ब्रैड कूपर
ईरान के ड्रोन का प्रहार इतना भारी था कि ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध में यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की की एंट्री हो गयी. अमेरिका ने यूक्रेन से कहा कि वो ड्रोन को मार गिराने वाली अपनी जुगाड़ तकनीकी अमेरिका को दे. यूक्रेन के खिलाफ रूस भी शाहेद ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है. रूस को ये ड्रोन ईरान ने दिए हैं.
ड्रोन डोम सिस्टम, रडार नंबर-1, रडार नंबर-2, E/O कैमरा, RF जैमर और हाई पॉवर लेजर बीम... इन पांच चीजों को मिला कर एक ऐसा सिस्टम तैयार हुआ है जिसका काम ड्रोन का शिकार करना है. तैयार करने में खर्च आता है 31,26,42,000 रुपये. इसमें लगे दो रडार ड्रोन को दूर से पकड़ लेते हैं. कैमरा 8 किलोमीटर तक देखता है. ऑब्जेक्ट को भीड़ से अलग करता है. पहचानता है और टॉरगेट लॉक कर देता है. जैमर ड्रोन की फ्रिक्वेंसी को पहचानने और जाम करने में इस्तेमाल होता है. हाई पॉवर लेजर बीम ड्रोन को बेकार कर देता है. प्रति शिकार लागत बहुत कम आती है. बनाने में आयरन डोम जैसा खर्च नहीं. लेकिन ड्रोन से रक्षा में उसके दाम के मुताबिक ही रोकने में खर्च होता है. अब ड्रोन को रोकने के लिए थाड या पैट्रियाट सिस्टम की जरूरत नहीं पड़ती है.

ड्रोन हंटर
94,71,000 रुपये में तैयार हो जाता है. ये ड्रोन का शिकार करता है. ड्रोन को देखते ही इसकी जंजीर खोल दी जाती है. फिर ये उसे दौड़ाता है. उसके ऊपर जाल फेंकता है और अपने कब्जे में करके उसकी गति और मकसद को खत्म कर देता है.
इंटरसेप्टर
1,00,00000 रुपये का खर्च. ऐसे ड्रोन जो मिसाइल की तरह काम करते हैं. ये टारगेट को हवा में पकड़ते हैं. माइक्रोवेव्स छोड़ते हैं. ड्रोन बेकार हो जाता है. आसमान से गिरता है. खास तरह के जाल में फंसा लिया जाता है. ताकि उसमें फंसा बम धमाका न करे.
ड्रोन के सस्ते शिकार के लिए लेजर आधारित हथियारों की पूरी एक नयी जनरेशन तैयार हो रही है. जिसमें से कुछ का इस्तेमाल शुरू हो चुका है और कुछ कतार में लगे हैं.
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LOCUST
यह 94,71,00,000 रुपये में तैयार होता है. महज 300 में एक ड्रोन का शिकार किया जा सकता है. इसका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर शुरू नहीं हुआ है. लेकिन सीमित क्षमता में अमेरिकी सेना ने इसकी टेस्टिंग की है. अपुष्ट सूत्रों का दावा है कि ईरान के ड्रोन्स को पैट्रियाट और स्कड से गिराने में जब खर्च ज्यादा पड़ने लगा तो इसका भी इस्तेमाल किया गया है. लेकिन लोकेशन क्लियर नहीं है.

आयरन बीम
300 रुपये में एक ड्रोन का शिकार करने में सक्षम है. 100 किलोवॉट का हाई एनर्जी लेजर वीपन है. ये प्रकाश की गति से अपने टारगेट के पास पहुंचता है. ये मल्टी लेयर डिफेंस सिस्टम का हिस्सा है. इसे किसी भी वाहन या जहाज में लगाकर जमीन या समुद्र कहीं भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
USS प्रिबले
300 रुपये से 1000 रुपये में एक ड्रोन का शिकार करता है. अमेरिका की नौसेना में अर्लेग बर्क क्लास डिस्ट्रॉयर है. ये पहला और अकेला शिप है जिसमें ऐसे लेजर सिस्टम को लगाया गया है. लेजर वाले सिस्टम में आर्टिफिशएल इंटलीजेंस की बहुत प्रमुख भूमिका है. ईरान युद्ध में AI का बहुत निर्णायक और महत्वपूर्ण इस्तेमाल किया गया है. जिसने बहुत बड़े डेटा को एनाइलाज़ करके हथियार को टारगेट अचीव करने में क्रिटिकल मदद की है.

