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यूक्रेन के सामने 20 मिनट ही टिक पा रहे पुतिन के सैनिक, 'नौसिखियों की फौज' बनी सिरदर्द... रिपोर्ट में दावा

रूस और यूक्रेन के बीच जंग को साढ़े चार साल से ज्यादा समय हो गया है. इस बीच एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यूक्रेन के ड्रोन हमलों में तेजी से रूसी सैनिक मारे जा रहे हैं.

यूक्रेन के सामने 20 मिनट ही टिक पा रहे पुतिन के सैनिक, 'नौसिखियों की फौज' बनी सिरदर्द... रिपोर्ट में दावा
यूक्रेन जंग में रूसी सैनिकों के लगातार मारे जाने का दावा किया जा रहा है.

यूक्रेन में चल रही जंग को साढ़े चार साल से ज्यादा हो गए हैं, लेकिन रूस के लिए एक सबसे डरावनी बात ये है कि उसके नए सैनिक जंग के मैदान में कुछ मिनट ही टिक पा रहे हैं. 

एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रूसी सैनिक जंग में मैदान में सिर्फ 20 से 35 मिनट ही जिंदा रह पा रहे हैं. इससे पता चलता है कि पुतिन की सेना कितनी तेजी से ड्रोन हमलों का शिकार हो रही है. 

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से जुड़े इतिहासकार पीटर फ्रैंकोपन ने 'फॉरेन पॉलिसी' में लिखे एक लेख में रूसी मिलिट्री ब्लॉगर्स का हवाला देते हुए कहा है कि एक बार जब कोई सैनिक भर्ती हो जाता है, तो उसके ज्यादा से ज्यादा 10 दिन से 3 हफ्ते तक ही जिंदा रहने की उम्मीद होती है.

यूक्रेन की जंग और पुतिन की 'मीट ग्राइंडर'

दावा किया जा रहा है कि यूक्रेन से जंग लड़ने के लिए रूसी सेना के बड़े अफसर सैनिकों की तलाश कर रहे हैं. रूस अपनी सेना के लिए अक्सर 'मीट ग्राइंडर' शब्द का इस्तेमाल करता है. यानी, ऐसे सैनिक जो दुश्मनों को कच्चा चबा सकते हैं.

न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 के आखिर में रूसी अधिकारियों ने दावा किया था कि उन्होंने एक साल में 4.20 लाख से ज्यादा सैनिकों की भर्ती की है, लेकिन सरकारी मीडिया का अनुमान है कि इस साल नए सैनिकों की भर्ती में 30% से ज्यादा की कमी आई है.

पीटर फ्रैंकोपन ने अपने लेख में मिलिट्री ब्लॉगर्स के हवाले से बताया है कि रूस अभी भी हर दिन लगभग 800 से 1000 युवाओं को कॉन्ट्रैक्ट पर सेना में भर्ती कर रहा है, जिनमें से कइयों को कुछ ही दिन की ट्रेनिंग के बाद सीधे लड़ाई में भेज दिया जाता है.

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ज्यादा पैसों के बावजूद सेना में नहीं आ रहे रूसी

दावा है कि रूस में सैनिकों की कमी पड़ गई है और नए सैनिकों को भर्ती करने में मुश्किल आ रही है. सेना में भर्ती होने के लिए युवाओं को 80 हजार डॉलर तक का बोनस और 1.40 लाख डॉलर तक की कर्ज माफी का ऑफर दिया जा रहा है. लेकिन इसके बावजूद लोग सेना में नहीं रहे हैं.

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यूक्रेन जंग में मारे जा रहे रूसी सैनिक!

दावा है कि यूक्रेन जंग में अब रूस के हर महीने औसतन 30 हजार से ज्यादा सैनिक हताहत हो रहे हैं. पश्चिमी देशों का अनुमान है कि 2022 में जंग शुरू होने के बाद से रूस के 10 लाख से ज्यादा सैनिक हताहत हो चुके हैं. 

फ्रैंकोपन का अनुमान है कि जंग में अब यूक्रेन के अगर एक सैनिक की मौत हो रही है तो रूस के 8 सैनिक मारे जा रहे हैं.

फ्रैंकोपन का मानना है कि रूसी सैनिकों की मौत का सबसे बड़ा कारण यूक्रेन के ड्रोन हैं, जो जेलेंस्की की सेना के लिए सबसे असरदार हथियार बन गए हैं.

शुरुआत में कमजोर पड़ने के बाद यूक्रेन ने ड्रोन से इस जंग में रूस को बड़ा नुकसान पहुंचाया है. रूस के सैनिक इन ड्रोन हमलों से बच नहीं पा रहे हैं. फ्रैंकोपन ने मिलिट्री ब्लॉगर्स के हवाले से दावा किया है कि अगर कोई रूसी सैनिक जंग के मैदान में उतरा तो सिर्फ 20 से 35 मिनट तक ही जिंदा रह पाता है.

रूसी सैनिकों के जंग में ज्यादा न टिक पाने की एक वजह उनका नौसिखियापन भी है. दावा है कि रूसी सेना में भर्ती होने वाले नए सैनिकों को सिर्फ 10 से 21 दिन की ही ट्रेनिंग दी जा रही है. इतने कम समय की ट्रेनिंग के बाद उन्हें सीधे जंग में उतार दिया जा रहा है.

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रूस के लिए 'काल' बन रहे यूक्रेनी ड्रोन!

यूक्रेन के ड्रोन अब रूस के अंदरूनी इलाकों में भी तेजी से हमले कर रहे हैं. हाल ही में मॉस्को की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी पर एक बड़ा हमला हुआ था. अनुमान है कि इस हमले के कारण वह रिफाइनरी अगले साल तक शुरू नहीं हो पाएगी.

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स का अनुमान है कि यूक्रेन के ड्रोन हमलों ने रूस की तेल रिफाइनिंग क्षमता को हर दिन लगभग 7 लाख बैरल कम कर दिया है. रूस के आधे से ज्यादा इलाकों में अब ईंधन की राशनिंग हो रही है.

दावा किया जा रहा है कि रूस अपने बजट का आधे से ज्यादा हिस्सा सेना पर खर्च कर रहा है और रूस की अर्थव्यवस्था बेहद नाजुक स्थिति में आ गई है.

इन सबके बीच, हाल ही में रूसी सेना में बगावत की खबरें भी आई थीं. यूक्रेन में जंग लड़ चुके रूसी ब्लॉगर अलेक्जेंडर लुनिन ने रूसी कमांडरों पर अपने ही सैनिकों को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था और चेतावनी दी थी कि जल्द ही बगावत हो सकती है. 'फॉर्च्यून' की रिपोर्ट के मुताबिक, वीडियो में लुनिन ने पुतिन के साथ लाइव, ऑन-एयर मीटिंग की मांग की और कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ, तो 'सेना क्रेमलिन के खिलाफ अपने हथियार उठा लेगी.'

हालांकि, प्रोफेसर फ्रैंकोपन का मानना है कि बगावत की गुंजाइश कम है. उनका कहना है कि आने वाले महीने और खतरनाक हो सकते हैं, क्योंकि पुतिन सत्ता में बने रहने के लिए हर मुमकिन कोशिश करेंगे.

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