अमेरिका में आजकल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अंदरूनी बैठकों पर लिखे 2 पत्रकारों की एक किताब ने खूब हलचल मचा रखी है. इस किताब में भारत को लेकर भी एक दावा किया गया है. इसमें कहा गया है कि पिछले साल जनवरी में अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एक प्रस्ताव दिया था कि भारत की सेना को यूक्रेन में शांति बनाए रखने वाले मिशन का हिस्सा बनाया जा सकता है. लेकिन इस नई किताब के अनुसार कथित तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी.
दरअसल द न्यूयॉर्क टाइम्स के पत्रकार मैगी हैबरमैन और जोनाथन स्वान की नई किताब "रेजीम चेंज: इनसाइड द इम्पीरियल प्रेसिडेंसी ऑफ डोनाल्ड ट्रंप" आई है. इसमें कहा गया है कि 30 जनवरी 2025 को ट्रंप ने व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में वेंस और दूसरे सीनियर अधिकारियों के साथ बैठक की थी. यह बैठक ट्रंप के राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के 10 दिन ही बाद हुई थी.
कीथ केलॉग की इस योजना को 'ट्रंप्स हिस्टोरिक पीस डील' कहा गया था. इसमें ब्रिटेन, फ्रांस और नीदरलैंड के शांति सैनिकों (पीसकीपिंग ट्रूप्स) को तैनात करने का सुझाव दिया गया था. लेकिन जेडी वेंस ने नाटो देशों की सेना को यूक्रेन भेजने पर आपत्ति जताई. उनका कहना था कि इससे रूस भड़क सकता है, क्योंकि रूस पहले से ही नाटो पर भरोसा नहीं करता. दरअसल, उससे एक हफ्ते पहले ही रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा था कि नाटो सैनिकों की मौजूदगी किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं होगी.
फिर आया भारत का नाम....
किताब के अनुसार, इसके बाद जेडी वेंस ने पूछा कि क्या दूसरे देशों (यानी यूरोप के बाहर के देशों) के सैनिक यह भूमिका निभा सकते हैं. वेंस ने कथित तौर पर भारत का नाम सुझाया. लेकिन किताब के मुताबिक, यह सुनकर ट्रंप हंस पड़े. उन्होंने कहा, "भारतीय ऐसा नहीं करेंगे... वे इस तरह की चीज के लिए पैसा नहीं खर्च करेंगे." इसके बाद ट्रंप ने पीएम नरेंद्र मोदी के साथ अपनी दोस्ती का भी जिक्र किया.
बता दें कि भारत सरकार लगातार यह कहती रही है कि यूक्रेन युद्ध का पूरा अंत होना चाहिए और सभी मुद्दों का समाधान बातचीत के जरिए निकाला जाना चाहिए. फरवरी 2025 में पीएम मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वॉशिंगटन में मुलाकात भी हुई थी. यह मुलाकात किताब में बताई गई व्हाइट हाउस बैठक के कुछ दिनों बाद हुई थी. उस समय विदेश मंत्रालय ने प्रधानमंत्री मोदी के पुराने बयान को दोहराया था- किसी भी संघर्ष का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं हो सकता... यह युद्ध का युग नहीं है.
इसके अलावा भारत सरकार ने कभी औपचारिक रूप से यूक्रेन में शांति सैनिक भेजने के सवाल पर चर्चा नहीं की. हालांकि दो महीने बाद कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस मुद्दे का जिक्र किया था. अप्रैल 2025 में उन्होंने कहा था कि अगर ट्रंप द्वारा वादा किया गया युद्धविराम लागू होता है, तो भारत एक छोटी शांति सेना भेजने पर विचार कर सकता है. उन्होंने दिल्ली में एक प्राइवेट कार्यक्रम में कहा, "शांति सैनिकों के लिए सिर्फ यूरोप की तरफ मत देखिए... यहां भारत भूमिका निभा सकता है."
बता दें कि भारतीय सेना पहले भी कई बार शांति मिशनों में हिस्सा ले चुकी है. पिछले दस सालों में भारतीय सैनिक दक्षिण सूडान, सोमालिया और लेबनान समेत कई संघर्ष प्रभावित देशों में संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशनों में काम कर चुके हैं.
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