ईरान की मिसाइल सिटी
युद्ध में ईरान की मिसाइल सिटी बहुत चर्चा में रही है. मिसाइल और एटॉमिक स्टोरेज की किलेबंदी को तोड़ना एक बड़ी चुनौती बन कर सामने आई है. इसे मिटाने का दावा बार बार किया जा रहा है. लेकिन ईरान पलट कर वार करता है.तो दावों पर सवाल खड़े हो जाते हैं. ईरान ने बहुत चालाकी के साथ अपने मिसाइल कारखाने, मिसाइल स्टोरेज, मिसाइल लॉन्चर्स, एटॉमिक रिएक्टर्स और एटॉमिक लैब्स को बड़े और नेचुरल पहाड़ों के नीचे तहखाना बना कर छिपाया है. ये समुद्र से लगी ईरान की सीमा और पहाड़ों से बनने वाली ईरान की सीमा के आस पास बनाए गए हैं. इन्हें मिटाने के लिए अमेरिका ने तरह तरह के बम का इस्तेमाल किया है.
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GBU 72 एडवांस 5K पेनीट्रेटर
ये सबसे घातक और वजनी है. वजन 2,268 kg है. अमेरिकी सेनाओं ने इसे स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज के पास ईरान की भूमिगत मिसाइल सिटी में समुद्री सुरक्षा के लिए तैनात क्रूज मिसाइल बंकर्स के ऊपर गिराया है. खर्ग आईलैंड में भी भारी बम गिराए गए. जमीन के भीतर घुसकर भारी विनाश इस युद्ध की जरूरत भी है और खासियत भी. क्योंकि ईरान ने अपनी ताकत को तहखान से बख्तरबंद बनाया है. लेकिन अमेरिका को अपनी बम डील पर पूरा भरोसा है.

होर्मुज
युद्ध में जब ईरान ने होर्मुज को बंधक बना लिया तो पूरी दुनिया में हाहाकार मच गया. इकोनॉमी कांपने लगी. ईरान ने युद्ध को पूरी दुनिया में फैला दिया. अब पूरी दुनिया दबाव बनाने लगी कि युद्ध का निपटारा जल्दी करो. ये अमेरिका और इजरायल के खिलाफ किसी बड़े हथियार से कम नहीं है. एक सवाल खड़ा हुआ कि क्या तेल समुद्र के रास्ते को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है?
अमेरिका और इज़रायल के 24 हथियार
- F-15 ईगल फाइटर जेट
- F-35 लाइटनिंग टू स्टेल्थ फाइटर
- F-22 रैपटॉर स्टेल्थ फाइटर
- F-16 फाइटिंग फॉल्कन
- A-10 थंडर बोल्ट-2 वॉरथॉग
- B-2 स्प्रिट स्टेल्थ बॉम्बर
- EA-18G ग्रॉउलर (इलेक्ट्रॉनिक अटैक)
- F/A-18 हॉरनेट फाइटर जेट
- P-8A पोसीडॉन
- हवाई रडार विमान
- RC-135V/W रिवेट ज्वाइंट
- B-1B लान्सर (स्ट्रेटजिक बॉम्बर)
- C-17A ग्लोबमास्टर-3
- C-130 हरक्यूलिस
- MQ9 रिपर ड्रोन
- FLM-136 लूकास ड्रोन
- THAAD लॉन्चर
- पैट्रियॉट लॉन्चर
- हेलियस लेजर
- एरोविरॉनमेंट लेजर
- आयरन बीम लेजर
- ड्रोन डोम सिस्टम
- ड्रोन हंटर
- कोएटे इंटरसेप्टर
सूचना का हथियार
युद्ध में सूचना भी हथियार है. इसका इस्तेमाल राष्ट्र और सेना का मनोबल तोड़ने के लिए किया जाता है. IRGC,CENTCOM और IDF पूरी साजिश के साथ सूचना का इस्तेमाल कर रहे हैं. अमेरिका के राष्ट्रपति और युद्ध मंत्री दावा करते हैं कि ईरान की नौसेना खत्म हो चुकी है. सेकेंड वर्ल्डवॉर के बाद ऐसा पहली बार हुआ है.
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पीटर हेगसेथ
वहीं दूसरी तरफ ईरान के खिलाफ युद्ध का मोर्चा संभाल रही CENTCOM ने IRGC के सदस्यों को धमकी दी कि ईरान के नेवी चीफ अलीरेजा तंगसिरी की मौत के बाद भी सैन्य हमले जारी रहेंगे. IRGC के सदस्य अनावश्यक चोट और जोखिम से बचने के लिए अपने पद छोड़े और घर लौटें. अब अगर नौसेना खत्म है तो किस ईरानी नौसैनिक को काम छोड़कर घर बैठने की धमकी दी जा रही है और क्यों?तब जबकि युद्धमंत्री दावा करते हैं कि होर्मुज पर ईरान की हर क्षमता खत्म है.

पीटर हेगसेथ
सच्चाई ये है कि होर्मूल से कोई जहाज बिना ईरानी इजाजत के निकल नहीं पाया. अमेरिका ने होर्मुज छोड़ने के लिए ईऱान को बस तारीख पर तारीख दीं. युद्ध जब भी लड़े जाते हैं. हमेशा दावा किया जाता है कि हार और जीत हथियार से नहीं हौसले से होती है. जंग का फैसला आसमान से नहीं जमीन पर होता है. क्योंकि इतिहास हवा में नहीं लिखा जाता उसके नीचे सच्चाई का कठोर धरातल जरूरी है. ईराक से लेकर वियतनाम अमेरिका ने शुरूआत हवाई हमलों से की है लेकिन जमीन पर उसकी सेनाएं जरूर आई हैं. ईरान भी जमीन पर मुकाबले के लिए तैयार है.
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